पूर्वी चंपारण के मोतिहारी में चोरी के आरोप में पकड़े गए छह बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार का मामला सामने आया है. मधुबन थाना क्षेत्र के भेलवा चौक पर एक दुकानदार पर बच्चों की पिटाई करने और उन्हें चप्पल पर थूककर चटवाने का आरोप लगा है. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा में है. बताया जा रहा है कि बच्चों के साथ इस तरह का व्यवहार करने के बाद दुकानदार ने उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया.
मामला मधुबन थाना क्षेत्र के भेलवा चौक का बताया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक, यहां धर्मेंद्र पटेल नाम के एक दुकानदार की किराना दुकान में चोरी का आरोप लगाते हुए छह बच्चों को पकड़ा गया था. इसके बाद दुकानदार ने कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की. आरोप है कि मामला यहीं नहीं रुका. बच्चों को चप्पल पर थूकने और फिर उसी थूक को चटवाने के लिए मजबूर किया गया. इस घटना की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद बच्चों के साथ किए गए व्यवहार को लेकर सवाल उठ रहे हैं. बताया जा रहा है कि पकड़े गए छह लोगों में कुछ नाबालिग भी शामिल थे.
बच्चों पर चोरी आरोप लगाकर बर्बरता
इस मामले में जो आरोप सामने आए हैं, वे बच्चों के साथ किए गए व्यवहार की गंभीरता को दिखाते हैं. चोरी का आरोप लगने के बाद बच्चों को पकड़ना और मामले की शिकायत पुलिस से करना अलग बात है, लेकिन खुद सजा देने के नाम पर किसी को अपमानित करना कानून और मानवीय गरिमा से जुड़े सवाल खड़े करता है. आरोप है कि दुकानदार ने पहले बच्चों की पिटाई की और फिर उन्हें चप्पल पर थूककर चटवाया. इसके बाद पुलिस को आवेदन देकर उन्हें गिरफ्तार करवाया. घटना का वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला लोगों का ध्यान खींच रहा है. हालांकि, चोरी के आरोपों की सच्चाई और घटना से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है. किसी पर आरोप लगना और आरोप साबित होना दो अलग-अलग बातें हैं.
बताया जा रहा है कि मधुबन थाना पुलिस ने इस मामले में केस नंबर 353/26 दर्ज किया था. इसके बाद छह आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई. इनमें चार नाबालिगों को बाल सुधार गृह भेजा गया, जबकि दो को मोतिहारी जेल भेज दिया गया. इस घटनाक्रम में एक तरफ किराना दुकान में चोरी का आरोप है, तो दूसरी तरफ बच्चों के साथ कथित तौर पर किए गए अमानवीय व्यवहार का मामला है. दोनों पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण है. चोरी हुई थी या नहीं और घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ, इसका फैसला जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए.
वीडियो वायरल, आधिकारिक बयान का इंतजार
घटना 10 अक्टूबर की बताई जा रही है. हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस मामले में अभी तक किसी अधिकारी का आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. इसलिए घटना से जुड़े सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है. आजतक और बिहार तक भी इस मामले की पुष्टि नहीं करते हैं. वायरल तस्वीरें और वीडियो जरूर चर्चा में हैं, लेकिन केवल वीडियो के आधार पर घटना के सभी पहलुओं को अंतिम रूप से सही नहीं माना जा सकता. इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि चोरी के आरोप की जांच कानून के अनुसार होनी चाहिए, लेकिन क्या किसी दुकानदार को बच्चों के साथ मारपीट करने और उन्हें इस तरह अपमानित करने का अधिकार है. कानून हाथ में लेने और बच्चों की गरिमा से जुड़े इस मामले में आधिकारिक जानकारी और जांच के निष्कर्षों का इंतजार है.