भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सेंट्रल बोर्ड में दो महत्वपूर्ण नियुक्तियां हुई हैं. इंडस्ट्रियलिस्ट आनंद महिंद्रा को एक बार फिर 4 साल के लिए बोर्ड में अंशकालिक, गैर-आधिकारिक निदेशक नियुक्त किया गया है. वहीं, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व प्रमुख एस सोमनाथ को भी आरबीआई के सेंट्रल बोर्ड में इसी पद पर नियुक्त किया गया है. रिजर्व बैंक ने इन नियुक्तियों की जानकारी दी है. दोनों नियुक्तियां 20 अगस्त 2026 से प्रभावी हैं.
आरबीआई के मुताबिक, केंद्र सरकार ने एस सोमनाथ श्रीधरा पनिक्कर को सेंट्रल बोर्ड में पार्ट टाइम नॉन-ऑफिशियल डायरेक्टर नियुक्त किया है. उनकी नियुक्ति 20 अगस्त 2026 से 4 साल के लिए या अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी. दोनों में से जो पहले हो, उसी के आधार पर कार्यकाल तय होगा. RBI के सेंट्रल बोर्ड में उनकी नियुक्ति से वित्तीय और तकनीकी क्षेत्र के अनुभव वाला एक नया चेहरा बोर्ड में शामिल हुआ है.
आनंद महिंद्रा की फिर से नियुक्ति
RBI ने एक अलग बयान में आनंद महिंद्रा की दोबारा नियुक्ति की जानकारी दी. सेंट्रल बैंक के मुताबिक महिंद्रा का नया कार्यकाल 4 साल का होगा और यह 20 अगस्त 2026 से प्रभावी माना जाएगा. इन दो नियुक्तियों के बाद RBI के सेंट्रल बोर्ड में कुल 11 सदस्य हैं. इनमें RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा और डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे, पूनम गुप्ता, शिरीष चंद्र मुर्मू और रोहित जैन शामिल हैं. गैर-आधिकारिक निदेशकों में आनंद महिंद्रा, एस सोमनाथ, रेवती अय्यर, प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी, अनुराधा ठाकुर और पूर्व सचिव संजय लोहिया शामिल हैं.
बोर्ड के अन्य सदस्यों की पृष्ठभूमि
रेवती अय्यर पूर्व डिप्टी कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल, गवर्नमेंट अकाउंट्स रह चुकी हैं. प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी रिसर्च एंड इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर डेवलपिंग कंट्रीज (RIS) के डायरेक्टर जनरल हैं. RBI की मौजूदा सूची में अनुराधा ठाकुर और पूर्व सचिव संजय लोहिया भी केंद्रीय बोर्ड के सदस्यों के तौर पर शामिल हैं.
RBI सेंट्रल बोर्ड का काम क्या है?
भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम के तहत सेंट्रल बोर्ड RBI के कामकाज के संचालन के लिए जिम्मेदार शीर्ष निकाय है. इसमें आधिकारिक और गैर-आधिकारिक दोनों तरह के निदेशक होते हैं. आधिकारिक निदेशकों में RBI गवर्नर और अधिकतम चार डिप्टी गवर्नर शामिल हो सकते हैं. इसके अलावा केंद्र सरकार अलग-अलग क्षेत्रों से गैर-आधिकारिक निदेशकों और सरकारी अधिकारियों को नामित करती है. सामान्य तौर पर गैर-आधिकारिक निदेशकों का कार्यकाल 4 साल का होता है.