पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल इतना महंगा हो गया है कि अब सरकार के सामने तेल बचाने के लिए कामकाज और बाजार के समय में कटौती जैसे कदमों पर विचार करने की नौबत आ गई है. पाकिस्तानी में पेट्रोल की कीमत ₹384.34 और हाई-स्पीड डीजल (HSD) की कीमत ₹415.83 प्रति लीटर पहुंचने के बाद ईंधन की खपत घटाने के विकल्प तलाशे जा रहे हैं. मामला सिर्फ पेट्रोल-डीजल महंगा होने तक सीमित नहीं है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईंधन आपूर्ति से जुड़ी मुश्किलों के बीच पाकिस्तान सरकार अब यह सोचने पर मजबूर है कि देश में तेल की खपत कैसे कम की जाए.
पाकिस्तान सरकार ने 16 सितंबर से पेट्रोल की कीमत में ₹4.10 और हाई-स्पीड डीजल में ₹6.41 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है. इसके बाद पेट्रोल ₹384.34 और हाई-स्पीड डीजल ₹415.83 प्रति लीटर हो गया है. यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों और सप्लाई को लेकर दबाव बना हुआ है. महंगे ईंधन का असर कम करने के लिए सरकार अब सिर्फ कीमतों पर नहीं, बल्कि खपत घटाने पर भी ध्यान दे रही है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ट्रांसपोर्ट सेक्टर में ईंधन की खपत कम करने के विकल्पों की समीक्षा के लिए बैठक की. इसमें सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में तेल बचाने के उपायों पर चर्चा हुई.
क्या पाकिस्तान में फिर लगेगा लॉकडाउन? यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल बन गया है. पाकिस्तान में पहले भी ईंधन बचाने के लिए बाजारों के समय को सीमित करने जैसे कदम उठाए जा चुके हैं. अप्रैल में लागू किए गए ऐसे उपायों के तहत बाजारों को रात 8 बजे तक बंद करने की व्यवस्था की गई थी. अब ईंधन संकट गहराने के बाद इसी तरह के उपाय फिर से चर्चा में हैं. पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने भी कहा था कि मौजूदा हालात को देखते हुए 'स्मार्ट लॉकडाउन' की दिशा में कुछ कदम उठाए जा सकते हैं.
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हालांकि, बाद में सरकार ने 'स्मार्ट लॉकडाउन' की खबरों को खारिज कर दिया. संसदीय मामलों के मंत्री तारिक फजल चौधरी ने कहा कि स्मार्ट लॉकडाउन पर न तो बैठक में चर्चा हुई और न ही ऐसा कोई फैसला लिया गया है. यानी फिलहाल पाकिस्तान में लॉकडाउन लागू नहीं हुआ है, लेकिन महंगे ईंधन के बीच खपत घटाने के लिए सख्ती वाले विकल्पों पर जरूर विचार हो रहा है.
पाकिस्तान में पेट्रोल पर कैपिंग
एक तरफ पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ सरकार लोगों को सीमित राहत देने की कोशिश कर रही है. प्रधानमंत्री की फ्यूल रिलीफ स्कीम के तहत मोटरसाइकिल चालकों को हर हफ्ते 5 लीटर और कार मालिकों को हर 10 दिन में 10 लीटर सब्सिडी वाला पेट्रोल देने की योजना है. लेकिन पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने खुद कहा कि अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के झटके को पूरी तरह पचाना सरकार के लिए संभव नहीं है. उनके मुताबिक, सरकार की ओर से दी जा रही राहत की भी एक सीमा है और अर्थव्यवस्था फिलहाल इससे ज्यादा बोझ नहीं उठा सकती.
पश्चिम एशिया तनाव का असर
पाकिस्तान की मौजूदा मुश्किल के पीछे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिगड़ता ऊर्जा संकट भी बड़ी वजह है. होर्मुज और बाब-अल-मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के जरिए सप्लाई बाधित होने की आशंका, पश्चिम एशिया में तनाव और ऊर्जा ढांचे पर हमलों ने वैश्विक तेल बाजार पर दबाव बढ़ाया है. पाकिस्तान जैसे देश के लिए इसका सीधा असर ईंधन की कीमतों पर पड़ता है. यही वजह है कि वहां सरकार अब सिर्फ महंगे पेट्रोल से लोगों को राहत देने की कोशिश नहीं कर रही, बल्कि तेल की कुल खपत कम करने के विकल्प भी तलाश रही है.
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बिजली के मोर्चे पर भी दबाव
ईंधन संकट का असर सिर्फ पेट्रोल पंपों तक सीमित नहीं है. बिजली उत्पादन को लेकर भी सप्लाई की चुनौती बनी हुई है. पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्री अवैस लेघारी के मुताबिक, अगस्त 2026 में देश के कुल बिजली उत्पादन का करीब 72 फीसदी हिस्सा घरेलू स्रोतों से आया. इसमें हाइडल पावर का हिस्सा 38 फीसदी, स्थानीय कोयले का 11 फीसदी और न्यूक्लियर का 10 फीसदी था. स्थानीय गैस से 7 फीसदी, विंड से 6 फीसदी और सोलर से 1 फीसदी बिजली बनी. बाकी करीब 28 फीसदी उत्पादन इंपोर्टेड कोयले और रीगैसिफाइड लिक्विफाइड नेचुरल गैस (RLNG) से आया.
सरकार के सामने दोहरी चुनौती
पाकिस्तान के सामने इस समय एक साथ दो बड़ी चुनौतियां हैं. पहली, लोगों पर बढ़ते पेट्रोल-डीजल के बोझ को कम करना और दूसरी, सीमित संसाधनों के बीच ईंधन की खपत को नियंत्रित करना. एक तरफ सरकार राहत योजना चला रही है, तो दूसरी तरफ बाजार के समय कम करने और दूसरे मितव्ययिता वाले उपायों पर विचार की बात सामने आ रही है. यही वजह है कि 'स्मार्ट लॉकडाउन' की चर्चा ने जोर पकड़ा है.