घर के बाहर नई टाइल्स लगानी थीं. इसके लिए एक शख्स अपने बगीचे की जमीन खोद रहा था. काम ज्यादा मुश्किल भी नहीं था. घास, पत्थर और बजरी हटानी थी. लेकिन करीब आधे घंटे बाद फावड़ा या औजार जमीन के अंदर किसी चीज से टकराया और अजीब सी आवाज आई.
पहले लगा कि शायद कोई पुराना लोहे का टुकड़ा या तार होगा. लेकिन जब उसने हाथ से मिट्टी हटाई तो एक के बाद एक धातु की चीजें निकलने लगीं. कुछ देर बाद उसे समझ आया कि ये कोई कबाड़ नहीं, बल्कि चांदी के गहने, सिक्के और चांदी की छड़ें हैं.
और सबसे हैरानी की बात? ये कोई कुछ साल पुराना सामान नहीं था. जमीन के अंदर करीब 1000 साल से दबा वाइकिंग दौर का खजाना छिपा हुआ था. इसमें करीब 700 प्राइसलेस एंटीक चीजें और टुकड़े मिले हैं. सभी चीजें चांदी की थीं. इस खजाने में चांदी का कुल वजन करीब 18.5 किलो है. यह सिर्फ चांदी नहीं बल्कि हजार साल पुरानी एक चीजें है, जिससे इसका मूल्य और बढ़ जाता है. इसे डेनमार्क का अब तक का सबसे बड़ा ज्ञात वाइकिंग सिल्वर होर्ड बताया जा रहा है.
बस टाइल्स के लिए खोदी थी जमीन
न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, यह हैरान करने वाली खोज डेनमार्क के रीबिल्ड इलाके में एक निजी घर के आंगन में हुई. घर का मालिक नई टाइल वाली चबूतरा बनाना चाहता था. इसके लिए वह जमीन तैयार कर रहा था. उसका इरादा सिर्फ कुछ घंटों में घास, पत्थर और बजरी हटाने का था.
लेकिन करीब आधे घंटे की खुदाई के बाद उसे जमीन के अंदर से कुछ टकराने की आवाज सुनाई दी. शुरुआत में उसे लगा कि शायद पुराना लोहा या बाड़ का तार होगा. साथ में मिट्टी में कुछ पुराने बर्तनों के टुकड़े भी दिखे.
लेकिन जैसे-जैसे उसने हाथ से मिट्टी हटाई, उसे एक के बाद एक धातु की चीजें मिलने लगीं. फिर उसे समझ आया कि उसके हाथ कोई सामान्य सामान नहीं, बल्कि गहने, सिक्के और चांदी की छड़ें लगी हैं. उस समय तक शायद उसे अंदाजा भी नहीं था कि वह डेनमार्क के सबसे बड़े वाइकिंग खजानों में से एक के ऊपर खड़ा था.
मिट्टी के बर्तन में छिपाकर रखा गया था खजाना
पुरातत्वविदों के मुताबिक यह खजाना करीब 900वीं सदी में जमीन के अंदर छिपाया गया था. चांदी का बड़ा हिस्सा एक मिट्टी के बर्तन में रखा गया था. करीब 320 वस्तुएं, जिनका वजन लगभग 6.4 किलो था, उसी मूल मिट्टी के बर्तन में मिलीं. बाकी सामान उसके आसपास की मिट्टी में बिखरा हुआ था.
पूरे खजाने में करीब 700 वस्तुएं और उनके टुकड़े शामिल हैं. इनमें चांदी की छड़ें, कंगन, सिक्के, कटे हुए चांदी के टुकड़े और थॉर का छोटा हथौड़ा भी मिला है. यानी एक हजार साल पहले किसी ने अपनी बड़ी दौलत को जमीन के अंदर छिपाया था और फिर वह उसे लेने वापस नहीं आ सका.
खजाने में अरब और इंग्लैंड के सिक्के भी
इस खोज की खासियत सिर्फ इसकी मात्रा नहीं है. खजाने में अरब दुनिया और एंग्लो-सैक्सन इलाकों के सिक्के भी मिले हैं. इससे पता चलता है कि वाइकिंग दौर में डेनमार्क का संपर्क काफी दूर-दराज के इलाकों से था.
