यूरीन में ब्लड आना किसी भी इंसान के लिए चिंता की बात हो सकती है. चीन में एक 35 साल के शख्स के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. उसे पेशाब करने में तकलीफ हो रही थी और यूरिन में खून भी आ रहा था. वह इलाज के लिए अस्पताल पहुंचा.
शुरुआत में ऐसा नहीं लगा कि मामला बहुत गंभीर है. शख्स के जरूरी टेस्ट और वाइटल साइन सामान्य थे. उसे कोई दूसरी बड़ी परेशानी भी नहीं थी. लेकिन डॉक्टरों को जांच के दौरान एक ऐसी चीज नजर आई, जिसने पूरे मामले को हैरान कर दिया.
न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, स्कैन में उसके शरीर के अंदर कई धातु की सुई जैसी चीजें दिखाई दीं. ये सिर्फ पेट या ब्लैडर तक सीमित नहीं थीं. इनमें से एक खतरनाक चीज तो उसके दिल के आसपास मौजूद उस झिल्ली तक पहुंच गई थी, जिसमें दिल रहता है.
पहले दिखा दिल के पास अजीब सा साया
अस्पताल में जांच के दौरान डॉक्टरों को इमेजिंग टेस्ट में दिल के पास एक अजीब सी छाया दिखाई दी. इसके बाद उन्होंने स्थिति को और साफ समझने के लिए कॉन्ट्रास्ट-एन्हांस्ड CT स्कैन कराया.
CT स्कैन में जो तस्वीर सामने आई, उसने डॉक्टरों को हैरान कर दिया. शख्स के शरीर के अलग-अलग हिस्सों में कई सुई जैसी धातु की चीजें मौजूद थीं. इनमें पेट, पेल्विस, ब्लैडर और शरीर के दूसरे हिस्से शामिल थे.
सबसे ज्यादा चिंता डॉक्टरों को करीब 1.4 इंच लंबी एक धातु की पिन को लेकर हुई. यह पिन दिल को घेरने वाली तरल पदार्थ से भरी झिल्ली, जिसे पेरिकार्डियम कहते हैं, उसमें घुस चुकी थी.
आखिर शरीर के अंदर पहुंची कैसे?
डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही था कि ये चीजें शख्स के शरीर के अंदर आई कैसे? शख्स बचपन से ही बौद्धिक अक्षमता से जूझता रहा था. वह डॉक्टरों को यह नहीं बता सका कि ये सुइयां उसके शरीर में कैसे पहुंचीं. उसके पिता भी इस बारे में कुछ नहीं बता पाए. वह उसके कानूनी देखभालकर्ता थे.
लेकिन डॉक्टरों को उसके पुराने मेडिकल रिकॉर्ड से एक अहम सुराग मिला. करीब दो साल पहले किसी दूसरे अस्पताल में उसके पेट से दो खतरनाक बाहरी चीजें निकाली जा चुकी थीं. इस हिस्ट्री को देखते हुए डॉक्टरों ने अंदाजा लगाया कि मामला सेल्फ एम्बेडिंग या जानबूझकर शरीर के अंदर बाहरी चीजें डालने से जुड़ा हो सकता है.
क्या होता है Self-Embedding?
सेल्फ एम्बेडिंग एक तरह का नॉन सुसाइडर सेल्फ इंजरी यानी खुद को नुकसान पहुंचाने वाला व्यवहार है. इसमें व्यक्ति जानबूझकर अपने शरीर के अंदर कोई बाहरी वस्तु डाल देता है. ऐसे मामलों में कांच के टुकड़े, स्टेपलर की पिन, पेपर क्लिप, तार या दूसरी नुकीली चीजें शरीर में डाली जा सकती हैं.यह व्यवहार काफी दुर्लभ माना जाता है, लेकिन मेडिकल रिपोर्ट्स में इसके मामले कई दशकों से सामने आते रहे हैं.
इस तरह के मामलों का इतिहास काफी पुराना है. 1936 में सीरियल किलर अलबर्ट फिश की जांच के दौरान उसके शरीर में करीब 30 सुइयां मिली थीं, जो उसके ग्रोइन यानी जांघ और पेट के आसपास के हिस्से में थीं.
