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'मैं उन्‍हें गंभीरता से नहीं लेता...' अशनीर के तर्क पर PhonePe के CEO ने दिया ये जवाब!

यूपीआई चार्ज 15 अक्‍टूबर से लागू होने जा रहा है. ऐसे में इसकी आलोचलना तेजी से हो रही है. कुछ दिग्‍गज इसके सपोर्ट में भी उतरे हैं और इसे सही ठहराया है. अशनीर ग्रोवर ने यूपीआई चार्ज को एक नया टैक्‍स सिस्‍टम बता दिया है, जिसे लेकर फोनपे के सीईओ ने उनको जवाब दिया है.

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अशनीर को लेकर फोनपे सीईओ ने क्‍या कहा? (Photo: ITG)
अशनीर को लेकर फोनपे सीईओ ने क्‍या कहा? (Photo: ITG)

PhonePe के CEO समीर निगम ने चुनिंदा UPI ट्रांजेक्‍शन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का बचाव करते हुए तर्क दिया है कि यह नया नियम कार्ड से किए गए भुगतानों की तुलना में काफी सस्ता है और इसमें कई अधिक लेनदेन वाली कैटेगरी के लिए लिमिट भी शामिल है. ऐसे में UPI अभी भी सभी तरह के ट्रांजेक्‍शन से बेहतर विकल्‍प है. 

समीर निगम ने कहा कि प्रस्तावित ढांचे के तहत ₹2,000 से अधिक के UPI लेनदेन मात्रा के हिसाब से केवल लगभग 4% हैं, लेकिन लेनदेन प्राइस का लगभग 66% हिस्सा इन्हीं का है. निगम ने कहा कि इन मुख्य आंकड़ों को एमडीआर संरचना में शामिल छूटों और सीमाओं के तहत देखा जाना चाहिए. 

हमेशा से फ्री नहीं था UPI
निगम ने कहा कि यूपीआई हमेशा से शून्य एमडीआर सिस्‍टम नहीं था. उन्होंने कहा कि जब UPI शुरू हुई थी तब MDR 0.65% था और बताया कि सरकार ने 2020 में UPI को MDR फ्री कर दिया था. निगम के अनुसार, इस बदलाव से पहले UPI की तेज बढ़ोतरी से पता चलता है कि फ्री ट्रांजेक्‍शन इसके अपनाने के लिए अनिवार्य शर्त नहीं थी.

निगम ने कहा कि हमारे देश में अब लगभग 60 लाख या 60 लाख व्यापारी हैं, जिनके पास पीओएस हैं और वे क्रेडिट कार्ड, रुपे कार्ड और वॉलेट स्वीकार करते हैं, जिनमें से सभी का चार्ज डेढ़ से ढाई प्रतिशत है. ऐसे में यूपीआई का एमडीआर 0.4% है, जो भारत को छोड़कर दुनिया भर में सबसे कम है. 

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निगम ने कहा कि यूपीआई के 95-96% व्यापारी लेनदेन 2,000 रुपये से कम के होते हैं और इसलिए उन पर प्रस्तावित एमडीआर लागू नहीं होगा. उन्होंने किराने का सामान, रिक्शा और पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसे रोजमर्रा के भुगतानों का उदाहरण दिया.

ग्रोवर को मैं गंभीरता से नहीं लेता
इंडिया टुडे के साथ बातचीत के दौरान एमडीआर को टैक्‍स सिस्‍टम बताने वाली आलोचनाओं के जवाब में निगम ने कहा कि इसका विकल्प सरकार द्वारा दी जाने वाली निरंतर सब्सिडी है. उन्होंने कहा कि हम सरकार से सब्सिडी नहीं चाहते. हम अपने दम पर खड़े हैं. हम इक्विटी जुटाते हैं, हम व्यवसाय के रूप में लोन लेते हैं और हम लाभ कमाने वाले व्यवसाय चला रहे हैं. 

BharatPe के पूर्व को-फाउंडर अश्वनीर ग्रोवर द्वारा UPI चार्ज की आलोचना करने पर उन्‍होंने कहा कि मैं उन्‍हें गंभीरता से नहीं लेता. फिर तर्क दिया कि '0' एमडीआर विश्व स्तर पर एक असामान्य व्यवस्था थी और जैसे-जैसे लेनदेन की मात्रा बढ़ती है, उद्योग को एक टिकाऊ कमर्शियल मॉडल की आवश्‍यकता होती है. 

आखिर ग्रोवर ने क्‍या कहा था? 
एक टीवी से बातचीत के दौरान ग्रोवर ने UPI पर चार्ज की संभावना की आलोचना की और तर्क दिया कि इससे व्‍यापारी और उपभोक्‍ता दोनों ही इस प्‍लेटफॉर्म का यूज करने से परेशान हो सकते हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि भारत में डिजिटल भुगतान को गति देने में मदद करने वाली इस भुगतान प्रणाली पर शुल्क लगाने पर विचार क्यों किया जा रहा है. 

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