उस समय चांदी सिर्फ गहने बनाने के काम नहीं आती थी. चांदी को वजन के हिसाब से भी संपत्ति और भुगतान के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था. इसीलिए खजाने में चांदी की छड़ें और छोटे-छोटे कटे हुए टुकड़े भी मिले हैं.
एक चांदी की छड़ पर लिखी हैं रहस्यमयी रनिक लिपि
खजाने में मिली एक चांदी की छड़ ने पुरातत्वविदों की दिलचस्पी और बढ़ा दी है. उस पर कुछ रुनिक निशान खुदे हुए हैं. संग्रहालय के मुताबिक इसे संभवतः'hutu' पढ़ा जा सकता है. यह किसी व्यक्ति का नाम, मालिक की पहचान या कोई दूसरी महत्वपूर्ण निशानी हो सकती है. हालांकि इसका सही मतलब अभी तय नहीं है.
यानी एक हजार साल पुराना यह खजाना सिर्फ दौलत नहीं, बल्कि उस दौर के लोगों की जिंदगी और कारोबार के बारे में भी जानकारी दे रहा है.
इसमें थॉर का हथौड़ा भी मिला
खजाने में छोटा साथ थॉर का हथौड़ा भी मिला है, जो काफी खास है. वाइकिंग संस्कृति में थॉर एक प्रमुख देवता थे और उनका हथौड़ा उनकी पहचान से जुड़ा प्रतीक था. इस खोज में धार्मिक प्रतीकों के साथ-साथ सिक्के, गहने और चांदी की छड़ें मिली हैं. इससे पता चलता है कि खजाने में अलग-अलग तरह की चांदी की वस्तुएं जमा की गई थीं.
इतना बड़ा खजाना किसका था?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर 18.5 किलो चांदी किसकी थी? पुरातत्वविदों का मानना है कि इसका मालिक बेहद संपन्न और समाज में ऊंचे दर्जे का व्यक्ति रहा होगा. इतनी बड़ी मात्रा में चांदी होना बताता है कि उसके पास दूर-दराज के व्यापारिक नेटवर्क तक पहुंच रही होगी.
लेकिन उस व्यक्ति की पहचान अब इतिहास के साथ खो चुकी है. और यह भी पता नहीं कि उसने इतनी बड़ी संपत्ति जमीन में क्यों छिपाई.
क्या मालिक कभी इसे लेने नहीं आया?
पुरातत्वविदों के पास इसका पक्का जवाब नहीं है. आमतौर पर वाइकिंग दौर में लोग अपना कीमती सामान अस्थिर या मुश्किल समय में सुरक्षित रखने के लिए जमीन में छिपा देते थे. हो सकता है खजाने का मालिक किसी यात्रा पर गया हो और वापस नहीं लौट पाया हो. संभव है कि वह किसी विदेशी अभियान में मारा गया हो.
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लेकिन ये सिर्फ संभावनाएं हैं. असल में क्या हुआ, यह आज कोई नहीं जानता. एक बात जरूर साफ है, जिस व्यक्ति ने यह खजाना जमीन में छिपाया था, वह इसे वापस लेने कभी नहीं आया.
यह इलाका पहले भी दे चुका है वाइकिंग खजाने
सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह जगह पहली बार इतिहास का बड़ा राज नहीं खोल रही. इसी इलाके में 2026 में छह वाइकिंग दौर की सोने की बाजूबंद भी मिली थीं. इनका कुल वजन करीब 762.5 ग्राम था और इसे डेनमार्क का वाइकिंग दौर का तीसरा सबसे बड़ा सोने का खोजा गया खजाना बताया गया है.
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इसके अलावा रीबिल्ड इलाके में पहले भी वाइकिंग दौर के चांदी के खजाने मिल चुके हैं. यानी आज के समय में सामान्य सा दिखने वाला यह इलाका करीब एक हजार साल पहले धन और व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र रहा हो सकता है.
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