Karwa Chauth Mata Temple: पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए महिलाएं हर साल कार्तिक कृष्ण चतुर्थी पर करवा चौथ का निर्जला व्रत रखती हैं. इस दिन करवा माता की विधिवत पूजा के बाद कथा सुनी जाती है और फिर चांद देखकर व्रत खोला जाता है. बहुत सारे लोगों को यह नहीं मालूम कि भारतवर्ष में करवा चौथ माता के तीन प्रसिद्ध मंदिर हैं. एक मंदिर राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में है. दूसरा मध्य प्रदेश के उज्जैन और तीसरा रायसेन जिले के भोजपुर में है.
भोजपुर स्थित करवा माता मंदिर राजा भोज के समय का बताया जाता है. कहते हैं कि राजा भोज को कोढ़ की बीमारी थी. तब राजा भोज की पत्नी ने चौथ माता की पूजा की थी. लोक मान्यताओं के अनुसार, राजा भोज को कोढ़ के रोग से मुक्त कराने के लिए 9 नदियों और 99 नालों को मिलाकर एक बांध बनाया था. उसके जल से भोजपुर शिवलिंग पर जलाभिषेक किया गया था.
कहते हैं कि बांध के पानी की निकासी जिसे मोरी कहते हैं, वहां बीच में चौथ माता को स्थापित किया गया था. यहीं राजा भोज की पत्नी ने अपने पति की लंबी उम्र और सदा सुहागन रहने के लिए पूजा की थी. यह स्थान दो पहाड़ियों की प्राकृतिक सौंदर्यता में बना हुआ है. भोजपुर का विशाल शिवलिंग सदियों पुराना बताया जाता है. शिवलिंग ,पार्वती मंदिर और चौथा माता मंदिर तीनों आस-पास ही बने हुए हैं. चौथ माता का यह मंदिर पूरे साल खुला रहता है. जबकि उज्जैन जिले में स्थित मंदिर साल में सिर्फ एक बार ही खुलता है.
करवा चौथ माता की पूजन विधि
करवा चौथ माता की पूजा घर की सुख-समृद्धि, खुशहाली और संकटों से रक्षा की कामना के लिए की जाती है. देवी को रोली, अक्षत, मौली, धूप, दीप और घी अर्पित करने के बाद तिल और गुड़ से चीजों का भोग लगाया जाता है. देवी की आरती उतारें और हाथ जोड़कर परिवार की खुशहाली और सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें. पूजा के बाद सुहाग सामग्री जैसे सिंदूर, कुमकुम, बिंदी, चूड़ियां, महावर, लाल चुनरी या लाल वस्त्र आदि का दान करें.