बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आजतक के मंच पर इसके पीछे का पूरा गणित समझाया. उन्होंने कहा कि बिहार में आने वाला पानी सिर्फ बिहार का नहीं है. उत्तर प्रदेश से करीब 6.5 लाख क्यूसेक पानी आता है. मध्य प्रदेश और झारखंड से करीब 11.5 लाख क्यूसेक पानी पहुंचता है. इसके अलावा नेपाल के तराई इलाके से आने वाले पानी की मात्रा वहां हुई बारिश पर निर्भर करती है. मुख्यमंत्री के मुताबिक यही वजह है कि बिहार कई नदियों के पानी का जंक्शन बन जाता है.
सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार के लिए सबसे बड़ा ड्रेन गंगा नदी है. गंगा में लगातार गाद बढ़ना भी बड़ी समस्या बन गया है. उन्होंने बताया कि जब गंगा बिहार में बक्सर के पास प्रवेश करती है तो वहां इसकी चौड़ाई करीब छह किलोमीटर है. लेकिन बिहार से झारखंड की तरफ पानी डिस्चार्ज होने वाले इलाके में यह चौड़ाई करीब 32 किलोमीटर तक है. भागलपुर में करीब 26 किलोमीटर और खगड़िया तथा मुंगेर में करीब 22 किलोमीटर का इलाका है. मुख्यमंत्री के मुताबिक पानी के इस पूरे बहाव के दौरान बिहार की जमीन प्रभावित होती है और इसके बाद पानी समुद्र की ओर जाता है.
उन्होंने इस साल की स्थिति को भी गंभीर बताया. सम्राट चौधरी ने कहा कि पहले बिहार में कोसी में करीब 6.5 लाख क्यूसेक पानी आने को लेकर चिंता रहती थी, लेकिन इस बार सिर्फ गंगा में करीब 17 लाख क्यूसेक पानी आया. उनके मुताबिक इस बार गंगा का जलस्तर 2016 के मुकाबले करीब एक फीट ज्यादा रहा. उन्होंने इसे 2016 के बाद सबसे ऊंचे स्तर की स्थिति बताया.
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है. उन्होंने बताया कि कोसी और गंडक पर पहले से काम किया गया है. पहले नेपाल के तराई से आने वाले पानी के कारण कोसी में करीब 1.5 लाख क्यूसेक पानी आने पर भी कई जिले प्रभावित हो जाते थे. गंडक में करीब तीन लाख क्यूसेक पानी आने पर चंपारण और सारण के बड़े इलाके डूब जाते थे.
सम्राट चौधरी ने कहा कि सिंचाई के क्षेत्र में भी बदलाव हुआ है. उनके मुताबिक बिहार में पहले करीब 21 लाख हेक्टेयर जमीन सिंचित होती थी, जो अब बढ़कर करीब 44 लाख हेक्टेयर हो गई है. हालांकि उन्होंने माना कि नदियों और बाढ़ की चुनौती अभी भी बड़ी है.
बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए उन्होंने नीदरलैंड की टीम भेजे जाने का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि वहां नदियों पर काफी काम हुआ है और बिहार में भी इस अनुभव के आधार पर प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार गंगा पर भी काम शुरू करेगी और इसे हर हालत में नियंत्रित करने की दिशा में आगे बढ़ेगी.
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सम्राट चौधरी ने फरक्का बैराज और गंगा में गाद को भी बिहार की बाढ़ से जुड़ा अहम मुद्दा बताया. उनका कहना है कि फरक्का में पानी रोकने से पानी का बहाव उल्टा होने लगता है और भागलपुर तक गाद जमा होती है. इससे नदी का रास्ता और पानी का फैलाव प्रभावित होता है.
मुख्यमंत्री ने बताया कि बिहार सरकार ने गाद से निपटने के लिए गाद नीति भी बनाई है. इसके तहत गंगा और उत्तर बिहार की नदियों से निकलने वाली मिट्टी के इस्तेमाल की व्यवस्था पर काम किया जा रहा है. उनका कहना है कि गंगा की सफाई और गाद की समस्या से निपटना बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए जरूरी है.
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पानी के बंटवारे से जुड़े मुद्दे पर भी बिहार का पक्ष रखने की बात कही. सम्राट चौधरी के मुताबिक बिहार की मांग है कि पीने के पानी और खेती के लिए जरूरत के समय पानी लेने का अधिकार राज्य के पास होना चाहिए. उनका कहना है कि बिहार से दूसरे क्षेत्रों की ओर जितना पानी डिस्चार्ज होता है, उसके मुकाबले राज्य के हिस्से में भी पर्याप्त पानी रहना चाहिए.
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ को हर साल की मजबूरी मानकर छोड़ना समाधान नहीं है. सरकार का लक्ष्य नदियों के बहाव, गाद और पानी के इस्तेमाल से जुड़े मुद्दों पर काम करके बिहार को बाढ़ की समस्या से स्थायी राहत दिलाना है.