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Share Market News: शेयर बाजार ग्रीन में खुला... देखते-देखते हुआ धड़ाम, Sensex-Nifty में सुस्ती के पीछे ये कारण

Share Market Sensex Nifty: तीन दिन की गिरावट के बाद शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार ने तेजी के साथ शुरुआत की, लेकिन कुछ ही देर में सेंसेक्स और निफ्टी की बढ़त कमजोर पड़ने लगी. आईटी शेयरों की खरीदारी के बावजूद कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक बाजारों की कमजोरी ने निवेशकों को सतर्क रखा.

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आईटी शेयरों की खरीदारी के बावजूद कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक बाजारों की कमजोरी ने निवेशकों को सतर्क रखा. (File Photo)
आईटी शेयरों की खरीदारी के बावजूद कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक बाजारों की कमजोरी ने निवेशकों को सतर्क रखा. (File Photo)

भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को तीन कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट पर ब्रेक लगा, लेकिन देखते ही देखते यह धड़ाम हो गया. आईटी शेयरों में खरीदारी के दम पर बाजार ने बढ़त के साथ कारोबार की शुरुआत की. बीएसई का सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 416.25 अंक चढ़कर 73,665.64 पर खुला, जबकि एनएसई का निफ्टी 50 54.55 अंक की बढ़त के साथ 22,742.20 पर पहुंच गया. बैंक निफ्टी भी 40.05 अंक की तेजी के साथ 54,965.75 पर खुला. निफ्टी आईटी स्टॉक्स में 300 से अधिक अंकों का उछाल रहा. टीसीएस के शेयरों में 2.63%, इंफोसिस स्टॉक्स में 1.53%, विप्रो स्टॉक्स में 0.85%, एचसीएल टेक के शेयरों में 1.22% की तेजी रही.

हालांकि, कारोबारी सत्र के घंटे बढ़ने के साथ बाजार की चाल सुस्त पड़ती दिखाई दी. अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों में कमजोरी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर मार्केट पर देखने को मिला. सेंसेक्स और निफ्टी की बढ़त धीरे-धीरे कमजोर पड़ती गई. निफ्टी ग्रीन में खुलने के कुछ ही देर में रेड जोन में पहुंच गया. इसमें 100 से अधिक अंकों की गिरावट रही. सेंसेक्स भी 150 अंकों से अधिक गिरकर रेड जोन में पहुंच गया. बैंक निफ्टी पूरे सत्र के दौरान रेड जोन में ही रहा. इसमें 500 से अधिक अंकों की गिरावट रही.

ब्रेंट क्रूड 114 डॉलर प्रति बैरल के पास

ब्रेंट क्रूड करीब 114 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से महंगाई, कंपनियों की लागत और देश के व्यापार घाटे पर दबाव बढ़ सकता है. मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये ने भी हल्की मजबूती के साथ शुरुआत की. गुरुवार के 94.82 रुपये प्रति डॉलर के बंद स्तर के मुकाबले शुक्रवार को रुपया 3 पैसे मजबूत होकर 94.79 प्रति डॉलर पर खुला. दूसरी ओर, एशियाई बाजारों में गिरावट देखने को मिली. अमेरिकी शेयर बाजार भी गुरुवार को ज्यादातर गिरावट के साथ बंद हुए.

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर कंपनियों के बढ़ते खर्च और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को लेकर निवेशकों की चिंता ने बाजार की धारणा पर दबाव डाला. घरेलू बाजार में अब निवेशकों की नजर सितंबर तिमाही के कंपनियों के नतीजों पर भी रहेगी. इन नतीजों से यह संकेत मिलेगा कि महंगी ऊर्जा, कमजोर वैश्विक माहौल और आर्थिक अनिश्चितता के बीच कंपनियों की कमाई कैसी रही है.

अगले हफ्ते बाजार को मिलेगा सहारा

शेयर बाजार के लिए कुछ सकारात्मक संकेत भी हैं. 10 साल के अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड में आई तेज गिरावट और रुपये की मजबूती इसमें अहम योगदान देंगे. ये कारक विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली कम करने में मदद कर सकते हैं, जिससे शेयर बाजार को सहारा मिलने की उम्मीद है.

जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में पिछले दो दिनों के दौरान करीब ₹3.73 लाख करोड़ की बोलियां मिली हैं. शेयरों के अलॉटमेंट की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस रकम में से ₹3 लाख करोड़ से ज्यादा के बाजार में वापस आने की संभावना है. इससे अगले सप्ताह बाजार में नकदी की उपलब्धता बढ़ सकती है और शेयरों को सहारा मिल सकता है.

बड़ी कंपनियों के शेयरों में दिखेगी मजबूती

शेयर बाजार में अगर सोमवार को तेजी आती है, तो उसकी अगुवाई बड़ी कंपनियों के शेयर कर सकते हैं. लार्ज-कैप शेयरों में अपेक्षाकृत मजबूती दिख रही है और अच्छी ग्रोथ वाली कंपनियों के शेयरों में उचित कीमत पर निवेश के अवसर बन सकते हैं.

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इसके उलट, मिड-कैप और खासकर स्मॉल-कैप शेयरों में दबाव जारी रह सकता है. इन शेयरों के वैल्यूएशन में पहले आई तेजी को कई मामलों में कंपनियों के मजबूत कारोबारी प्रदर्शन के बजाय बाजार में उपलब्ध अतिरिक्त कैश इनफ्लो ने बढ़ावा दिया था. ऐसे में कुछ शेयरों की मौजूदा कीमतों को उनके कारोबारी प्रदर्शन के आधार पर सही ठहराना मुश्किल हो सकता है.

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

फिलहाल बाजार के सामने दो तरह के संकेत हैं. एक ओर आईटी शेयरों में खरीदारी, रुपये में हल्की मजबूती और अगले सप्ताह संभावित कैश फ्लो से बाजार को समर्थन मिल सकता है. दूसरी ओर, करीब 114 डॉलर प्रति बैरल का कच्चा तेल, वैश्विक बाजारों की कमजोरी और कंपनियों के तिमाही नतीजों को लेकर अनिश्चितता जोखिम बढ़ा रही है. ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए केवल बाजार की शुरुआती तेजी देखकर फैसला करना सही नहीं होगा. बड़ी और मजबूत कंपनियों में निवेश के अवसर तलाशने के साथ-साथ कंपनी की कमाई, वैल्यूएशन और जोखिमों पर भी ध्यान देना जरूरी है. खासकर स्मॉल-कैप शेयरों में निवेश करते समय सावधानी बरतने की जरूरत है.

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