बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आजतक के मंच ‘पंचायत आजतक बिहार’ में 2030 तक मुख्यमंत्री बने रहने के सवाल पर अपनी स्थिति साफ की. उनसे पूछा गया था कि जब उन्हें ‘इलेक्टेड नहीं, सिलेक्टेड सीएम’ कहा जाता है तो क्या वह 2030 तक मुख्यमंत्री बने रहेंगे. इस पर सम्राट चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री पद पर आगे भी बने रहने या बदलाव का फैसला पार्टी करेगी. उन्होंने कहा, “ये तो पार्टी को तय करना है, मैं तो छोटा आदमी हूं.”
सम्राट चौधरी ने अपने मुख्यमंत्री बनने की प्रक्रिया का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि पार्टी के नेता, गठबंधन और विधायकों के समर्थन से उन्हें मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी मिली है. उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पार्टी के नेता हैं, नितिन नवीन राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और बिहार में नीतीश कुमार बड़े नेता हैं. इन सबके साथ 202 विधायकों ने समर्थन दिया और राज्यपाल के सामने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया.
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें पार्टी ने जो जिम्मेदारी दी है, वह उनके लिए बड़ी बात है. उन्होंने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि वह विपक्ष के नेता रह चुके हैं, पार्टी के अध्यक्ष रह चुके हैं और पार्टी ने उन्हें दो बार मुख्यमंत्री बनाया है. उन्होंने यह भी कहा कि करीब 50 साल बाद उन्हें गृह मंत्री बनने का मौका मिला और इसके बाद बीजेपी ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया. सम्राट ने कहा कि इससे बड़ा गौरव उनके लिए क्या हो सकता है.
2030 तक मुख्यमंत्री बने रहने के सवाल पर उनका जवाब हालांकि सीधा था. उन्होंने इस बारे में कोई दावा नहीं किया कि वह 2030 तक पद पर बने रहेंगे. उन्होंने फैसला पार्टी पर छोड़ते हुए कहा कि वह इस संबंध में खुद निर्णय लेने की स्थिति में नहीं हैं.
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बातचीत में उनसे यह भी पूछा गया कि क्या बिहार में मुख्यमंत्री का चयन जनता करती है या पार्टी करती है. इस सवाल पर सम्राट चौधरी ने कहा कि 1952 के बाद कौन पूरी तरह ‘इलेक्टेड सीएम’ रहा है, यह बताना चाहिए. उन्होंने लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के मुख्यमंत्री बनने का उदाहरण देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का चयन राजनीतिक दलों की प्रक्रिया से होता है.
सम्राट चौधरी ने अपने मुख्यमंत्री बनने को भी इसी राजनीतिक प्रक्रिया से जोड़कर समझाया. उन्होंने कहा कि पार्टी ने फैसला किया, गठबंधन के समर्थन के बाद 202 विधायकों ने समर्थन दिया और राज्यपाल के सामने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया. इसलिए उन्होंने अपने पद को पार्टी की ओर से मिली जिम्मेदारी के तौर पर पेश किया.
सम्राट चौधरी ने यह भी कहा कि उनका मौजूदा फोकस मुख्यमंत्री के तौर पर मिली जिम्मेदारी निभाने पर है. उन्होंने अपने राजनीतिक सफर का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी ने उन्हें अलग-अलग जिम्मेदारियां दी हैं और उन्होंने उन जिम्मेदारियों को निभाया है.
इस पूरे सवाल में सबसे अहम बात यही रही कि 2030 तक मुख्यमंत्री बने रहने को लेकर सम्राट चौधरी ने कोई व्यक्तिगत दावा नहीं किया. उन्होंने साफ कहा कि आगे मुख्यमंत्री पद पर बदलाव होगा या नहीं, यह पार्टी तय करेगी. साथ ही उन्होंने अपने मुख्यमंत्री बनने की प्रक्रिया को पार्टी के फैसले, गठबंधन के समर्थन और विधायकों के समर्थन से जुड़ा बताया.