शेयर बाजार में कब कौन सा शेयर पल में मालामाल कर दे और कब कोई स्टॉक अर्श से फर्श पर लाकर कंगाल बना दे कहा नहीं जा सकता. लेकिन ऐसे कई उदाहरण शेयर मार्केट में मौजूद हैं. गुरुवार को अपने निवेशकों को कुछ ऐसे पॉलिसी बाजार के शेयर ने हैरान किया, जो गिरावट के साथ खुलने के बाद ऐसा टूटा कि बाजार बंद होने पर एक ही दिन में 35% से ज्यादा क्रैश हो गया. Stock Market Crash के बीच पॉलिसी बाजार का शेयर सबसे ज्यादा गिरावट वाले शेयरों में टॉप पर रहा. इस स्टॉक के बिखरने के पीछे बीमा नियामक का एक प्रस्ताव वजह माना जा रहा है.
खुलते ही क्रैश हुआ PB Share
सबसे पहले बात करते हैं Policy Bazaar Share की चाल के बारे में, तो ये शेयर अपने बुधवार के बंद 1893 रुपये की तुलना में गिरकर 1697.70 रुपये पर खुला था और इसके बाद इसमें दनादन ऐसी गिरावट आती चली गई कि ये 1207 रुपये के लेवल पर फिसल गया. मार्केट क्लोज होने पर मामूली रिकवरी के बाद भी PB Fintech Share 35% फिसलकर 1244 रुपये पर क्लोज हुआ. एक ही दिन में शेयर के भाव में 642 रुपये की बड़ी गिरावट आई.
कंपनी की मार्केट वैल्यू धड़ाम
पॉलिसी बाजार के शेयर में आई बड़ी गिरावट का सीधा असर कंपनी के मार्केट कैपिटलाइजेशन पर भी देखने को मिला, जो एक झटके में कम होकर 55,310 करोड़ रुपये पर आ गया. बता दें कंपनी के शेयर का 52 वीक का हाई लेवल 1964.20 रुपये है, जबकि 52 वीक का नया लो-लेवल 1207 रुपये है, जो इसने गुरुवार को ही टच किया.
शेयर में भूचाल के पीछे वजह क्या?
Policy Bazaar Share Crash के पीछे की वजह देखें, तो भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) द्वारा पेश किया गया एक प्रस्ताव है. इसमें बीमा प्रोडक्ट्स में कमीशन, वितरण भुगतान और खर्चों में बदलाव का प्रपोजल है. इनमें जीवन, स्वास्थ्य और मोटर बीमा में कमीशन की लिमिट सख्त करना, कर्ज-आधारित बीमा बिक्री पर पेमेंट में बदलाव शामिल है. इरडा के इन प्रस्तावों ने निवेशकों के बीच चिंताएं बढ़ा दी हैं कि कम कमीशन से पॉलिसीबाजार जैसी बीमा कंपनियों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है.
जेफरीज ने भी किया अलर्ट
विदेशी ब्रोकरेज हाउस जेफरीज ने भी IRDAI के प्रस्ताव की वजह से बीमा कंपनियों की संभावित आय पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जताई है. Jefferies ने कहा है कि कमीशन रेट्स में 10% की कटौती से पीबी फिनटेक और टर्टलमिंट की आय में 10-12% की गिरावट आ सकती है. ब्रोकरेज ने इसे एक बड़ा जोखिम करार दिया है.
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि अगर बीमा कंपनियों को कम कमीशन भुगतान के साथ काम करना पड़ता है, तो उनके राजस्व और मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है. जब तक कि वे अपने प्राइस, प्रोडक्ट और डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल में इसके अनुसार बदलाव नहीं करते.
(नोट- शेयर बाजार में किसी भी तरह के निवेश से पहले अपने मार्केट एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें.)