ईरान के साथ तनाव को कम करने के लिए सोमवार को स्विट्जरलैंड में पहले दौर की शांति वार्ता सफल रही. इस बीच, संयुक्त राज्य अमेरिका ने एक महत्वपूर्ण कमद उठाया है, जिसमें 60 दिनों का एक अस्थायी सामान्य लाइसेंस जारी किया है, जो ईरानी कच्चे तेल, पेट्रोकेमिकल्स के उत्पादन, परिवहन और बिक्री से संबंधित लेनदेन की मंजूरी देता है.
इसका सीधा मतलब है कि ईरानी कच्चे तेल की अब मार्केट में एंट्री हो चुकी है, जबकि अमेरिका ने ईरानी तेल पर 2018 में प्रतिबंध लगाया था. यह फैसला 22 तारीख को वाशिंगटन और तेहरान के बीच स्विट्जरलैंड में हुई सफल राजनयिक वार्ता के बाद आया है, जिसे अधिकारियों ने उपयोगी बताया है.
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह लाइसेंस तेल की कीमतों में स्थिरता, सुधार लाने और दुनिया को एनर्जी प्रोवाइड कराने के लिए उठाया गया है. साथ ही होर्मुज मार्ग से तेल का प्रवाह जारी रखने के उद्देश्य से भी ईरानी कच्चे तेल पर छूट दी गई है. बेसेंट के अनुसार, ईरान ने होर्मुज से स्वतंत्र और टैंकरों को खुले तौर पर आने-जाने की मांग मानी है. साथ ही इंटरनेशनल परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की भी ईरान में एंट्री की मंजूरी दी है.
ईरान के ऊर्जा क्षेत्र को अस्थायी राहत
यह लाइसेंस ईरान से मिले पेट्रोलियम, पेट्रोलियम उत्पादों और पेट्रोकेमिकल्स के रिफाइन, उत्पादन, डिस्ट्रीब्यूशन, परिवहन और बिक्री से संबंधित गतिविधियों की मंजूरी देता है. यह छूट 21 अगस्त, 2026 तक प्रभावी रहेगी. यह छूट नए ढांचे के तहत आने वाले लेनदेन को पूरा करने के लिए आवश्यक होने पर ईरानी मूल के कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के संयुक्त राज्य अमेरिका में आयात की अनुमति देती है. हालांकि, अमेरिकी वित्त विभाग ने स्पष्ट किया कि ये छूट उत्तर कोरिया या क्यूबा से जुड़े लेन-देन पर लागू नहीं होती हैं, क्योंकि ये दोनों देश अलग-अलग अमेरिकी प्रतिबंध व्यवस्थाओं के अधीन हैं.
तेल की कीमतों में गिरावट
वैश्विक बाजारों में ईरान से अतिरिक्त आपूर्ति की संभावना को देखते हुए ऊर्जा बाजारों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी है. वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमत मार्च की शुरुआत के बाद पहली बार 74 डॉलर प्रति बैरल से नीचे गिर गई, इसमें 2.7% की गिरावट आई और यह 73.82 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. ब्रेंट क्रूड में भी भारी गिरावट आई और यह 2.8% गिरकर 78.29 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया.
विश्लेषकों ने कहा कि बाजार की प्रतिक्रिया इस उम्मीद को दर्शाती है कि ईरानी निर्यात की वापसी से वैश्विक आपूर्ति में काफी मात्रा में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे मिडिल ईस्ट में संभावित रुकावट को लेकर चिंताओं को कम किया जा सकता है और ऊर्जा बाजारों को संतुलित करने में मदद मिल सकती है.
भारत को क्या होगा लाभ?
ईरान के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल और प्राकृतिक गैस भंडार में से कुछ हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी वापसी से ग्लोबल एनर्जी फ्लो, रिफाइनरी ऑपरेशन और कच्चे तेल की कीमतों पर असर हो सकता है. ईरानी तेल पर छूट से भारत ईरान से तेल की खरीद बढ़ा सकता है, जिससे तेल खरीद की लागत में कटौती हो सकती है. इसका असर ये होगा कि आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों में कटौती हो सकती है.