वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों को लेकर रेलवे की एक बड़ी योजना अब सिर्फ निर्माण तक सीमित नहीं रहेगी. 80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के लिए 35 साल तक रखरखाव की जिम्मेदारी तय करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड (TRSL) और भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) के जॉइंट वेंचर के जरिए इन ट्रेन सेट्स के लंबे समय तक रखरखाव का काम किया जाएगा.
दरअसल, अप्रैल 2023 में टीटागढ़ रेल सिस्टम्स और BHEL ने 80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के निर्माण के लिए करीब ₹24,000 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया था. अब इसी परियोजना से जुड़े 35 साल के रखरखाव के लिए भी फ्रेमवर्क तैयार किया जा रहा है. यानी ट्रेनों के निर्माण के साथ उनके लंबे समय तक रखरखाव की व्यवस्था भी तय की जा रही है.
50-50 हिस्सेदारी वाला होगा जॉइंट वेंचर
रेगुलेटरी फाइलिंग के मुताबिक, प्रस्तावित जॉइंट वेंचर में BHEL और टीटागढ़ रेल सिस्टम्स की 50-50 फीसदी हिस्सेदारी होगी. दोनों कंपनियां इक्विटी कैपिटल में बराबर योगदान देंगी. यह जॉइंट वेंचर एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के तौर पर बनाया जाएगा. इसकी शुरुआती पेड-अप शेयर कैपिटल ₹50 लाख होगी और इसका रजिस्टर्ड ऑफिस दिल्ली में होगा.
बोर्ड में दोनों कंपनियों के बराबर प्रतिनिधि
जॉइंट वेंचर के बोर्ड में भी दोनों कंपनियों को बराबर प्रतिनिधित्व मिलेगा. BHEL दो निदेशकों को नामित करेगी, जबकि टीटागढ़ रेल सिस्टम्स भी दो निदेशक नामित करेगी. इस व्यवस्था से जॉइंट वेंचर के संचालन और बड़े फैसलों में दोनों कंपनियों की बराबर भागीदारी रहेगी.
जॉइंट वेंचर 35 साल तक क्या काम करेगा
प्रस्तावित कंपनी का मुख्य काम BHEL और टीटागढ़ रेल सिस्टम्स की साझेदारी के तहत तय गतिविधियों को आगे बढ़ाना होगा. इसी फ्रेमवर्क के जरिए 80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेन सेट्स के रखरखाव से जुड़ी जिम्मेदारियां भी संभाली जाएंगी. रेगुलेटरी फाइलिंग के मुताबिक, जॉइंट वेंचर दोनों कंपनियों की तकनीकी क्षमता और विशेषज्ञता का इस्तेमाल करेगा.
इसका फोकस ट्रेन सेट्स का ऑपरेशन रेडीनेस (Operational Readiness), सेफ्टी और विश्वसनीयता बनाए रखने पर रहेगा. यह व्यवस्था इन ट्रेनों की अनुमानित 35 साल के सर्विस पीरियड को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है. यानी ट्रेनों के निर्माण के बाद लंबे समय तक उनके रखरखाव की जिम्मेदारी के लिए भी एक तय इंस्टीट्यूशनल फ्रेमवर्क तैयार किया जा रहा है.
तैयार करने हैं 260 वंदे भारत स्लीपर रेक
भारतीय रेलवे वंदे भारत सीरीज की स्लीपर ट्रेनों को अब बड़े स्तर पर विस्तार देने की तैयारी में है. रेलवे की मौजूदा योजना के तहत कुल 260 वंदे भारत स्लीपर रेक तैयार किए जाने हैं. इससे लंबी दूरी के रात वाले सफर के लिए तेज और आधुनिक ट्रेनों का नेटवर्क बढ़ेगा. मौजूदा योजना के मुताबिक, 260 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के रेक अलग-अलग कंपनियों और उत्पादन इकाइयों में तैयार किए जाएंगे.
इनमें भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) 10, चेन्नई इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) 50, किनेट रेलवे सॉल्यूशंस (KRS) 120 और टीटागढ़-भेल (Titagarh-BHEL 80) रेक बनाएंगे. BEML को शुरुआती 10 ट्रेनसेट तैयार करने की जिम्मेदारी मिली है. ये ट्रेनें 16-कोच वाली होंगी. वहीं, ICF चेन्नई 50 ट्रेनसेट तैयार करेगा. ICF के 24-कोच वाले सेट में पैंट्री कार भी शामिल होगी. अधिकारियों के मुताबिक, इसके लिए प्रोडक्शन ड्रॉइंग तैयार की जा चुकी हैं.
RVNL-रूस कंपनी बनाएंगे 120 ट्रेनसेट
रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) और रूसी कंपनी ट्रांसमैशहोल्डिंग (TMH) की जॉइंट वेंचर Kinet Railway Solutions को 120 ट्रेनसेट तैयार करने हैं. ये सभी ट्रेनसेट लातूर में बनाए जाएंगे और हर ट्रेन में 16 कोच होंगे. RVNL के मुताबिक, इनकी मैन्युफैक्चरिंग शुरू हो चुकी है. कंपनी के 23वें एनुअल जनरल मीटिंग में चेयरमैन सलीम अहमद ने बताया था कि प्रोटोटाइप की डेडलाइन में बदलाव किया गया है. पहले इसे जून 2026 तक तैयार करने का लक्ष्य था, जिसे अब बढ़ाकर 31 मार्च 2027 कर दिया गया है.