
दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर FASTag को लेकर एक नया विवाद सामने आया है. टोल प्लाजा पर पेमेंट को आसान बनाने वाला FASTag अब एयरपोर्ट पर गाड़ियों की एंट्री से जुड़ी परेशानी की वजह बन रहा है. खबर है कि, टर्मिनल-3 के अराइवल एरिया में केवल उन्हीं गाड़ियों को प्रवेश दिया जा रहा था, जिन पर एक्टिव FASTag लगा हुआ था. जिन गाड़ियों पर FASTag नहीं था या वह एक्टिव नहीं था, उन्हें एयरपोर्ट के सामने बने मल्टीलेवल कार पार्किंग (MLCP) की ओर भेजा जा रहा था.
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस नए नियम के चलते कई गाड़ियों को अराइवल एरिया में मिलने वाला 8 मिनट का फ्री वेटिंग पीरियड खत्म होने की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. मामला सामने आने के बाद नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने इस पर संज्ञान लिया है. अब सवाल उठ रहा है कि क्या पार्किंग शुल्क जमा करने के लिए इस्तेमाल होने वाले FASTag के आधार पर किसी वाहन की एंट्री रोकी जा सकती है.
बताया जा रहा है कि, एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 के अराइवल लेन में यह नियम लागू था. टर्मिनल-3 से इंटरनेशनल और डोमेस्टिक दोनों तरह की फ्लाइट्स ऑपरेट होती हैं. यहां पर भारी मात्रा में लोगों का आवागमन होता है और यहां से कई यात्री रोजाना बाहर निकलते हैं. इसलिए यहां यात्रियों को लेने आने वाली गाड़ियों के लिए 8 मिनट का फ्री वेटिंग पीरियड मिलता है. इस दौरान यात्रियों को लेने आने वाली वाली गाड़ियां तकरीबन 8 मिनट तक बिना किसी शुल्क के अराइवल गेट पर खड़ी रह सकती हैं और पैसेंजर को लेने के बाद आगे बढ़ सकती है.

लेकिन बीते दिनों से देखा जा रहा था कि, जिन वाहनों पर एक्टिव FASTag नहीं था, उन्हें अराइवल लेन में जाने देने के बजाय एयरपोर्ट के सामने बने मल्टीलेवल कार पार्किंग में भेजा जा रहा था. इसके कारण यात्रियों को लेने पहुंचे लोगों को परेशानी हो रही थी और कई वाहनों के लिए मिलने वाला 8 मिनट का फ्री वेटिंग पीरियड खत्म हो जा रहा था.
इस मामले में अधिकारियों का कहना है कि FASTag मूल रूप से पेमेंट करने का एक माध्यम है. इसका इस्तेमाल किसी वाहन की एंट्री पर रोक लगाने के लिए नहीं किया जा सकता. एक अधिकारी ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि FASTag का उद्देश्य पार्किंग जैसी फेसिलटी के लिए पेमेंट करना है, न कि एयरपोर्ट पर वाहनों की एंट्री को कंट्रोल करना.
NHAI ने दिया निर्देश
अधिकारी के मुताबिक, NHAI ने इस मामले का संज्ञान लिया है. इसके बाद एयरपोर्ट पर काम करने वाले संबंधित बैंकों को निर्देश दिया गया है कि FASTag का इस्तेमाल केवल पेमेंट के लिए किया जाए. साथ ही, इसके आधार पर वाहनों की एंट्री रोकने जैसी किसी भी व्यवस्था को बंद करने के लिए कहा गया है. ताकि लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो. NHAI ने साफ किया है कि, FASTag का इस्तेमाल केवल पेमेंट के लिए ही होना चाहिए, एयरपोर्ट पर वाहनों की एंट्री और पार्किंग के नियमों को लागू करने के लिए इसका गलत इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए.
क्या होता है FASTag?
FASTag एक इलेक्ट्रॉनिक टोल पेमेंट सिस्टम है. जिसे NHAI द्वारा ऑपरेट किया जाता है. यह रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) तकनीक पर काम करता है. FASTag को गाड़ी की विंडशील्ड पर लगाया जाता है, ताकि टोल प्लाजा पर लगे सेंसर इसे अपने आप स्कैन कर सकें. इसके बाद टोल का पैसा सीधे वाहन मालिक के FASTag से जुड़े बैंक खाते या प्रीपेड वॉलेट से कट जाता है. इससे गाड़ी को टोल पर रुककर नकद भुगतान करने की जरूरत नहीं पड़ती.
अगर FASTag प्रीपेड खाते से जुड़ा है, तो उसमें समय-समय पर रिचार्ज कराना जरूरी होता है. पर्याप्त बैलेंस नहीं होने पर FASTag को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है. FASTag एक केवल एक ही वाहन पर लगाया जा सकता है और सरकार द्वारा केवल रजिस्टर्ड वाहनों के लिए ही जारी होता है. एक बार किसी गाड़ी पर लगाने के बाद इसे दूसरी गाड़ी में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. FASTag को नेशनल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन नेटवर्क से जुड़े बैंकों से खरीदा जा सकता है.