गर्मी से राहत पाने के लिए एसी आज लगभग हर घर की जरूरत बन चुका है. लेकिन एसी की एक बड़ी समस्या यह है कि वह कमरे की गर्मी को बाहर निकालता है और बाहर की हवा में भी गर्मी छोड़ता है. ऐसे में एक यूट्यूबर ने इसी तरीके को बदलने का अनोखा प्रयोग किया है. उसने कबाड़ में पड़े एक पुराने विंडो AC को जमीन के अंदर दबे करीब 2,000 फीट लंबे पाइप से जोड़ दिया. इसका मकसद एसी की गर्मी को बाहर की गर्म हवा में छोड़ने के बजाय जमीन के अंदर पहुंचाना था.
इस प्रयोग को क्राफ्ट्समैन क्रिस नाम के यूट्यूबर ने किया. इसके लिए उन्होंने 14,000 बीटीयू क्षमता वाले एक पुराने एलजी डुअल इन्वर्टर विंडो एसी का इस्तेमाल किया. एसी को करीब 6 से 8 फीट जमीन के नीचे बिछी लगभग 2,000 फीट लंबी पीईएक्स पाइप से जोड़ा गया. यह पाइप 500-500 फीट के चार अलग-अलग लूप में जमीन के नीचे बिछाया गया था.
एसी की गर्मी हवा में नहीं, जमीन में जाएगी
नॉर्मल एसी कमरे की गर्म हवा से गर्मी निकालता है और कंडेंसर के जरिए उस गर्मी को बाहर की हवा में छोड़ देता है. लेकिन इस एक्सपेरिमेंट में यही हिस्सा बदल दिया गया.
जमीन के नीचे बिछी पाइप में पानी लगातार घूमता रहता है. इस पानी को एसी के कंडेंसर के आसपास बनाए गए एक खास वॉटर जैकेट से गुजारा गया. एसी का रेफ्रिजरेंट अपनी गर्मी कंडेंसर में छोड़ता है और पानी उस गर्मी को सोख लेता है. इसके बाद गर्म पानी वापस जमीन के नीचे चला जाता है, जहां मिट्टी उस गर्मी को सोखने का काम करती है. आसान भाषा में कहें तो यहां जमीन को एक बड़े हीट सिंक की तरह इस्तेमाल किया गया है.
कबाड़ के एसी में किया गया बड़ा बदलाव
इस प्रयोग की खास बात सिर्फ जमीन के नीचे पाइप डालना नहीं है. क्रिस ने जिस एसी का इस्तेमाल किया था, वह पहले से ही खराब हालत में पड़ा था. उसे साफ करने के बाद कंडेंसर कॉइल को करीब 90 डिग्री घुमाया गया.
इसके बाद कबाड़ में मिले मेटल के टुकड़ों से कंडेंसर के आसपास एक वॉटर जैकेट तैयार किया गया. इसका काम था कि जमीन से आने वाला पानी कंडेंसर के आसपास से गुजर सके और एसी से निकलने वाली गर्मी को अपने साथ जमीन तक ले जाए.
खास बात यह है कि एसी की रेफ्रिजरेशन लाइन को खोलने या काटने की जरूरत नहीं पड़ी. यानी रेफ्रिजरेंट को निकालने की जरूरत भी नहीं हुई और एसी का मेल कंप्रेसर और रेफ्रिजरेशन सिस्टम अपनी जगह काम करता रहा.
सिर्फ जुगाड़ नहीं, अपने आप चलता है पूरा सिस्टम
क्रिस ने इसे सिर्फ हाथ से चलने वाला प्रयोग नहीं रखा. उन्होंने इसे घर के थर्मोस्टैट के साथ काम करने लायक भी बनाया. इसके लिए पुराने प्रोग्रामेबल लॉजिक कंट्रोलर और एक लीनियर एक्चुएटर का इस्तेमाल किया गया. जब थर्मोस्टैट कमरे को ठंडा करने की जरूरत बताता है तो सिस्टम एसी को चालू कर देता है. यानी जरूरत पड़ने पर यह पूरा सिस्टम अपने आप काम कर सकता है.
सिस्टम में तापमान पर नजर रखने के लिए सेंसर भी लगाए गए हैं. इससे पानी का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ने पर कूलिंग सिस्टम को बंद किया जा सकता है.
2,000 फीट पाइप से कितनी ठंडी हवा निकली?
यही इस पूरे प्रयोग का सबसे दिलचस्प हिस्सा है. टेस्ट के दौरान सिस्टम से करीब 49 से 54 डिग्री फ़ॉरेनहाइट, यानी लगभग 9 से 12 डिग्री सेल्सियस तक ठंडी हवा निकलती दिखाई दी.
एक टेस्ट में करीब 26.5 डिग्री फ़ॉरेनहाइट का तापमान अंतर भी दर्ज किया गया. जमीन के नीचे बने लूप में पानी करीब 3.3 गैलन प्रति मिनट की रफ्तार से घूम रहा था. कंडेंसर के वॉटर जैकेट से गुजरने के दौरान पानी का तापमान कुछ डिग्री बढ़ जाता था और इसके बाद वही पानी वापस जमीन के अंदर चला जाता था.
शुरुआत में ठंडी हवा को घर तक पहुंचाने के लिए बिना इंसुलेशन वाली एल्युमिनियम डक्ट का इस्तेमाल किया गया. लेकिन इसमें ठंडी हवा रास्ते में ही गर्म होने लगी. बाद में इंसुलेटेड फ्लेक्सिबल डक्ट का इस्तेमाल किया गया, जिससे ठंडी हवा को घर के फैमिली रूम, डाइनिंग रूम और किचन तक पहुंचाया गया.
क्या यह नॉर्मल AC की जगह ले सकता है?
यहीं इस प्रयोग को लेकर सावधानी जरूरी है. यह प्रयोग काफी दिलचस्प है, लेकिन अभी इसे सामान्य घरों के लिए तैयार एसी सिस्टम कहना जल्दबाजी होगी. सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जमीन के नीचे मौजूद करीब 2,000 फीट की पाइप लंबे समय तक लगातार घर की गर्मी को सोख पाएगी. अभी सामने आए टेस्ट लिमिटेड समय के परफॉर्मेंस को दिखाते हैं. लंबे समय तक चलने की क्षमता, कुल बिजली की खपत और प्रैक्टिकल यूज के बारे में पर्याप्त आंकड़े सामने नहीं आए हैं.
इसके अलावा जमीन की बनावट, पाइप की लंबाई और गहराई, पानी का प्रवाह, मौसम और घर की कूलिंग जरूरत जैसे कई कारक इस तरह के सिस्टम के परफॉर्मेंस पर असर डाल सकते हैं.
इसलिए इसे घर पर सीधे दोहराना आसान नहीं है. लेकिन इस प्रयोग की असली खासियत इसकी सोच में है. आम तौर पर जमीन के अंदर की गर्मी को कंट्रोल करने वाले जियोथर्मल कूलिंग सिस्टम महंगे और बड़े सेटअप के रूप में देखे जाते हैं. यहां एक पुराने एसी, कबाड़ में मिले सामान, कंट्रोलर और जमीन के नीचे बिछे पाइपों की मदद से उसी विचार का एक छोटा प्रयोग तैयार किया गया.
अभी यह एक एक्सपेरिमेंट है और इसे सामान्य घरेलू AC का विकल्प मानना सही नहीं होगा. लेकिन इसने एक दिलचस्प सवाल जरूर खड़ा कर दिया है- अगर AC की गर्मी को गर्म हवा में छोड़ने के बजाय जमीन के अंदर पहुंचाया जाए, तो क्या फ्यूचर में कूलिंग सिस्टम को ज्यादा बेहतर बनाया जा सकता है?