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तीन गवाह पलटे, DNA रिपोर्ट ने खोला राज, नाबालिग साली के केस में जीजा को 20 साल की सजा

मुंगेर में पत्नी को मायके छोड़ नाबालिग साली को लेकर फरार हुए जीजा को पॉक्सो कोर्ट ने 20 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. ट्रायल के दौरान पीड़िता, उसकी मां और आरोपी की पत्नी अपने बयान से पलट गईं. इसके बावजूद DNA रिपोर्ट में गर्भ में पल रहे भ्रूण का पिता आरोपी सौरभ कुमार साह पाया गया, जो मामले में अहम सबूत बना.

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पॉक्सो विशेष न्यायालय ने सुनाई 20 साल की सजा. (Photo: ITG)
पॉक्सो विशेष न्यायालय ने सुनाई 20 साल की सजा. (Photo: ITG)

मुंगेर के टेटिया बंबर थाना कांड संख्या 11/25 में पॉक्सो विशेष न्यायालय ने आरोपी सौरभ कुमार साह को 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. कोर्ट ने आरोपी पर 30 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है. पॉक्सो अधिनियम के विशेष न्यायाधीश सह अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विमलेंदु कुमार के न्यायालय ने सजा के बिंदु पर फैसला सुनाया. मामला उस समय सामने आया था, जब आरोपी अपनी पत्नी को उसके मायके में छोड़कर उसकी नाबालिग बहन को लेकर फरार हो गया था. पीड़िता की मां ने पुलिस को दिए आवेदन में बताया था कि उनकी बड़ी बेटी की शादी झारखंड के गोड्डा निवासी सौरभ साह से 21 जुलाई 2024 को हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी. शादी के करीब एक महीने बाद सौरभ अपनी पत्नी के साथ ससुराल आया था. इसके बाद वह पत्नी को वहीं छोड़कर उसकी नाबालिग बहन को लेकर फरार हो गया.

नाबालिग के गायब होने के बाद परिवार उसकी तलाश करता रहा. जब काफी दिनों तक उसका कोई पता नहीं चला तो 15 जनवरी 2025 को टेटिया बंबर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई. पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई की और आरोपी के साथ नाबालिग को बरामद कर लिया. इसके बाद पीड़िता की मेडिकल जांच कराई गई. मेडिकल जांच के दौरान वह तीन महीने की गर्भवती पाई गई. पुलिस ने मामले में विभिन्न धाराओं के तहत जांच पूरी कर आरोप पत्र दाखिल किया. बाद में मुंगेर के एसपी सैयद इमरान मसूद के निर्देश पर इस मामले को स्पीडी ट्रायल में लाया गया.

कोर्ट में 10 गवाहों की हुई गवाही

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट में कुल 10 गवाहों की गवाही हुई. इसके अलावा 13 दस्तावेजों को साक्ष्य के रूप में प्रदर्शित कराया गया. मामले की सुनवाई के दौरान पीड़िता ने गर्भपात के लिए कोर्ट में आवेदन दिया था. इसके बाद कोर्ट ने सिविल सर्जन को पीड़िता की सेहत का ध्यान रखते हुए गर्भपात कराने का निर्देश दिया. कोर्ट के आदेश के बाद मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया और पीड़िता का सुरक्षित गर्भपात कराया गया. इसके बाद केस में गवाही की प्रक्रिया आगे बढ़ी. जब तीनों गवाह अपने बयान से पलट ग.ए मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब कोर्ट में गवाही की बारी आई. पीड़िता, उसकी मां और आरोपी की पत्नी यानी पीड़िता की बहन तीनों अपने पहले के बयान से पलट गईं.

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गवाहों के अपने बयान से पलटने के बाद अभियोजन पक्ष के सामने केस को साबित करने की चुनौती खड़ी हो गई. मामले को कमजोर पड़ता देख विशेष लोक अभियोजक प्रीतम कुमार वैश्य ने एसपी सैयद इमरान मसूद से संपर्क कर पूरी स्थिति की जानकारी दी. इसके बाद पुलिस और विशेष लोक अभियोजक की ओर से मामले से जुड़े अहम मेडिकल और वैज्ञानिक साक्ष्य कोर्ट के सामने लाने की पहल की गई.

विशेष लोक अभियोजक प्रीतम कुमार वैश्य के अनुसार पुलिस और विशेष अभियोजक ने कोर्ट से MTP रिपोर्ट, FSL रिपोर्ट और DNA रिपोर्ट मंगाने का अनुरोध किया.  कोर्ट ने इन रिपोर्ट को मंगाया. रिपोर्ट सामने आने के बाद मामले में अहम वैज्ञानिक सबूत मिला. DNA रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि पीड़िता के गर्भ में पल रहे भ्रूण का पिता आरोपी सौरभ साह था. यही DNA रिपोर्ट मामले में सबसे बड़ा सबूत बनी. तीनों गवाहों के कोर्ट में अपने बयान से पलट जाने के बावजूद वैज्ञानिक साक्ष्य के आधार पर अभियोजन पक्ष ने आरोपी के खिलाफ मामला साबित किया.

DNA सबूत के आधार पर आरोपी को 20 साल की सजा

मामले में कोर्ट के सामने गवाहों की गवाही के साथ दस्तावेजी और वैज्ञानिक साक्ष्य भी रखे गए. DNA रिपोर्ट में आरोपी सौरभ साह को भ्रूण का जैविक पिता बताया गया. इसी अहम साक्ष्य के आधार पर पॉक्सो विशेष न्यायालय ने आरोपी सौरभ कुमार साह को दोषी माना और 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई. इसके साथ ही कोर्ट ने उस पर 30 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया.

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मुंगेर के विशेष लोक अभियोजक प्रीतम कुमार वैश्य ने बताया कि मामले में पुलिस की कार्रवाई, मेडिकल रिपोर्ट, FSL और DNA रिपोर्ट महत्वपूर्ण रही. खास तौर पर DNA रिपोर्ट ने उस समय मामले को मजबूती दी, जब तीनों प्रमुख गवाह कोर्ट में अपने बयान से पलट गए थे. इस तरह टेटिया बंबर थाना कांड संख्या 11/25 में गवाहों के बयान बदलने के बावजूद वैज्ञानिक साक्ष्य के आधार पर मुकदमा आगे बढ़ा और आखिरकार आरोपी को 20 वर्ष की सजा सुनाई गई.
 

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