प्रचंड चक्रवाती तूफान अर्नब आंध्र प्रदेश के तट पर लैंडफॉल कर चुका है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार 28 अक्टूबर 2026 की सुबह यह पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में आंध्र तट के पास लगभग स्थिर रहा. इसका केंद्र नरसपुर से 30 किलोमीटर पूर्व, यनम से 45 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम और काकीनाडा से 70 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में था.
अब यह उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए बापटला और विशाखापत्तनम के बीच तट पार करेगा. हवा की गति 115-125 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी, जो झोंकों में 140 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है. लैंडफॉल पूरा होने के बाद अर्नब भूमि पर प्रवेश कर कमजोर पड़ना शुरू करेगा.
IMD के मैप के अनुसार यह उत्तर-पश्चिम से उत्तर दिशा की ओर बढ़ेगा. पहले यह आंध्र प्रदेश के तटीय और आंतरिक जिलों से गुजरेगा, फिर तेलंगाना और छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ेगा. इसके बाद मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों से गुजरते हुए उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ जाएगा. रास्ते में ये कमजोर होता जाएगा. प्रचंड चक्रवाती तूफान से गंभीर चक्रवाती तूफान, फिर चक्रवाती तूफान, डीप डिप्रेशन और अंत में डिप्रेशन या लो प्रेशर एरिया में बदल जाएगा.
लखनऊ-गोरखपुर कनेक्शन
ट्रैक मैप में साफ दिख रहा है कि तूफान का अवशेष उत्तर प्रदेश तक पहुंच सकता है. यह लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज और गोरखपुर जैसे क्षेत्रों के आसपास कमजोर होकर समाप्त हो सकता है. 30 अक्टूबर के आसपास यह 27-30 kmph की गति वाला सुचिह्नित निम्न दबाव क्षेत्र बनकर यूपी के पूर्वी या मध्य हिस्सों में विलीन हो सकता है.
इसी वजह से पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है. गोरखपुर, देवरिया, बस्ती, कुशीनगर समेत आसपास के जिलों में असर पड़ने की आशंका है. चक्रवात आमतौर पर लैंडफॉल के बाद जमीनी सूखी हवाओं से रगड़ के कारण कमजोर हो जाते हैं.
अर्नब का उत्तर-पश्चिम रुख मौसमी हवाओं और दबाव प्रणालियों के कारण है. बंगाल की खाड़ी से उठने वाले कई चक्रवात इसी तरह मध्य भारत से होते हुए उत्तर की ओर बढ़ते हैं. इससे आंध्र, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश होती है.
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संभावित प्रभाव और सावधानियां
लैंडफॉल क्षेत्र में तटीय इलाकों में अभी भी तेज हवाएं और लहरें रहेंगी. आंतरिक क्षेत्रों में भारी बारिश से नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है. उत्तर प्रदेश में 28 से 30 अक्टूबर तक गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है. किसानों को फसल सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए. प्रशासन को निचले इलाकों में सतर्क रहना होगा.
यह ट्रैक आईएमडी के पूर्वानुमान और उपग्रह चित्रों पर आधारित है. स्थिति बदल सकती है, इसलिए आधिकारिक अपडेट देखते रहें. अर्नब का सफर आंध्र तट से शुरू होकर उत्तर भारत के मैदानों में समाप्त होने वाला है, जहां यह बारिश का रूप ले लेगा.
ऋचीक मिश्रा