इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में बोलते हुए अरबपति और वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा कि भारत के पास बहुत क्षमता है और आने वाले समय में भारत एक बड़ी शक्ति बन सकता है. लेकिन भारत को व्यापारी और सरकार के साथ तालमेल बिठाकर काम करना होगा. भारत के पास हर चीज भरपूर है.
उन्होंने कहा कि हमारे पास यूरेनियम का सबसे ज्यादा भंडार है. सोना, चांदी ओर कॉपर की भी ज्यादा है. सिर्फ तेल और गैस की कमी है. जबतक हम अपने इम्पोर्ट को कम नहीं करेंगे, तबतक तेजी से विकास नहीं हो पाएगा. हमे अपने एक्सपोर्ट को बढ़ाना होगा और इम्पोर्ट को कम करना होगा. उद्यमिता को हमे सपोर्ट करने की जरूरत है. खासकर तेल और गैस पर निर्भरता कम करना चाहिए.
मिडिल ईस्ट नहीं चाहता कि हम तेल-गैस बनाए
अग्रवाल ने कहा कि भारत जियोग्राफिक नजरिए से बहुत ही समृद्ध देश है. हमारे पास असीमित भंड़ार है. तेल और गैस का भंडार भरपूर पड़ा हुआ है, सिर्फ नीचे से माइनिंग करने की आवश्यकता है. इससे कोई प्रदूषण नहीं फैलने वाला है. मिडिल ईस्ट तो कभी नहीं चाहता कि भारत अपने खुद का तेल और गैस बनाए, लेकिन हमे करना होगा, क्योंकि जनसंख्या बढ़ने के कारण आने वाले समय में भारत का तेल-गैस का कंजम्प्शन दोगुना होने वाला है. उन्होंने कहा कि मुझे ऐसा डर लगता है, क्योंकि दूसरे देशों ने भारत तक पाइपलाइन लगाई हुई है और ऐसी व्यवस्था की है कि उनका ही तेल-गैस भारत खरीद पाए और खुद का न बना सके.
उन्होंने कहा कि हमें तेल और गैस की माइनिंग प्रोजेक्ट्स को शुरू करना चाहिए और उद्योग को सपोर्ट करना चाहिए, ताकि जल्द से जल्द हम प्रोडक्शन बढ़ा सकें. हमे किसी अन्य देश पर निर्भर होने की जरूरत नहीं है. भगवान ने दिलखोलकर तेल और गैस का भंडार हमे दिया है.
या तो गरीब बनकर रहिए या फिर तेल-गैस बनाइए
हमारे पास और कोई चारा नहीं है, या तो आप गरीब बने रहिए. नहीं तो तेल और गैस पर दूसरे देशों पर निर्भर रहें. सभी सिस्टम बना हुआ है. भारत के पास क्षमता है और अगर तेल गैस बनता है तो भारत जल्दी से एक लक्ष्य बना सकता है. भारत के अलावा किसी भी देश में पैसा लगाने लायक नहीं है. सरकार को बिजनेसमैन के साथ मिलकर काम करना चाहिए. उद्योमिता को बढ़ावा देना चाहिए.
खुद का तेल-गैस बनाने के लिए क्या हैं चुनौतियां?
अग्रवाल ने चुनौतियों के बारे में जिक्र करते हुए कहा कि आज जो भी माइनिंग अलॉट होती हैं, उसके खुलते-खुलते पांच साल लग जाते हैं. हिंदुस्तान के पास सबकुछ है और इसकी जियोलॉजी सबसे बेहतर है. उन्होंने कहा कि एजेंसियां सर्पोटिव होनी चाहिए, रेगुलेटरी नहीं. भारत के लोग सक्षम हैं, काम करने में. जेन जी बच्चे सबसे ज्यादा काम करते हैं.