इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज गंवाने के बाद भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) भले ही हालात को सामान्य बता रहा हो, लेकिन तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है. आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 जीतने के बाद से टीम इंडिया का प्रदर्शन लगातार गिरा है. पहले आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में टीम इंडिया को 0-2 से क्लीन स्वीप झेलना पड़ा. फिर इंग्लैंड ने टी20 और वनडे दोनों सीरीज में भारत को पीछे छोड़ दिया.
लॉर्ड्स में तीसरा ओडीआई 27 रनों से हारने के बाद बीसीसीआई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने टीम का बचाव किया. उन्होंने कहा कि मुकाबला काफी संघर्षपूर्ण रहा और हार की सबसे बड़ी वजह इंग्लैंड के आखिरी तीन ओवरों में बनाए गए 60 रन रहे. राजीव शुक्ला ने एएनआई से कहा, 'हमारे बल्लेबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया. खासकर रोहित शर्मा और विराट कोहली ने एक बार फिर साबित किया कि उनमें अभी भी दम बाकी है. शुभमन ने भी अच्छी बल्लेबाजी की. मुझे लगता है कि टीम का कॉम्बिनेशन अच्छा है और सब कुछ ठीक है.'
क्या सच में सब ठीक है?
बोर्ड का यह बयान जरूर सकारात्मक है, लेकिन आंकड़े कुछ और ही इशारा करते हैं. शुभमन गिल की कप्तानी में भारत अब तक तीन वनडे सीरीज हार चुका है. कभी ऐसा दौर था जब भारत की वनडे सीरीज में हार बड़ी खबर होती थी, लेकिन अब यह लगातार देखने को मिल रही है. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हार, न्यूजीलैंड से घर में सीरीज गंवाना और अब इंग्लैंड के हाथों द्विपक्षीय वनडे सीरीज हारना भारतीय टीम की गिरती लय को दिखाता है.
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इस दौरे ने सबसे बड़ी चिंता तेज गेंदबाजी को लेकर बढ़ाई है. जसप्रीत बुमराह के नहीं खेलने पर भारतीय गेंदबाजी पूरी तरह बेअसर नजर आई. लॉर्ड्स में इंग्लैंड ने 387 रनों का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया, जो इस ऐतिहासिक मैदान पर सबसे बड़ा ओडीआई स्कोर भी है. बुमराह की गैरमौजूदगी में भारत के पास ऐसा कोई गेंदबाज नहीं दिखा जो नियमित अंतराल पर विकेट निकाल सके या विपक्षी बल्लेबाजों पर दबाव बना सके.
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टीम कॉम्बिनेशन के बहाने प्रयोग जारी
टीम मैनेजमेंट लगातार बल्लेबाजी को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त बल्लेबाज या ऑलराउंडर खिलाने पर जोर दे रहा है. इसका नुकसान यह हुआ कि कुलदीप यादव जैसे मैच जिताने वाले स्पिनर को लगातार बाहर बैठना पड़ा. मिडिल ओवर्स में विकेट निकालने की क्षमता कुलदीप की सबसे बड़ी ताकत है, लेकिन टीम कॉम्बिनेशन के नाम पर उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है.
भारत लगातार आठ बल्लेबाजों के साथ उतर रहा है, लेकिन इसका फायदा भी नहीं मिला. दूसरे वनडे में टीम 233 रनों पर सिमट गई थी. तीसरे ओडीआई में भी बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय बल्लेबाज जीत नहीं दिला सके. पूरे यूरोप दौरे के दौरान भारतीय टीम चोटों से भी जूझती रही. जसप्रीत बुमराह, वॉशिंगटन सुंदर समेत कई खिलाड़ी फिटनेस समस्याओं से परेशान रहे. इस वजह से टीम कॉम्बिनेशन भी बार-बार बदलना पड़ा.
लगातार मिल रही हार, रणनीतिक फैसलों पर उठ रहे सवाल और खिलाड़ियों की चोटों ने हेड कोच गौतम गंभीर पर भी दबाव बढ़ा दिया है. अगर जल्द ही टीम ने अपनी कमजोरियों को दूर नहीं किया तो 2027 वनडे वर्ल्ड कप की तैयारियों पर भी इसका असर पड़ सकता है.