भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) की चयन समिति में बदलाव को लेकर सस्पेंस गहरा गया है. पूर्व चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर की विदाई के बाद अब उनके संभावित उत्तराधिकारी पार्थिव पटेल ने भी इस दौड़ से खुद को अलग कर लिया है. पार्थिव को अगरकर की जगह लेने का प्रबल दावेदार माना जा रहा था, लेकिन उन्होंने वेस्ट जोन के चयनकर्ता पद के लिए आवेदन ही नहीं किया.
ऐसे में बीसीसीआई के सामने अब नए चीफ सेलेक्टर को चुनने या मौजूदा व्यवस्था को जारी रखने का विकल्प है. अगले साल होने वाले क्रिकेट वर्ल्ड कप को देखते हुए यह फैसला बेहद अहम है. बोर्ड ऐसी चयन समिति चाहता है, जो टीम की जरूरतों के हिसाब से स्पष्ट योजना के साथ काम करे और बड़े टूर्नामेंट तक चयन प्रक्रिया में निरंतरता बनाए रखे.
फिलहाल प्रज्ञान संभाल रहे जिम्मेदारी
पार्थिव पटेल के पीछे हटने के बाद वीवीएस लक्ष्मण की भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. लक्ष्मण फिलहाल बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) के प्रमुख हैं, जबकि प्रज्ञान ओझा अंतरिम तौर पर चयन समिति की अध्यक्षता कर रहे हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या बोर्ड इसी व्यवस्था को जारी रखेगा.
TOI की रिपोर्ट के मुताबिक बीसीसीआई चाहता था कि अजीत अगरकर क्रिकेट वर्ल्ड कप 2027 तक चीफ सेलेक्टर बने रहें, ताकि टीम सेलेक्शन में निरंतरता बनी रहे. लेकिन ऐसा नहीं हो सका. बोर्ड से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि नए चीफ सेलेक्टर की सोच और योजनाएं मौजूदा व्यवस्था से अलग हो सकती हैं. इसलिए किसी भी नियुक्ति से पहले उनके दृष्टिकोण को समझना जरूरी होगा. सूत्रों के मुताबिक, वीवीएस लक्ष्मण की बढ़ती भूमिका को देखते हुए बोर्ड फिलहाल मौजूदा व्यवस्था को बनाए रखने पर भी विचार कर सकता है. हालांकि, इस संबंध में अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है.
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सेलेक्शन पैनल में अनुभवी पूर्व क्रिकेटरों को शामिल करने के लिए बीसीसीआई अपनी वेतन नीति में भी लचीलापन दिखा रहा है. बोर्ड ऐसे नामों को प्राथमिकता देना चाहता है, जिनके पास इंटरनेशनल क्रिकेट का लंबा अनुभव हो. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल सितंबर में आरपी सिंह और प्रज्ञान ओझा के चयन समिति में शामिल होने के बाद चयन समितियों पर बोर्ड का खर्च तय बजट से 3 करोड़ रुपये अधिक होकर 17.45 करोड़ रुपये पहुंच गया. इसके बावजूद वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इस मद में 19.35 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है.
इस तरह चयन समितियों के लिए बजट में करीब पांच करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बीसीसीआई ने लगभग 100 टेस्ट मैच खेलने वाले कुछ पूर्व क्रिकेटरों से संपर्क किया था, लेकिन उन्होंने प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया. हाल की नियुक्तियों के दौरान उम्मीदवारों ने वेतन को लेकर बातचीत भी की थी.
बीसीसीआई को चयनकर्ता शिव सुंदर दास के भविष्य पर भी फैसला लेना है. दिसंबर में वह इस पद पर अपने चार साल पूरे कर लेंगे. ऐसे में बोर्ड को तय करना होगा कि उनका कार्यकाल आगे बढ़ाया जाए या किसी नए चेहरे को मौका दिया जाए. सूत्रों के मुताबिक, दास को वनडे विश्व कप तक जिम्मेदारी पर बनाए रखने की संभावना है. हालांकि, इस पर भी अंतिम निर्णय होना बाकी है.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क