UNGA के मंच पर नेपाल पीएम ने की भारत की दिल खोलकर तारीफ, हिमालय को लेकर रखा ये प्रस्ताव

संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत-चीन की हाल की बाढ़ के दौरान सहायता के लिए आभार नेपाल पीएम ने आभार जताया है. उन्होंने हिमालयी क्षेत्र में जलवायु आपदाओं से निपटने के लिए नेपाल, भारत और चीन के बीच एक नया जलवायु रेजिलिएंस तंत्र बनाने का प्रस्ताव रखा. इसके तहत सैटेलाइट डेटा साझा करने, ग्लेशियल लेक्स की निगरानी और समय पर चेतावनी देने की व्यवस्था मजबूत की जाएगी

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नेपाल पीएम ने UNGA के मंच से फ्लैश फ्लड के दौरान भारत की मदद के लिए आभार जताया है. (Photo-X/@ANI) नेपाल पीएम ने UNGA के मंच से फ्लैश फ्लड के दौरान भारत की मदद के लिए आभार जताया है. (Photo-X/@ANI)

aajtak.in

  • न्यूयॉर्क,
  • 25 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:54 AM IST

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संयुक्त राष्ट्र में भारत की तारीफ की है. उन्होंने हाल की बाढ़ के बाद नेपाल की मदद के लिए भारत और चीन का आभार जताया. साथ ही उन्होंने हिमालयी क्षेत्र में जलवायु आपदाओं से निपटने के लिए एक नए सिस्टम का प्रस्ताव रखा. 

पीएम बालेन शाह ने नेपाल, भारत और चीन के बीच सहयोग की बात कही. उन्होंने ग्लेशियल लेक्स की निगरानी, सैटेलाइट डेटा शेयर करने और समय रहते वार्निंग देने की व्यवस्था मजबूत करने का सुझाव दिया.

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भारत और चीन की मदद के लिए जताया आभार

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए बालेन शाह ने नेपाल फ्लैश फ्लड का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में नेपाल के साथ कई देश खड़े हुए. शाह ने भारत और चीन को नेपाल का पड़ोसी बताते हुए दोनों देशों की मदद के लिए धन्यवाद दिया.

उन्होंने कहा कि भारत और चीन ने तुरंत और उदारता से सहायता पहुंचाई. इसके अलावा दूसरे मित्र देशों, संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं, मानवीय संगठनों और दुनिया भर के लोगों ने भी नेपाल का साथ दिया. हम नेपाल की जनता की ओर से सभी का आभार जताते हैं.

बालेन शाह ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में जलवायु से जुड़े खतरे लगातार बढ़ रहे हैं. ऐसे में उन्होंने नेपाल, भारत और चीन के नेतृत्व में एक हिमालयन क्लाइमेट रेजिलिएंस मैकेनिज्म बनाने का प्रस्ताव रखा.

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उन्होंने कहा कि इस तंत्र के जरिए तीनों देश सैटेलाइट डेटा और विशेषज्ञता शेयर कर सकते हैं. खतरनाक ग्लेशियल लेक्स पर नजर रखी जा सकती है. शुरुआती चेतावनी देने वाली व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा सकता है. आपदा आने पर सीमा पार राहत और मदद के लिए भी बेहतर तालमेल बनाया जा सकता है.

ग्लेशियल लेक्स पर क्यों है नजर?

दरअसल, हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों के पिघलने और ग्लेशियल लेक्स के बढ़ने से बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है. हाल के सालों में नेपाल में भी जलवायु से जुड़ी आपदाओं ने बड़ी चिंता पैदा की है. इसी वजह से नेपाल सरकार जलवायु सुरक्षा और आपदा से पहले चेतावनी देने वाली व्यवस्था पर जोर दे रही है. बालेन शाह ने UN में भी इसी दिशा में क्षेत्रीय सहयोग की बात रखी.

नेपाल पीएम बालेन शाह ने कहा कि हिमालय को अलग-अलग देशों के बीच बंटी हुई जानकारी का क्षेत्र नहीं बनना चाहिए. इसके बजाय इसे अंतरराष्ट्रीय सहयोग का उदाहरण बनाया जाना चाहिए. उनका प्रस्ताव है कि तीनों पड़ोसी देश मिलकर वैज्ञानिक जानकारी साझा करें और आपदा के समय एक-दूसरे की मदद करें.

नेपाल पहले भी UN में जलवायु संकट और हिमालयी क्षेत्र की चुनौतियों का मुद्दा उठाता रहा है. इस बार बालेन शाह ने इसे क्षेत्रीय सहयोग से जोड़ने की कोशिश की है. नेपाल की ओर से जलवायु न्याय और जलवायु आपदाओं से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद की मांग भी UNGA में प्रमुख मुद्दा रही है.

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शाह का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब नेपाल हाल की विनाशकारी बाढ़ के असर से जूझ रहा है. ऐसे में उनका जोर राहत के साथ-साथ भविष्य की आपदाओं से निपटने की तैयारी पर भी है.

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