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Iran Warning: पहले होर्मुज बंद... अब ईरान की नई धमकी, कच्चे तेल की कीमतों में आग

Iran-Israel Attack के चलते ग्लोबल टेंशन चरम पर है और दुनिया में तेल-गैस का पहले से जारी संकट बढ़ता नजर आ रहा है. ईरान ने होर्मुज के बाद अब बाब-अल-मंदेब समुद्री रास्ते को लेकर वॉर्निंग दी है, वहीं तेल की कीमतें अचानक उछल गई हैं.

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ईरान की धमकी के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल. (Photo: Reuters)
ईरान की धमकी के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल. (Photo: Reuters)

मिडिल ईस्ट में जंग (Middle East War) एक बार फिर शुरू हो गई है और अचानक ग्लोबल टेंशन चरम पर पहुंच गई है. ईरान-हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच ताबड़तोड़ मिसाइल अटैक ने क्रूड ऑयल की कीमतों में फिर से आग लगा दी है, तो इससे सहमे दुनियाभर के शेयर बाजारों में कोहराम मच गया है. 

Iran-Israel जंग ने पहले से ही होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से गहराए तेल-गैस संकट को लेकर दुनिया के तमाम देशों की चिंता को और भी बढ़ा दिया है, क्योंकि ईरान ने नई धमकी (Iran Warning) दे डाली है, जो डराने वाली है. दरअसल, इजरायल के मिसाइल अटैक के बाद ईरान की ओर से बयान जारी कर कहा गया है कि अगर हमला बढ़ा तो वह एक और अहम समुद्री रास्ता बंद कर सकता है. अगर ऐसा होता है तो Oil-Gas Crisis गहरा सकता है. 

इधर जंग शुरू, उधर क्रूड में आग
अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई और इस बीच ईरान-इजरायल में भीषण जंग की शुरुआत हो गई, जिसने मिडिल ईस्ट तनाव को फिर से हाई पर पहुंचा दिया. इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिला है और इसमें तेज उछाल आया है. 

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बीते कुछ दिनों में लगातार टूटती नजर आ रही ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत खबर लिखे जाने तक करीब 5 फीसदी उछलकर 98 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई, तो वहीं दूसरी ओर WTI क्रूड ऑयल का प्राइस भी जोरदार तेजी लेते हुए 95 डॉलर प्रति बैरल पर जा पहुंचा. कच्चे तेल की कीमतों में लगी इस आग ने दुनिया में एक बार फिर से महंगाई का जोखिम बढ़ा दिया है. इसके असर से जापान, कोरिया से हांगकांग तक के शेयर बाजार सोमवार को क्रैश (Global Stock Market Crash) हो गए हैं. 

Iran Israel War

ईरान ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन
इजरायल की ओर से ईरान पर कड़ी जवाबी कार्रवाई करते हुए मिसाइल अटैक किए गए. इस हमले के बाद ईरान ने दुनिया की टेंशन बढ़ाने वाली चेतावनी दे डाली. ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकार अली वेलायती ने होर्मुज स्ट्रेट की तरह ही जरूरी समुद्री रास्ते बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट को लेकर यह वॉर्निंग दी है, जिससे दुनिया के बड़े व्यापारिक रास्तों पर सीधा असर पड़ सकता है. ईरान की ओर से कहा गया है कि अगर हमला बढ़ा तो वह इस अहम समुद्री रास्ते को बंद कर सकता है. 

'गलतफहमी में न रहे दुश्मन'
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, वेलायती ने साफ कहा कि, 'मौजूदा हालात को देखकर दुश्मन गलतफहमी में न रहे. इजरायल के पास दो रास्ते हैं, या तो वह अपनी बेवकूफी रोक दे या फिर ऐसे हालात का सामना करे जहां दो अहम समुद्री रास्तों पर संतुलित जवाब मिल सकता है.' ईरानी नेता का साफ इशारा समुद्री आवाजाही पर दबाव बढ़ाने की ओर है. 

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होर्मुज से संकट, अब मचेगी दहशत
मिडिल ईस्ट में नए सिरे से शुरू हुई इस जंग ने दुनिया के तमाम देशों की टेंशन को बढ़ा दिया है. क्योंकि अमेरिका से तनाव के बीच ईरान ने पहले से ही दुनिया की कुल तेल जरूरत के करीब 20 फीसदी सप्लाई के लिए जरूरी होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर रखा है, जिससे पाकिस्तान, ब्रिटेन, श्रीलंका से लेकर भारत तक में तेल-गैस का संकट गहराया हुआ है. 

Iran Warning

वहीं अब बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट को बंद करने की ईरानी धमकी इस संकट को गहराने वाली साबित हो सकती है. इसकी वजह ये है कि Bab El Mandeb Strait समुद्री रास्ता यमन, जिबूती-इरिट्रिया के बीच स्थित है, जो यूरोप, एशिया और अरब देशों के बीच ट्रेड के लिए बेहद जरूरी है. एक्सपर्ट्स भी कहते हुए नजर आ रहे हैं कि बाब-अल-मंदेब समुद्री रूट पर दबाव का असर दुनिया के व्यापार और तेल सप्लाई पर पड़ सकता है, जिससे कई देशों में महंगाई बढ़ने की चिंता भी गहरा सकती है. 

इन देशों की बढ़ेगी मुसीबत!
बाब-अल-मंदेब को स्वेज कैनाल का एंट्री पॉइंट माना जाता है. ये तमाम देशों में तेल-गैस की आपूर्ति के लिए अहम मार्ग है और एशिया से यूरोप जाने वाले जहाज इसी रास्ते से गुजरते हैं. हर रोज लाखों बैरल कच्चा तेल और अन्य पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स इस समुद्री रास्ते से गुजरते हैं. खासतौर पर खाड़ी देशों का तेल इस रास्ते से यूरोपीय संघ (EU) के देशों, इटली, फ्रांस, स्पेन, जर्मनी और ब्रिटेन तक पहुंचता है. इसके बंद होने से इन तमाम देशों में मुसीबत बढ़ सकती है. 

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हालांकि, यहां बता दें कि व्यावहारिक रूप से बाब-अल-मंदेब ईरान के नियंत्रण में नहीं है, लेकिन ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों का यमन के कुछ हिस्सों पर प्रभाव है और ये तेल-गैस के जहाजों की आवाजाही बाधित करके दुनिया में तेल-गैस का संकट बढ़ा सकते हैं. 

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