बेटियों के सपनों को मिल रही उड़ान, सुमंगला योजना से बरेली की छात्राओं को पढ़ाई में मदद

योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सहायता किसी एक समय पर खत्म नहीं होती. बेटी जैसे-जैसे जीवन और शिक्षा के अगले पड़ाव पर पहुंचती है, पात्रता पूरी होने पर सहायता का अगला चरण सामने आता है. इससे परिवारों को बेटी की शिक्षा जारी रखने के लिए लगातार प्रोत्साहन मिलता है.

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जन्म से उच्च शिक्षा तक बेटियों को आर्थिक मदद (Photo-ITG) जन्म से उच्च शिक्षा तक बेटियों को आर्थिक मदद (Photo-ITG)

कृष्ण गोपाल राज

  • नई दिल्ली ,
  • 19 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 10:53 AM IST

मुख्यमंत्री सुकन्या योजना उन बच्चियों के लिए वरदान साबित हो रहा है, जिनके माता- पिता आर्थिक तंगी की वजह से बच्चों की फीस नहीं भर पाते हैं. सरकार की इस योजना ने परिवार के लोगों को राहत और नई रोशनी दिखाने का काम किया है. कई बच्चे ऐसे हैं जो नवीं क्लास में पढ़ाई करने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन आर्थिक की वजह से माता-पिता फीस नहीं भर पा रहे थे, लेकिन जैसे ही इस योजना के तहत कुछ छात्राओं के खाते में पैसे पहुंचे तो परिवार में हिम्मत भी जगी.

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मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना बेटियों की पढ़ाई और उनके भविष्य को बेहतर बनाने में मदद कर रही है. इस योजना के तहत पात्र बालिकाओं को जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक छह चरणों में आर्थिक सहायता दी जाती है. बरेली में करीब 46000 से अधिक परिवार के लोगों को इस योजना का लाभ मिल चुका है.

शिक्षक बनना चाहती है राधिका

बरेली की रहने वाली राधिका नौंवी क्लास में पढ़ती है, उसका सपना टीचर बनने का है. इसके लिए वह बीएड की पढ़ाई भी करना चाहती है. राधिका के माता-पिता उसकी पढ़ाई में पूरा सहयोग कर रहे हैं. हालांकि, कभी-कभी परिवार को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है. राधिका को कक्षा छह और कक्षा नौ में मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना का लाभ मिला. इससे परिवार को आर्थिक राहत मिली. राधिका ने मिली हुई रकम को फिलहाल अपने खाते में सुरक्षित रखा है. वह इस पैसे का इस्तेमाल आगे शिक्षक बनने की पढ़ाई में करना चाहती है.

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राधिका के माता-पिता भी उसके सपने को पूरा करने के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं, वे चाहते हैं कि बेटी अपनी पसंद के क्षेत्र में आगे बढ़े और आत्मनिर्भर बने.

फैशन डिजाइनिंग में करियर बनाना चाहती है दीपशिखा

बरेली के प्रेमनगर की रहने वाली दीपशिखा खंडेलवाल भी कक्षा नौ में पढ़ती है. वह फैशन डिजाइनिंग के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहती है. हालांकि, इस कोर्स की फीस अधिक होने के कारण उसे कभी-कभी चिंता होती है. दीपशिखा के माता-पिता ने उसे भरोसा दिलाया है कि फीस की व्यवस्था कर ली जाएगी. उन्होंने बेटी से अपने सपने पर ध्यान देने को कहा है. परिवार का कहना है कि वे उसकी पढ़ाई में हर संभव मदद करेंगे.

दीपशिखा को भी कक्षा छह और कक्षा नौ में मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना का लाभ मिला. योजना से मिली रकम से परिवार को आर्थिक मदद मिली, इससे उसकी पढ़ाई का खर्च उठाने में भी सहायता मिली. दीपशिखा बताती है कि उसकी छोटी बहन को अभी इस योजना का लाभ नहीं मिल पाया है. वह आगे फैशन डिजाइनिंग की पढ़ाई करना चाहती है. उसके पिता मेहनत कर रहे हैं और मां समेत परिवार के अन्य सदस्य भी उसका पूरा साथ दे रहे हैं.

