गाजीपुर से सांसद अफजाल अंसारी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. उत्तर प्रदेश पुलिस ने मंगलवार को बताया कि दिवंगत गैंगस्टर-नेता मुख्तार अंसारी, उनके परिवार के सदस्यों, गैंग के साथियों और अन्य लोगों से जुड़े हथियार लाइसेंस व हथियारों की जांच-पड़ताल में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई है. जिसके बाद गाजीपुर में 5 FIR दर्ज की गई हैं. इनमें से एक FIR गाजीपुर के सांसद अफजाल अंसारी के खिलाफ दर्ज की गई है. ऐसे में हथियार लाइसेंस में गड़बड़ी के आरोपों के सिलसिले में उनके खिलाफ दर्ज मामलों की कुल संख्या तीन हो गई है.
जांच के दौरान 80 से अधिक हथियारों का किया गया वेरिफिकेशन
पुलिस महानिदेशक (DGP) मुख्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार यह कार्रवाई UP स्पेशल टास्क फोर्स (STF) द्वारा जुटाई गई खुफिया जानकारी के आधार पर राज्य-स्तरीय जांच के बाद की गई है. यह जांच अंसारी के परिवार, IS-191 गैंग के सदस्यों और उनके साथियों को जारी हथियार लाइसेंस और उन लाइसेंसों पर खरीदे गए हथियारों के संबंध में की गई थी.
बयान में कहा गया कि वाराणसी रेंज के पुलिस उप-महानिरीक्षक (वैभव कृष्ण) की देखरेख में की गई इस जांच प्रक्रिया में तीन श्रेणियां शामिल थीं. पुलिस ने 43 लाइसेंस धारकों से जुड़े 80 से अधिक हथियारों का फिजिकल सत्यापन किया. बयान में कहा गया है कि जांच के दौरान जांचकर्ताओं को पता चला कि हथियार लाइसेंस की मूल फाइलें और हथियार खरीद-बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड गाजीपुर के जिलाधिकारी कार्यालय से गायब थे.
जांच में कुछ लाइसेंस धारकों और हथियार अनुभाग में तैनात अधिकारियों के बीच मिलीभगत का भी पता चला, जिसके कारण हथियारों की वास्तविक स्थिति और उनके कथित दुरुपयोग को छिपाने के लिए आधिकारिक रिकॉर्ड गायब कर दिए गए. पुलिस को एक ऐसा मामला भी मिला जिसमें आवेदक का असली पता छिपाकर फर्जी आवासीय पते का इस्तेमाल करते हुए हथियार लाइसेंस हासिल किया गया था.
अफजाल के खिलाफ गाजीपुर के कोतवाली पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ है ताजा मामला
जांच के नतीजों के आधार पर गाजीपुर के कोतवाली और मोहम्मदाबाद पुलिस स्टेशनों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और शस्त्र अधिनियम (Arms Act) की विभिन्न धाराओं के तहत पांच FIR दर्ज की गई हैं. गाजीपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) इराज राजा के अनुसार अफजाल अंसारी के खिलाफ ताजा FIR कोतवाली पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई है. यह मामला अरुणाचल प्रदेश के अलोंग जिले से लाइसेंस लेने के बाद एक राइफल की कथित खरीद-फरोख्त और उसे जमा करने, हथियार के कथित दुरुपयोग और आर्म्स क्लर्क के साथ मिलकर असली रिकॉर्ड गायब करने (जिससे उसका फिजिकल वेरिफिकेशन नहीं हो सका) से जुड़ा है.
FIR में पूर्व आर्म्स क्लर्क गौरी शंकर लाल और सुग्रीव तिवारी के नाम भी शामिल हैं. पुलिस ने बताया कि यह मामला IPC की धारा 409 (आपराधिक विश्वासघात), 120B (आपराधिक साजिश) और 419 (किसी और का रूप धरकर धोखाधड़ी) के तहत, साथ ही आर्म्स एक्ट की धारा 21, 25 और 30 के तहत दर्ज किया गया है.
DGP मुख्यालय के बयान के अनुसार इन मामलों में अंसारी के बेटे और गाजीपुर के सांसद अफजाल अंसारी का नाम कई आर्म्स लाइसेंस और उनके आधार पर खरीदे गए हथियारों से जुड़े रिकॉर्ड के कथित तौर पर गायब होने के सिलसिले में शामिल है. इन मामलों में मुख्तार अंसारी की पत्नी अफ्शा अंसारी के अलावा कई रिटायर्ड और मौजूदा सरकारी अधिकारियों - जिनमें पूर्व आर्म्स क्लर्क, रेवेन्यू अधिकारी और पुलिसकर्मी शामिल हैं.
रिकॉर्ड में असली लाइसेंस मिले गायब
पुलिस मुख्यालय ने कहा कि आरोपों में असली लाइसेंस रिकॉर्ड का गायब होना, वेरिफिकेशन के दौरान दस्तावेज पेश न कर पाना, फर्जी पते पर लाइसेंस जारी करना, आपराधिक साजिश और आवेदनों के अवैध वेरिफिकेशन में मदद करना शामिल है. पांच FIR की जांच के लिए गाजीपुर के एडिशनल SP (सिटी) की अध्यक्षता में एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई गई है. SIT को आर्म्स सेक्शन से जुड़े सभी मौजूदा और पूर्व अधिकारियों की भूमिका की जांच करने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है.
पुलिस ने बताया कि मुख्तार अंसारी (जिनका अब निधन हो चुका है), उनके गैंग के सदस्यों और साथियों पर गाजीपुर और अन्य जिलों में पहले से ही हत्या, हत्या की कोशिश और जबरन वसूली जैसे कई आपराधिक मामले चल रहे थे. बयान में कहा गया है कि अंसारी के परिवार के सदस्यों, गैंग के साथियों और अन्य लोगों से जुड़े आर्म्स लाइसेंस और हथियारों का फिजिकल वेरिफिकेशन जारी है. अगर और गड़बड़ियां सामने आती हैं तो आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी.