मिडिल ईस्ट में जंग तेज हो गई है. अमेरिका और ईरान दोनों ओर से दनादन अटैक का सिलसिला जारी है. होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर मिसाइल हमले किए जा रहे हैं. इन सबके बीच कच्चे तेल की कीमतें फिर से डरा रही हैं और हर रोज तूफानी रफ्तार से भाग रही हैं. सोमवार तक 80 डॉलर के आसपास ट्रेड कर रहा Crude Oil Price उछलकर मंगलवार को 84 डॉलर प्रति बैरल के लेवल पर जा पहुंचा.
तेल की कीमतों में उछाल से दुनिया में महंगाई का खतरा बढ़ने लगा है और दिमाग में सवाल खड़े होने लगे हैं कि क्या वेस्ट एशिया में दोबारा शुरू हुआ संघर्ष पहले से ज्यादा लंबा खिंचेगा और क्या इस बार क्रूड प्राइस 120 डॉलर के भी पार निकल जाएगा. अगर ऐसा होता है, तो दुनिया फिर से तेल-गैस के संकट से जूझती नजर आ सकती है.
कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग
Hormuz Strait में जारी घमासान ने फिर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आग लगाने का काम किया है. मंगलवार को ब्रेंट क्रूड से लेकर मर्बन क्रूड तक के भाव में जोरदार उछाल आया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude Oil Price 84.44 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, तो वहीं WTI Crude Oil Price भी उछलकर 80 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था. इसके अलावा मर्बर क्रूड की कीमत उछाल के साथ 79.34 डॉलर पर ट्रेड कर रही थी.
Hormuz क्यों है जरूरी?
अमेरिका-ईरान युद्ध में सबसे अहम होर्मुज स्ट्रेट बना हुआ है और यहां तनातनी चरम पर पहुंच गई है. बता दें कि दुनिया की कुल तेल-गैस जरूरत के करीब 20 फीसदी की आपूर्ति इसी समुद्री रूट के जरिए की जाती है और इसमें थोड़ी सी भी रुकावट तेल आयात पर निर्भर देशों के लिए मुसीबत का सबब बन जाता है.
Strait Of Hormuz ईरान, ओमान और यूएई के बीच स्थित महत्वपूर्ण समुद्री रूट है और वैश्विक कच्चे तेल का पांचवां हिस्सा इस करीब 33 किलोमीटर चौड़े रास्ते से गुजरता है. इसके बंद होने का असर बीते दिनों देखा जा चुका है, जब 100 दिन से ज्यादा चली मिडिल ईस्ट जंग ने पाकिस्तान, बांग्लादेश, ब्रिटेन से लेकर भारत तक तेल-गैस का संकट (Oil-Gas Crisis) खड़ा कर दिया था.
हालात ये बन गए थे कि कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था और तेल महंगा होने से तमाम देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तगड़ा इजाफा किया गया था, तो वहीं एलपीजी की कमी और LPG Price Hike का सामना आम जनता को करना पड़ा था.
क्या 120 डॉलर के पार जाएगा तेल?
US-Iran War तेज होने के साथ ही दुनियाभर के देशों में ये चिंता बढ़ गई है कि क्या एक बार फिर से तेल की कीमतें 120 डॉलर के पार निकल जाएंगी. ऐसा इसलिए क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ समझौते के मूड में नजर नहीं आ रहे हैं और इसका अंदाजा बीते दिनों दिए गए उनके बयान से लगाया जा सकता है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान के साथ बातचीत समय की बर्बादी है.
क्या 120 डॉलर के पार जाएगा तेल?
US-Iran War तेज होने के साथ ही दुनियाभर के देशों में ये चिंता बढ़ गई है कि क्या एक बार फिर से तेल की कीमतें 120 डॉलर के पार निकल जाएंगी. ऐसा इसलिए क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ समझौते के मूड में नजर नहीं आ रहे हैं और इसका अंदाजा बीते दिनों दिए गए उनके बयान से लगाया जा सकता है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान के साथ बातचीत समय की बर्बादी है.
अब अगर ट्रंप के टागरेट पर Hormuz Strait के अलावा ईरान स्थित खार्ग आइलैंड आता है, जो कि ईरान की तेल इकोनॉमी (Iran Oil Economy) की रीढ़ कहा जाता है, तो फिर बड़ा तेल संकट देखने को मिल सकता है और Crude Price में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. ईरान की यूरेनियम साइट्स की ओर ट्रंप इशारा कर चुके हैं और युद्ध बढ़ा तो ईरान के ऑयल टर्मिनल भी निशाने पर आ सकते हैं. बता दें कि Iran Kharg Island के जरिए ईरान अधिकांश तेल (करीब 90%) का निर्यात करता है.
US-ईरान जंग में जल रहे खाड़ी देश
कच्चे तेल की कीमतों में तेज इजाफे की आशंका और दुनिया के सामने नए सिरे से तेल-गैस का संकट खड़ा होने का डर ऐसे ही नहीं है. दरअसल, अमेरिका-ईरान के बीच होर्मुज पर संघर्ष बढ़ा है, तो वहीं इस जंग की आग तमाम बड़े तेल उत्पादक खाड़ी देशों को भी झुलसा रही है.
एक ओर होर्मुज के अखाड़े में US-Iran आमने-सामने हैं, तो वहीं दूसरी ओर इससे अलग सऊदी अरब ने ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों पर अटैक किया है. ईरान ने मिसाइल अटैक करते हुए UAE के तेल टैंकर निशाना बनाया है. इसके अलावा Iran ने मिडिल-ईस्ट के तीन देशों जॉर्डन, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले किए हैं.