पंचायत आजतक बिहार के सेशन '100 दिन: कितना वादा… कितना दावा!' में पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन, कांग्रेस सांसद डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री और आरजेडी के वरिष्ठ नेता अली अशरफ फातमी और एलजेपी (आर) के सांसद अरुण भारती शामिल हुए. इस दौरान बिहार सरकार के कामकाज, रोजगार, शिक्षा, उद्योग, कानून-व्यवस्था और बाढ़ की स्थिति को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच बहस हुई.
बिहार सरकार के करीब डेढ़ सौ दिन पूरे होने के बाद सरकार की उपलब्धियों पर शाहनवाज हुसैन ने कहा कि सरकार ने जिन वादों के साथ काम शुरू किया था, उन्हें आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है. सरकार ने बिहार को अंधेरे से उजाले में लाने का नहीं, बल्कि उजाले में और चमक लाने का वादा किया था. पिछले करीब 20 वर्षों से बीजेपी और जेडीयू के नेतृत्व में सरकार चलती रही है और इस दौरान विकास योजनाओं में निरंतरता बनी रही.
उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का जिक्र करते हुए कहा कि बिहार को युवा मुख्यमंत्री मिला है और सरकार की योजनाएं पहले की तरह जारी हैं. उन्होंने हर प्रखंड में डिग्री कॉलेज खोलने के फैसले का जिक्र किया.
शाहनवाज हुसैन ने बाढ़ प्रबंधन को भी सरकार की उपलब्धि बताया. उन्होंने कहा कि बाढ़ जैसी बड़ी आपदा से निपटने के लिए सरकार ने बेहतर प्रबंधन किया.
यह भी पढ़ें: बिहार: डिप्टी CM विजय कुमार सिन्हा को गुमराह कर रहे थे SDM, खुली पोल तो जमकर लगी फटकार
उद्योग और रोजगार पर शाहनवाज हुसैन का दावा
शाहनवाज हुसैन ने बिहार में निवेश को लेकर भी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं. उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में उद्योगपतियों की बिहार में रुचि बढ़ी है. अपने उद्योग मंत्री के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय इथेनॉल और टेक्सटाइल उद्योग की दिशा में काम शुरू हुआ था, जिसे आगे बढ़ाया गया है. अब स्टील क्षेत्र में भी बड़े निवेश की बात सामने आ रही है. बिहार में ऐसा माहौल बना है, जिसमें स्पष्ट बहुमत और डबल इंजन की सरकार है. उद्योग आने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और बिहार की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी.
कांग्रेस सांसद डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह ने सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा बिहार देश के सबसे पिछड़े और गरीब राज्यों में शामिल है. लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद बिहार की स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया. बिहार के पुराने औद्योगिक इतिहास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एक समय बिहार चीनी उत्पादन के क्षेत्र में देश के प्रमुख राज्यों में था. 1990 के आसपास बिहार में करीब 27-28 चीनी मिलें चल रही थीं, जबकि अब केवल कुछ मिलें ही संचालित हैं.
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकार उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में उपलब्धियां गिना रही है तो बिहार की मौजूदा आर्थिक और औद्योगिक स्थिति में व्यापक बदलाव क्यों नहीं दिखाई दे रहा.
डिग्री कॉलेजों को लेकर फातमी ने सरकार पर साधा निशाना
आरजेडी नेता अली अशरफ फातमी ने सरकार की ओर से हर प्रखंड में डिग्री कॉलेज खोलने के दावे पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि केवल कॉलेज की घोषणा या भवन उपलब्ध करा देने से उच्च शिक्षा की व्यवस्था मजबूत नहीं हो जाती. फातमी ने सवाल किया कि इन कॉलेजों में पर्याप्त शिक्षक, प्रोफेसर, लैब, लाइब्रेरी और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं.
उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगह स्कूलों के कमरों का इस्तेमाल कॉलेज के लिए किया जा रहा है. उनके मुताबिक, इससे स्कूलों की पढ़ाई भी प्रभावित हो सकती है. फातमी ने कहा कि सरकार को कॉलेज खोलने के साथ-साथ वहां शिक्षक, आधारभूत ढांचा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी चाहिए.
अली अशरफ फातमी ने बिहार की शिक्षा व्यवस्था और उद्योगों को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि अगर पिछले कुछ वर्षों में बिहार ने दूसरे राज्यों की तुलना में शिक्षा, उद्योग, रोजगार या स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है तो सरकार को उसके आंकड़े सामने रखने चाहिए.
बिहार में उद्योग लगाने से जुड़े पुराने वादों का जिक्र करते हुए कहा कि कई घोषणाओं के बावजूद जमीन पर उद्योगों की स्थिति को लेकर सवाल बने हुए हैं.
अरुण भारती ने गिनाए सरकार के काम
एलजेपी (आर) सांसद अरुण भारती ने चर्चा में बिहार के विकास और सरकार के कामकाज का बचाव किया. उन्होंने कहा कि बिहार में पिछले कुछ दशकों में अलग-अलग सरकारों ने शासन किया है और मौजूदा सरकार पिछले करीब 20 वर्षों की विकास प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का काम कर रही है. उन्होंने नीतीश कुमार के लंबे कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उनके द्वारा तैयार किए गए आधार पर अब आगे विकास की इमारत खड़ी करने की जरूरत है.
अरुण भारती ने 'प्रशासन आपके द्वार' जैसे कार्यक्रम का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि अब लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए केवल सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, बल्कि प्रशासन पंचायत, प्रखंड और जिले तक जाकर लोगों की समस्याएं सुनने और उनका समाधान करने का काम कर रहा है.
बाढ़ पर बहस
बिहार के कई जिलों में बाढ़ की स्थिति को लेकर भी सवाल उठे. पटना के कुछ हिस्सों के अलावा भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अररिया समेत कई जिले बाढ़ से प्रभावित हुए. इस पर सवाल उठाया गया कि हर साल बिहार में बाढ़ आती है, लेकिन राहत और बचाव के बाद समस्या दोबारा सामने आ जाती है. सरकार की दीर्घकालिक योजना क्या है?
इस पर अरुण भारती ने कहा कि बिहार में बाढ़ की समस्या का एक बड़ा कारण नेपाल से आने वाला पानी है. उन्होंने कहा कि इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टास्क फोर्स बनाने का सुझाव दिया गया है, जिसमें नेपाल से जुड़े प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए. उन्होंने कहा कि इस दिशा में सरकार ने पहल शुरू की है और आने वाले समय में इसके आधार पर ठोस कदम दिखाई देंगे.
शाहनवाज हुसैन ने कहा कि इस बार नेपाल में हुई भारी बारिश और गंगा के जलस्तर बढ़ने का असर बिहार पर पड़ा. उन्होंने भागलपुर समेत कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति का जिक्र किया. शाहनवाज हुसैन ने दावा किया कि केंद्र सरकार से भी मदद मिली और प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाने का काम किया. बाढ़ बिहार की एक बड़ी चुनौती है और इसके लिए दीर्घकालिक समाधान पर काम करने की जरूरत है.
यह भी पढ़ें: बांकीपुर की हार से सम्राट चौधरी के समृद्धि काल तक… पंचायत आजतक पर बिहार BJP अध्यक्ष ने हर मुद्दे पर की बेबाक बात