बाद के दशकों में भी ऐसे मामले सामने आए. 1980 के दशक में कुछ रिपोर्ट्स आईं और 2010 के बाद डॉक्टरों ने खास तौर पर ऐसे किशोरों के मामले रिपोर्ट करने शुरू किए, जो जानबूझकर शरीर के अंदर बाहरी वस्तुएं डाल रहे थे.
हालांकि चीन के इस मरीज के मामले में डॉक्टरों के सामने एक अलग चुनौती थी. उसके शरीर में मौजूद चीजें सिर्फ त्वचा के नीचे नहीं थीं. कुछ बेहद अंदर तक पहुंच चुकी थीं और उनमें से एक दिल के आसपास मौजूद झिल्ली को नुकसान पहुंचा रही थी.
दिल के पास फंसी पिन बनी सबसे बड़ा खतरा
डॉक्टरों के लिए सबसे जरूरी काम यह तय करना था कि पहले किस चीज को निकाला जाए. शख्स के शरीर में कई धातु की वस्तुएं थीं, लेकिन दिल के पास मौजूद पिन सबसे ज्यादा खतरनाक थी.
उसे निकालने में भी खतरा था, क्योंकि ऑपरेशन के दौरान आसपास के ऊतकों को नुकसान पहुंच सकता था. दूसरी तरफ पिन को शरीर में छोड़ना भी गंभीर परेशानी पैदा कर सकता था.
आखिरकार डॉक्टरों ने सबसे पहले इसी पिन को निकालने का फैसला किया. सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने काले रंग की धातु की एक पूरी सिलाई वाली सुई निकाली. सुई पर जंग भी लगी हुई थी. इससे संकेत मिला कि वह काफी लंबे समय से शरीर के अंदर मौजूद रही होगी.
छाती पर कोई निशान भी नहीं मिला
इस पूरे मामले की एक और बात डॉक्टरों को हैरान करने वाली थी. शख्स के सीने पर ऐसा कोई साफ घाव या निशान नहीं मिला, जिससे यह पता चल सके कि सुई शरीर के अंदर किस रास्ते से पहुंची. यानी सुई दिल के आसपास तक कैसे पहुंची, इसका स्पष्ट जवाब डॉक्टरों को नहीं मिल सका.
सर्जरी के बाद शख्स की हालत में एक और परेशानी सामने आई. सुई की वजह से उसके दिल को पहले ही नुकसान पहुंच चुका था. इसके अलावा ऑपरेशन का तनाव भी शरीर पर पड़ा. इसके चलते उसकी हार्ट फंक्शन यानी दिल के काम करने की क्षमता काफी गिर गई. हालांकि बाद में उसकी हालत संभल गई.
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सर्जरी के करीब नौ दिन बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई. इसके बाद डॉक्टरों ने लगातार उसकी निगरानी की. नौ महीने बाद हुए फॉलो-अप में भी उसकी हालत स्थिर थी और दिल की कार्यक्षमता वापस बेहतर हो चुकी थी.
बाकी सुइयों को क्यों नहीं निकाला?
अब सवाल था कि शरीर में मौजूद बाकी धातु की चीजों का क्या किया जाए? डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत निकालने का फैसला नहीं किया. दरअसल, शरीर के अंदर मौजूद हर बाहरी चीज को निकालना हमेशा आसान या सुरक्षित नहीं होता. कई बार उसे निकालने के लिए की जाने वाली सर्जरी खुद ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है.
इसी वजह से डॉक्टरों ने बाकी सुइयों को फिलहाल करीबी निगरानी में रखने का फैसला किया. यानी जिस चीज की वजह से यह पूरा मामला सामने आया, वह सिर्फ यूरिन में आया ब्लड नहीं था.
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उस छोटे से लक्षण के पीछे शरीर के अंदर छिपी एक बेहद असामान्य और जटिल मेडिकल स्थिति सामने आई, जहां कई धातु की वस्तुएं शरीर के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद थीं और एक सुई दिल के आसपास तक पहुंच चुकी थी.
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