दरभंगा में बिहार सरकार के मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के मंत्री मदन सहनी ने अपनी ही सरकार की पुलिस कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने बिहार में अब अपराधियों से ज्यादा आम लोगों को पुलिस से डर लगता है. पुलिस अधिकारी, दरोगा और जवान आम लोगों से अवैध वसूली करते हैं, अगर इस पर रोक नहीं लगी तो हमें खुद सोचना पड़ेगा. उनका ये बयान उनके घर के पास हुई एक घटना के बाद आया है, जिसमें 20 वर्षीय युवक मोनू कुमार ने कथित पुलिस दबाव में आत्महत्या कर ली.
दरअसल, दरभंगा के खराजपुर निवासी मोनू कुमार ने कुछ दिन पहले यानी रविवार को किसी व्यक्ति से दो हजार रुपये में एक मोबाइल खरीदा था. बिना नंबर प्लेट की बाइक पर सादे कपड़ों में आए पुलिसकर्मियों ने ये चोरी का युवक के पास से मोबाइल बरामद कर लिया. आरोप है कि इसके बाद पुलिसकर्मियों ने केस में फंसाने का डर दिखाकर मोनू पर दो से तीन लाख रुपये देने का दबाव बनाया. इस भारी दबाव और मुकदमे के डर को मोनू झेल नहीं पाया और उसने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली.
पुलिस के दोबारा पहुंचने पर बवाल
वहीं, युवक की मौत से अनजान वही पुलिसकर्मी सोमवार को दोबारा बिना नंबर प्लेट वाली बाइक से सादे कपड़ों में पहुंचे तो वहां आक्रोशित परिजनों ने पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की.
पुलिस का आरोप है कि भीड़ ने हथियारबंद जवानों को बंधक भी बना लिया. इसके बाद सदर एसडीपीओ एस. के. सुमन भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया. एसडीपीओ ने माना कि मोबाइल जांच और मुकदमे के डर से युवक ने आत्महत्या की है, लेकिन फायरिंग से इनकार किया.
'अपराधियों से ज्यादा पुलिस का खौफ'
पीड़ित परिवार ने मंत्री मदन सहनी से मिलकर इंसाफ की गुहार लगाई और सीसीटीवी फुटेज दिखाया, जिसमें पुलिसकर्मी पिस्टल ताने दिख रहे हैं. परिजनों ने तीन राउंड फायरिंग का आरोप लगाया.
इस पर मंत्री ने कहा कि दरभंगा पुलिस एसटीएफ के नाम पर लोगों को गुमराह कर अवैध वसूली करती है. उन्होंने कहा कि जब पुलिस ही डराकर पैसे ऐंठेगी और खुलेआम लोगों को टारगेट कर फायरिंग करेगी, तो फिर समाज में अपराधियों की क्या जरूरत रह जाएगी.
मंत्री मदन सहनी ने कहा कि सिपाही से लेकर दरोगा और अधिकारी आम जनता को प्रताड़ित कर रहे हैं. उन्होंने याद दिलाया कि इससे पहले भी उन्होंने बिहार के डीजीपी पर सवाल उठाए थे, जब भारत तिवारी मामले में एनकाउंटर के आरोपी डीएसपी को पदस्थापना दे दी गई थी. मंत्री ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन ने मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने तक को एम्बुलेंस की व्यवस्था नहीं की.
मदन सहनी ने आरोप लगाया कि सादी वर्दी में आने वाले जवान टेक्निकल सेल के थे, जिनका काम लोगों को डरा-धमकाकर अवैध उगाही करना है. उन्होंने सवाल उठाया कि 20 साल का युवक कोई बड़ा आतंकी या अपराधी नहीं था कि पुलिस पहचान छिपाकर आई.
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस पर रोक नहीं लगी तो उन्हें कुछ सोचना होगा. मंत्री ने दरभंगा के एसएसपी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की है.