50 घंटे बर्फ में अकेली रही डॉग, फिर जो हुआ उस पर यकीन नहीं होगा!

अलास्का में बर्फीले जंगल में करीब 50 घंटे अकेले रहने के बाद चार साल की डॉग जिंदा मिल गई. पहाड़ से अचानक भारी बर्फ नीचे आने के बाद दो पर्वतारोही घायल हो गए थे. डॉग को खोजने में एप्पल एयरटैग के सिग्नल ने पायलटों की मदद की.

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यह घटना 10 अक्टूबर को अमेरिका के अलास्का स्थित चुगाच स्टेट पार्क में हुई. (Photos: Facebook/Lauren Joy Padawer) यह घटना 10 अक्टूबर को अमेरिका के अलास्का स्थित चुगाच स्टेट पार्क में हुई. (Photos: Facebook/Lauren Joy Padawer)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 18 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 4:03 PM IST

अलास्का के बर्फीले पहाड़ों पर एक हादसे के बाद दो पर्वतारोहियों और उनकी पालतू डॉग लूलू की कहानी ने लोगों को हैरान कर दिया. पहाड़ से अचानक भारी बर्फ नीचे आ गिरी, जिससे दोनों पर्वतारोही करीब 500 फीट नीचे जा गिरे. दोनों गंभीर रूप से घायल हुए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. लेकिन इस हादसे के बाद उनकी चार साल की डॉग लूलू बर्फीले इलाके में कहीं गायब हो गई.

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500 फीट नीचे जा गिरे पर्वतारोही

यह घटना 10 अक्टूबर को अमेरिका के अलास्का स्थित चुगाच स्टेट पार्क में हुई. दो अनुभवी पर्वतारोही पहाड़ पर चढ़ाई कर रहे थे, तभी अचानक भारी बर्फ नीचे आ गिरी. इसकी चपेट में आने के बाद दोनों करीब 500 फीट नीचे जा गिरे.

दोनों को गंभीर चोटें आईं. एक पर्वतारोही के जबड़े में फ्रैक्चर हुआ और हाथ में भी गंभीर चोट आई, जबकि दूसरे की तीन पसलियां टूट गईं और रीढ़ की हड्डी में भी फ्रैक्चर हुआ.

हादसे के बाद गायब हो गई लूलू

इस पूरे हादसे के बीच सबसे बड़ी चिंता चार साल की पालतू डॉग लूलू को लेकर थी. लूलू बर्फीले पहाड़ों के बीच कहीं गायब हो गई थी.

लूलू की मालकिन लॉरेन पडावर उस समय अपने पिता के 80वें जन्मदिन के लिए विदेश में थीं. हादसे की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने दूर रहकर ही लूलू को खोजने की कोशिश शुरू कर दी.

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उन्होंने बचाव दलों, पर्वतारोहण समूहों और स्थानीय लोगों से संपर्क किया. देखते ही देखते 20 से ज्यादा स्वयंसेवक उसकी तलाश में जुट गए.

एयरटैग से मिली बड़ी मदद

लूलू के गले में एप्पल का एयरटैग लगा हुआ था. हालांकि शुरुआत में एयरटैग से मिली लोकेशन उस जगह से करीब आधा मील दूर दिखाई दे रही थी, जहां बाद में लूलू मिली.

तलाशी के दौरान पायलट अमांडा बार्कर और डेव बेकेट ने आसमान से इलाके की खोज की. उन्हें एक एयरटैग का सिग्नल मिला. इसके बाद लॉरेन ने सैटेलाइट तस्वीरों और नक्शों की मदद से संभावित जगहों को समझने की कोशिश की.

करीब 50 घंटे बाद मिली जिंदा

लूलू करीब 50 घंटे तक बर्फीले जंगल में अकेली रही. इस दौरान उसके पास न खाना था और न ही कोई इंसान उसकी देखभाल करने वाला था.

कई लोगों की लगातार तलाश के बाद आखिरकार लूलू पहाड़ की ढलान पर जिंदा मिल गई. उसे सुरक्षित बाहर निकालकर घर लाया गया.

लूलू को पैर की उंगली और एक दांत में चोट लगी थी, लेकिन उसकी हालत बाकी मामलों में ठीक बताई गई. इतने लंबे समय तक बेहद ठंडे और मुश्किल इलाके में अकेले रहने के बाद उसका जिंदा मिलना लोगों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था.

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लॉरेन ने बताया कि जब उन्हें लूलू के जिंदा मिलने की खबर मिली तो उन्हें यकीन ही नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि यह खबर इतनी अच्छी थी कि उन्हें लगा जैसे यह सच नहीं हो सकती. इसके बाद वह रो पड़ीं.

लूलू की तलाश में जुटे लोगों के लिए भी यह अभियान बेहद थकाने वाला था, लेकिन आखिर में उसकी सुरक्षित वापसी ने सभी की मेहनत को सफल बना दिया.

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