scorecardresearch
 

CNG गाड़ियों के लिए बड़ा बदलाव, IGL ने शुरू किया ऑटोमेटेड सिस्टम

इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड ने अपने फ्यूल स्टेशन पर गाड़ियों की सेफ्टी को लेकर बड़ा कदम उठाया है. कंपनी ने इस संबंध में एआई बेस्ड एक सिस्टम की शुरुआत की है, जो किसी भी गाड़ी में सीएनजी भरने से पहले उसकी जांच करेगा. अगर उस गाड़ी की सीएनजी सिलेंडर का हाइड्रो-टेस्ट सर्टिफिकेट एक्सपायर हो गया है, तो उसे फ्यूल नहीं मिलेगा.

Advertisement
X
IGL ने शुरू किया नया AI बेस्ट सेफ्टी सिस्टम. (Photo: ITG)
IGL ने शुरू किया नया AI बेस्ट सेफ्टी सिस्टम. (Photo: ITG)

सीएनजी गाड़ियों की सेफ्टी और बेहतर करने के लिए आईजीएल (इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड) ने टेक्नोलॉजी बेस्ड ऑटोमेटेड व्हीकल रिकग्निशन और वेरिफिकेशन सिस्टम की शुरुआत की है. अभी ये सिस्टम सिर्फ 10 आईजीएल (IGL) स्टेशन पर शुरू किया गया है.

इस सिस्टम की मदद से गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन नंबर और सीएनजी सिलेंडर के हाइड्रो-टेस्ट सर्टिफिकेट के रिकॉर्ड को मैच किया जाएगा. इसकी मदद से ऐसी गाड़ियों की पहचान हो सकेगी, जिनके सीएनजी सिलेंडर का हाइड्रो-टेस्ट सर्टिफिकेट एक्सपायर हो चुका है. या फिर जिनका सर्टिफिकेट वैलिड नहीं है. ये एक बड़े डिजिटल सेफ्टी सिस्टम की शुरुआत है. 

कैसे काम करेगा IGL का ये सिस्टम?

टेक्नोलॉजी बेस्ड इस सिस्टम में कैमरे की मदद से गाड़ियों के नंबर (रजिस्ट्रेशन नंबर) को कैप्चर किया जाता है. उस नंबर को वेरिफाई किया जाता है. इसके बाद रजिस्ट्रेशन डिटेल को एआई बेस्ड ऐप्लिकेशन में प्रॉसेस किया जाता है.  ये सिस्टम सीएनजी सिलेंडर से जुड़ी डिटेल्स को वेरिफाई करता है.

यह भी पढ़ें: Best-selling CNG cars: 2026 में इन कारों के दीवाने हुए लोग... मिलता है गजब का माइलेज

Advertisement

इसके बाद पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (PESO) के पोर्टल के जरिए सिलेंडर की वैलिडिटी चेक की जाएगी. सिस्टम ये बताएगा कि गाड़ी में लगा सीएनजी सिलेंडर वैलिड है या उसका हाइड्रो-टेस्ट एक्सपायर हो चुका है. इससे स्टेशन पर रियल-टाइम में सीएनजी सिलेंडर से जुड़ी डिटेल्स मिलेंगी. 

अगर वाहन का सर्टिफिकेट वैलिड नहीं है, तो स्टेशन पर अलर्ट भी जारी किया जाएगा. इस ऑटोमेटिड सिस्टम की वजह से मैन्युअल तरीके से होने वाली जांच पर निर्भरता कम होगी. साथ ही एक डेटा सेट भी तैयार किया जा सकेगा, जिसका इस्तेमाल सेफ्टी नॉर्म्स का पालन नहीं करने वाली सीएनजी गाड़ियों को रोकने में मिल जा सकेगा. 

यह भी पढ़ें: Kia Carens vs Maruti Ertiga CNG: ₹12 हजार का फर्क? जानें माइलेज, स्पेस और फीचर्स में कौन है पैसा वसूल

ऐसे गाड़ियों में सीएनजी रिफ्यूलिंग को रोका जा सकेगा. आईजीएल आने वाले दिनों में इस टेक्नोलॉजी को अपने सभी स्टेशनों पर लागू करने की तैयारी में है. नियमों के मुताबिक हर सीएनजी सिलेंडर की 3 साल में एक बार पीईएसओ से अप्रूव्ड सिलेंडर टेस्टिंग सेंटर पर हाइड्रो टेस्टिंग कराना जरूरी है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement