लखनऊ का सआदतगंज इलाका सोमवार को गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल उठा. यहां एक पूर्व मर्चेंट नेवी ऑफिसर ऋषभ शुक्ला ने खूनी खेल खेलते हुए तीन लोगों को गोलियों से भूनकर मौत के घाट उतार दिया था. वारदात जितनी खौफनाक थी, हत्याकांड के बाद का मंजर उससे कहीं ज्यादा रूह कंपा देने वाला था. तीन कत्ल करने के बाद आरोपी भागा नहीं, बल्कि एक हाथ में पिस्टल और दूसरे हाथ में मैगजीन थामकर अपने घर के बाहर कुर्सी लगाकर बैठ गया.
वहीं, सड़क पर लहूलुहान हालत में तीनों लोग तड़प रहे थे, लेकिन किसी की हिम्मत नहीं हुई कि उनके पास जा सके. सिरफिरे ऋषभ ने खुलेआम धमकी दी कि जो भी घायलों की मदद के लिए आगे आएगा, अगली गोली उसके सीने में उतारी जाएगी. आरोपी के इस खूंखार अंदाज से पूरे मोहल्ले में ऐसी दहशत फैली कि लोग अपने घरों में दुबकने को मजबूर हो गए.
इस सनसनीखेज वारदात के बाद पुलिस के आला अधिकारियों से लेकर आम लोगों तक, हर किसी के जहन में एक ही सवाल था कि आखिर एक शख्स अकेले इतनी फुर्ती और सटीक निशाने के साथ तीन लोगों का कत्ल कैसे कर सकता है?
पुलिस की शुरुआती तफ्तीश में जब ऋषभ की कुंडली खंगाली गई, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ. दरअसल, बेखौफ होकर गोलियां बरसाने वाला ऋषभ शुक्ला कोई आम अपराधी नहीं, बल्कि शूटिंग का गोल्ड मेडलिस्ट रह चुका है. उसकी यही प्रोफेशनल ट्रेनिंग और हथियारों की गहरी समझ इस ट्रिपल मर्डर की सबसे बड़ी वजह बनी.
ऋषभ शुक्ला को असल जिंदगी में फिल्मी डॉन की तरह रंगबाजी करने का शौक था. उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स इस बात की गवाही दे रहे हैं. इंस्टाग्राम पर ऋषभ के 34.5 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं, जबकि वह खुद महज 69 लोगों को फॉलो करता है. उसने अपने अकाउंट पर अलग-अलग अत्याधुनिक बंदूकों और हथियारों के साथ दर्जनों तस्वीरें पोस्ट कर रखी हैं, जो उसके गन कल्चर के प्रति दीवानगी को साफ दर्शाती हैं.
हथियारों के अलावा ऋषभ को खतरनाक सांपों और कुत्तों को पालने का भी शौक था. उसकी प्रोफाइल पर सांपों और डॉग्स के साथ कई तस्वीरें और वीडियो मौजूद हैं. शराब, सिगरेट और लेट नाइट पार्टियों का शौकीन ऋषभ सोशल मीडिया पर पूरी तरह से एक रसूखदार और दबंग लाइफस्टाइल का प्रदर्शन करता था. फिलहाल, इस शूटर की रंगबाजी ने तीन जिंदगियां लील ली है.
वारदात के बाद से ही मृतकों के परिजनों में भारी आक्रोश था और वे आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर अंतिम संस्कार के लिए तैयार नहीं हो रहे थे. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए डिप्टी सीएम खुद पीड़ित परिवार के बीच पहुंचे. उनके ठोस आश्वासन और बुलडोजर कार्रवाई के ऐलान के बाद आखिरकार परिजनों का गुस्सा शांत हुआ और वे तीनों शवों के अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए.

इस दुख की घड़ी में डिप्टी सीएम ने न सिर्फ पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया, बल्कि खुद आगे बढ़कर मृतकों की अर्थी को कंधा भी दिया. इतना ही नहीं, वे श्मशान घाट तक गए और वहां चिता पर लकड़ी रखकर नम आंखों से मृतकों को अंतिम विदाई दी.