अब तक AI से फोटो बनवाने, वीडियो तैयार करने और कोड लिखने की बात होती थी. लेकिन क्या AI बंदूक का डिजाइन भी तैयार कर सकता है? अमेरिका से आई एक खबर ने इस सवाल को हकीकत के करीब ला दिया है. वहां एक ऐसे AI मॉडल को पेश किया गया है, जो बंदूक के डिजाइन तैयार करने के लिए बनाया गया है. इसे लेकर सबसे बड़ी चिंता यह है कि कहीं AI हथियार बनाने की तकनीकी जानकारी हासिल करना पहले से आसान न कर दे.
अमेरिका में 3D-प्रिंटेड बंदूकों के लिए पहचाने जाने वाले कोडी विल्सन ने GatGPT नाम का AI मॉडल पेश किया है. उनका दावा है कि इस मॉडल ने WASP नाम की एक बंदूक का डिजाइन तैयार किया. यह बंदूक 3D प्रिंटिंग तकनीक से बनाई गई है. विल्सन इसे AI से तैयार बंदूक का पहला उदाहरण बता रहे हैं.
क्या है AI से बनी WASP बंदूक?
WASP एक छोटी, सिंगल-शॉट बंदूक है, यानी इससे एक बार में एक ही गोली चलाई जा सकती है. इसकी चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि इसके डिजाइन में AI की मदद ली गई. GatGPT को आम सवालों के जवाब देने वाले चैटबॉट की तरह नहीं, बल्कि बंदूकों से जुड़ी जानकारी और डिजाइन पर काम करने वाले मॉडल के तौर पर पेश किया गया है.
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The Verge की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मॉडल बंदूकों के डिजिटल डिजाइन के बड़े संग्रह पर ट्रेन्ड है. विल्सन की टीम ने इससे एक नया डिजाइन तैयार करने को कहा था. इसके बाद AI ने एक प्रोपोजल दिया, जिस पर इंसानी टीम ने काम आगे बढ़ाया. यानी यह कोई ऐसी बंदूक नहीं थी जिसे AI ने अपने आप, बिना किसी इंसानी निर्देश के बना दिया. इसके पीछे इंसान का निर्देश, मौजूदा डिजाइन और तकनीकी जांच शामिल थी.
यही वजह है कि इस घटना को सिर्फ एक नई बंदूक के तौर पर नहीं, बल्कि AI के इस्तेमाल में एक नए मोड़ के रूप में देखा जा रहा है. अब तक जनरेटिव AI का इस्तेमाल तस्वीरें, लेख, वीडियो और सॉफ्टवेयर बनाने में तेजी लाने के लिए होता रहा है. लेकिन जब यही तकनीक हथियारों के डिजाइन में इस्तेमाल होती है, तो इसका असर सीधे लोगों की सुरक्षा पर पड़ सकता है.
क्या यह बंदूक पूरी तरह सफल रही?
इस कहानी का दूसरा पहलू भी उतना ही जरूरी है. The Verge की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान WASP से तीन बार गोली चलाने की कोशिश की गई. इनमें से दो बार गोली चली, जबकि पहली कोशिश में बंदूक काम नहीं कर पाई. एक्सपर्ट्स ने इसके डिजाइन में कई कमियां भी बताईं.
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इसका मतलब है कि AI ने डिजाइन तैयार जरूर किया, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि वह इंसानों से बेहतर या पूरी तरह भरोसेमंद हथियार बना सकता है. अभी यह एक शुरुआती प्रयोग है. इसकी सफलता, सुरक्षा और लंबे समय तक काम करने की क्षमता को लेकर कई सवाल बाकी हैं.
AI से बंदूक बनाना आसान हुआ तो क्या होगा?
इस खबर पर चिंता की सबसे बड़ी वजह यही है. पारंपरिक तरीके से हथियार बनाने के लिए तकनीकी जानकारी और कई तरह के संसाधनों की जरूरत होती है. लेकिन अगर AI किसी व्यक्ति को डिजाइन से जुड़ी जानकारी आसानी से उपलब्ध कराने लगे, तो हथियार बनाने की प्रक्रिया में आने वाली कुछ रुकावटें कम हो सकती हैं.
हथियार सुरक्षा से जुड़े संगठन Everytown ने The Verge से बातचीत में चिंता जताई कि ऐसे मॉडल उन लोगों के लिए भी हथियार बनाने का रास्ता आसान कर सकते हैं, जिनके पास जरूरी तकनीकी जानकारी नहीं है या जो कानूनी रूप से हथियार रखने के योग्य नहीं हैं.
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क्या 3D-प्रिंटेड बंदूक को पकड़ना मुश्किल होता है?
इस मामले में एक और शब्द चर्चा में है, जिसे Ghost Gun कहा जाता है. आम तौर पर यह उन बंदूकों के लिए इस्तेमाल होता है जिन्हें घर पर बनाया या अलग-अलग हिस्सों से जोड़ा जाता है और जिन पर नियमित रूप से बने हथियारों की तरह सीरियल नंबर नहीं होता. इससे उनकी पहचान और ट्रैकिंग मुश्किल हो सकती है.
हालांकि, हर 3D-प्रिंटेड वस्तु बंदूक नहीं होती और न ही हर घर में बना हथियार अपने आप गैरकानूनी होता है. कानून देश और राज्य के हिसाब से अलग हो सकते हैं. लेकिन जब ऐसे हथियार बिना पहचान के बनाए जा सकते हैं, तो कानून लागू करने वाली एजेंसियों के लिए यह पता लगाना कठिन हो सकता है कि हथियार किसने बनाया या उसका इस्तेमाल किसने किया.
आजतक टेक्नोलॉजी डेस्क