फाइनेंशियल सेक्टर की कंपनी इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक लिमिटेड के शेयरों में गुरुवार को 20 फीसदी की गिरावट देखने को मिली और यह लोअर सर्किट पर आ गया. यह गिरावट तब आई, जब इस कंपनी के एमडी और सीईओ पीएन वासुदेवन ने इस्तीफा दे दिया.
हितो के टकराव को लेकर उन्होंने यह फैसला लिया है और कहा कि इन्वेस्टर इस बात से खुश नहीं हैं कि वे बैंक चीफ हैं, जबकि उनकी बेटी एक NBFC की को-प्रमोटर हैं. यह व्यवस्था बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत है.
क्यों हुआ इस्तीफा?
स्मॉल फाइनेंस बैंक के सीईओ ने अपने इस्तीफे वाले लेटर में बताया कि उनकी बेटी एक नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी की को-प्रमोटर हैं. इस कंपनी को 2023 में RBI से लाइसेंस मिला था. वासुदेवन के मुताबिक, उन्होंने इस बारे में जानकारी बैंक के बोर्ड और RBI को पहले ही दे दी थी. उन्होंने बताया कि उनकी भूमिका और बेटी की एनबीएसी में हिस्सेदारी बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के दायरे में थीं.
इसी को लेकर निवेशक सवाल उठा रहे थे और काफी समय से वे खुश नहीं थे. उन्होंने बताया कि बैंक और उस NBFC के बीच ऐसा कोई टकराव नहीं था. हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि ढाई साल के लिए उन्होंने इसमें कुछ पैसा जमा किया था, जो तय समय के दौरान मिल गया था. उन्होंने कभी उस बैंक को कर्ज नहीं दिया था. वासुदेवन ने बताया कि सबकुछ साफ करने के बाद भी टकराव की आशंका बनी रही.
निवेशकों ने वासुदेवन से कहा था कि इस मुद्दे का असर बैंक के शेयरों पर पड़ रहा है. इस कारण शेयर होल्डर्स और कर्मचारियों के बीच वैल्यू बनाने में भी दिक्कत सामने आई है. उन्होंने अपने लेटर में कहा कि लोगों की धारणा हकीकत से ज्यादा मजबूत होती है. इन्हीं सब चिताओं को दूर करने के लिए उन्होंने यह पद छोड़ा है.
20 फीसदी टूटा शेयर
गुरुवार को इस खबर का शेयरों पर बड़ा असर हुआ और 20 फीसदी का लोअर सकर्टि लगाते हुए यह स्टॉक 52.11 रुपये पर बंद हुआ. छह महीने के दौरान इस शेयर में 22 फीसदी की तेजी आई है और पिछले 5 साल में भी इस शेयर ने निवेशकों को 18 फीसदी का निगेटिव रिटर्न दिया है.
(नोट- किसी भी शेयर में निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.)