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यूक्रेन में रूसी हाइपरसोनिक हथियारों को फेल कर रही है 42 साल पुरानी अमेरिकी मिसाइल, जानिए ताकत

ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 18 मई 2023,
  • अपडेटेड 11:34 AM IST
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पैट्रियट मिसाइल (Patriot Missile) अमेरिका ने बनाई है. यह सतह से हवा (Surface to Air - SAM) में मार करने वाली मिसाइल है. यह अमेरिका में 42 सालों से इस्तेमाल की जा रही है. दुनिया सबसे भरोसेमंद हवाई सुरक्षा सिस्टम में से एक है. साथ ही इसका इस्तेमाल बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने में किया जाता है. (सभी फोटोः गेटी/एएफपी/रॉयटर्स)

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पैट्रियट मिसाइलों का इस्तेमाल खाड़ी युद्ध, इराक युद्ध, इजरायल-गाजा संघर्ष, सीरिया, यमन के जंगों में होता आया है. रूस-यूक्रेन युद्ध में इस्तेमाल हो रहा है. इस मिसाइल को फिलहाल रेथियॉन, लॉकहीड मार्टिन और बोईंग कंपनियां मिलकर बनाती हैं. अब तक 10 हजार से ज्यादा मिसाइलें बनाई गई हैं. यूक्रेन का दावा है कि उसने रूस की हाइपरसोनिक किंझल मिसाइल को पैट्रियट से मार गिराया. 

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1106 लॉन्चर तो अमेरिका में ही तैनात है. इसके अलावा अमेरिका 172 लॉन्चर अलग-अलग देशों को बेंचे या दिए हैं. अब तक इस मिसाइल सिस्टम के 7 से 8 वैरिएंट्स बनाए गए हैं. जो अलग-अलग रेंज और ताकत से लैस हैं. यानी इनका इस्तेमाल किसी भी तरह के हवाई हमले को रोकने के लिए किया जा सकता है. 

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पैट्रियट मिसाइलें 312 से 914 किलोग्राम तक वजनी होती हैं. लंबाई 15.10 से लेकर 17.1 फीट तक होती है. हर वैरिएंट पर छोटे पंख लगे होते हैं. जिनका विंगस्पैन 1.8 से लेकर 3 फीट तक होता है. इन मिसाइलों पर कंपोजिशन ब्लास्ट, हाई एक्सप्लोसिव, ब्लास्ट, फ्रैगमेंटेशन वारहेड लगाए जाते हैं. 

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वारहेड का वजन 73 से 90 किलोग्राम तक हो सकता है. इतने वजन का हथियार किसी भी बड़ी मिसाइल को हवा में ही उड़ाने की क्षमता रखता है. डेटोनेशन यानी टकराव पर विस्फोट के लिए प्रॉक्सिमिटी फ्यूज सिस्टम लगाया गया है. जो कि दुश्मन मिसाइल से टकराते ही फट पड़ता है. 

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पैट्रियट मिसाइलों की रेंज 30 किलोमीटर से लेकर 160 किलोमीटर तक है. यह मिसाइल लगभग 80 हजार फीट की अधिकतम ऊंचाई तक जा सकती है. यानी करीब 24 किलोमीटर की ऊंचाई तक. अलग-अलग वैरिएंट की गति 3430 से 5022 किलोमीटर प्रतिघंटा है. किसी भी मिसाइल को मार गिराने के लिए इतनी गति काफी है. 

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इसका लॉन्चर मोबाइल होता है. जिसे कहीं भी ले जा सकते हैं. पहले यह मिसाइल गाइडेड नहीं थी लेकिन बाद में जब इसका पैक-2 वर्जन आया, तो उसे पूरी तरह से गाइडेंस इनहैंस्ड मिसाइल बना दिया गया. यह बात 1990 के आसपास की है. इसके बाद यह मिसाइल और भी घातक हो गई है. अब यह खुद ही टारगेट सेट करके हमला कर देती है. 

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नई पैक-3 मिसाइल अत्याधुनिक है. इसके लॉन्चर में 16 मिसाइलें सेट होती हैं. यानी कम समय में दुश्मन टारगेट पर ताबड़तोड़ हमला होगा. ऐसे हमलों से बचना मुश्किल होगा. क्योंकि पैक-3 मिसाइल वैरिएंट 5022 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से दुश्मन की ओर बढ़ती है. 

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बाद में पैक-3 को अपग्रेड करके पैक-3 एमएसई मिसाइल बनाई गई. यह एक मीडियम एक्सटेंडेड एयर डिफेंस सिस्टम (MEADS) है. जिसके सटीकता और बढ़ गई है. यह मिसाइल पीछा करके दुश्मन को नष्ट कर देती है. यह एक हिट-टू-किल इंटरसेप्टर मिसाइल है. इसके लॉन्चर को भी बदला गया है ताकि दुश्मन टारगेट मिस न हो. 

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इस मिसाइल का इस्तेमाल अमेरिका, जर्मनी, ग्रीस, इजरायल, जापान, जॉर्डन, कुवैत, नीदरलैंड्स, पोलैंड, कतर, रोमानिया, सऊदी अरब, दक्षिण कोरिया, स्पेन, स्वीडन, ताईवान, संयुक्त अरब अमीरात और यूक्रेन कर रहे हैं. उम्मीद है कि जल्द ही मोरक्को और स्विट्जरलैंड भी पैट्रियट मिसाइल खरीद सकते हैं. 

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