बरेली की 4.60 लाख से अधिक बेटियों को मिला योजना का लाभ

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मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना का उद्देश्य बेटियों के जन्म, स्वास्थ्य और शिक्षा को प्रोत्साहित करना है. इसके तहत पात्र बालिकाओं को अलग-अलग चरणों में आर्थिक सहायता दी जाती है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बरेली जिले में अब तक 4,60,212 बालिकाओं को इस योजना का लाभ मिला है. योजना के जरिए परिवारों को बेटियों की पढ़ाई का खर्च उठाने में मदद मिलती है, इसका मकसद आर्थिक परेशानी के कारण उनकी शिक्षा को रुकने से बचाना है.

छह चरणों में मिलती है आर्थिक सहायता

मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत पात्र बालिकाओं को छह चरणों में सहायता दी जाती है.

पहला चरण: बेटी के जन्म पर 5,000 रुपये

बालिका के जन्म के बाद पात्र परिवार को 5,000 रुपये की सहायता दी जाती है. इसका उद्देश्य बेटी के जन्म को प्रोत्साहित करना और परिवार को आर्थिक सहयोग देना है.

दूसरा चरण: पूर्ण टीकाकरण पर 2,000 रुपये

बालिका का एक वर्ष की आयु तक पूर्ण टीकाकरण होने पर पात्र परिवार को 2,000 रुपये की सहायता मिलती है, इससे बालिका के स्वास्थ्य और टीकाकरण को बढ़ावा दिया जाता है.

तीसरा चरण: कक्षा एक में प्रवेश पर 3,000 रुपये

कक्षा एक में प्रवेश लेने वाली पात्र बालिका को 3,000 रुपये दिए जाते हैं, इसका उद्देश्य स्कूल में दाखिले और प्राथमिक शिक्षा को प्रोत्साहित करना है.

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चौथा चरण: कक्षा छह में प्रवेश पर 3,000 रुपये

कक्षा छह में प्रवेश लेने पर पात्र बालिका को 3,000 रुपये की सहायता मिलती है, इससे आगे की पढ़ाई जारी रखने में मदद मिलती है.

पांचवां चरण: कक्षा नौ में प्रवेश पर 5,000 रुपये

कक्षा नौ में प्रवेश लेने वाली पात्र बालिका को 5,000 रुपये दिए जाते हैं, इस सहायता का उद्देश्य माध्यमिक स्तर पर बेटियों की पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करना है.

छठा चरण: उच्च शिक्षा में प्रवेश पर 7,000 रुपये

कक्षा 10वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद स्नातक या कम से कम दो साल के मान्य डिप्लोमा पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने वाली पात्र बालिका को 7,000 रुपये की सहायता दी जाती है.

इस तरह योजना के छह चरणों में कुल 25,000 रुपये की सहायता का प्रावधान है, इससे बेटियों को स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक आगे बढ़ने में मदद मिलती है.

क्या बोलीं जिला प्रोबेशन अधिकारी?

जिला प्रोबेशन अधिकारी मोनिका राणा के मुताबिक, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से परिवारों को आर्थिक सहायता मिलती है. बेटियों के खातों में रकम पहुंचने से परिवारों को उनकी पढ़ाई जारी रखने में मदद मिलती है. उन्होंने बताया कि योजना के तहत बेटी के जन्म से लेकर स्नातक की पढ़ाई तक अलग-अलग चरणों में सहायता दी जाती है, इससे आर्थिक परेशानियों के कारण पढ़ाई में आने वाली बाधाओं को कम करने में मदद मिलती है.

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जिला प्रोबेशन अधिकारी मोनिका राणा के मुताबिक, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना की शुरुआत वर्ष 2019 में की गई थी, इस योजना के तहत बालिकाओं को जन्म से लेकर स्नातक की पढ़ाई तक आर्थिक सहायता दी जाती है. बेटी के जन्म पर 5,000 रुपये दिए जाते हैं, योजना के छह चरणों में कुल 25,000 रुपये की सहायता का प्रावधान है.

उन्होंने बताया कि बरेली जिले में अब तक करीब 46 हजार परिवारों को इस योजना का लाभ मिल चुका है. योजना का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है, इसके लिए जन सेवा केंद्र की मदद भी ली जा सकती है.

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