NATO भी नहीं बचाएगा! तुर्की से जंग के लिए इजरायल को मिल गया लूपहोल

इजरायल और तुर्की के बीच सीरिया को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है. इसी बीच इजरायल के एक अखबार में छपे लेख में दावा किया गया है कि अगर तुर्की की सेना सीरिया में तैनात होती है, तो NATO का आर्टिकल-5 उसे इजरायल के हमले से सुरक्षा नहीं देगा.

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तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू. (Photo- ITG) तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू. (Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 7:11 AM IST

इजरायल और तुर्की के बीच सीरिया को लेकर तनाव अब नए स्तर पर पहुंचता दिख रहा है. इजरायल के दक्षिणपंथी अखबार 'इजरायल हायोम' में छपे एक लेख में दावा किया गया है कि अगर तुर्की की सेना सीरिया में तैनात होती है, तो इजरायल के लिए उस पर हमला करने का रास्ता खुला रह सकता है. लेख में NATO के आर्टिकल-5 को इसका आधार बताया गया है.

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अखबार के मुताबिक, NATO का सामूहिक रक्षा समझौता किसी सदस्य देश की अपनी जमीन की सुरक्षा के लिए है. यानी अगर तुर्की की सेना सीरिया में मौजूद है, तो सीरिया की जमीन को तुर्की का इलाका नहीं माना जाएगा.

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लेख में दावा किया गया है कि तुर्की के सैनिक सीरिया पहुंचने के बाद भी उस इलाके को अपने देश का हिस्सा नहीं बना देते. ऐसे में अगर इजरायल वहां तुर्की के सैनिकों या सैन्य ढांचे को निशाना बनाता है, तो सिर्फ NATO सदस्य होने की वजह से तुर्की को आर्टिकल-5 की सुरक्षा मिलने की गारंटी नहीं होगी.

हालांकि, यह इजरायल सरकार का आधिकारिक बयान नहीं, बल्कि एक अखबार का ओपीनियन है. NATO किसी हमले की स्थिति में क्या कदम उठाएगा, यह परिस्थितियों और सदस्य देशों के फैसले पर निर्भर करेगा.

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सीरिया बना सबसे बड़ा टकराव का मैदान

इजरायल को डर है कि तुर्की सीरिया में अपना सैन्य प्रभाव तेजी से बढ़ा रहा है. तुर्की सीरियाई सेना को ट्रेनिंग देने और सैन्य ढांचे को मजबूत करने में मदद कर रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में तुर्की की सैन्य टीमों ने T4, पलमायरा और हमा जैसे सैन्य ठिकानों का जायजा लिया था.

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इसी बीच इजरायल ने उत्तरी सीरिया में एक पुराने एयरबेस पर हवाई हमला किया. इजरायल का मानना था कि वहां तुर्की की सेना पहुंच सकती है. हालांकि, सीरियाई अधिकारियों का कहना है कि वहां तुर्की की सैन्य तैनाती नहीं थी. एक तकनीकी टीम सिर्फ रनवे और कंट्रोल टावर की मरम्मत के लिए गई थी.

अमेरिका भी तनाव कम करना चाहता है

अमेरिका के तुर्की में राजदूत और सीरिया मामलों के दूत टॉम बैरक ने इजरायल के हमले को "अनावश्यक तनाव बढ़ाने वाला कदम" बताया. उन्होंने कहा कि इजरायल, सीरिया और तुर्की के बीच ऐसा सिस्टम बनाने की जरूरत है, जिससे भविष्य में गलतफहमी के कारण सैन्य टकराव न हो.

यानी फिलहाल इजरायल और तुर्की की सीधी जंग नहीं हुई है, लेकिन सीरिया में दोनों की बढ़ती सैन्य मौजूदगी किसी बड़े टकराव का खतरा जरूर बढ़ा रही है. NATO का आर्टिकल-5 इस स्थिति में कितना काम करेगा, यह अभी बड़ा सवाल है.

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