पेड़ खड़े हैं, लेकिन जंगल मर रहे हैं! अमेरिका में क्यों बढ़ रहे 'घोस्ट फॉरेस्ट'?

समुद्र से दूर मीठे पानी की झीलों के पास भी पेड़ तेजी से मर रहे हैं. अमेरिका में सामने आए इस बदलाव ने वैज्ञानिकों का ध्यान खींचा है. आखिर बढ़ता पानी कैसे हरे-भरे जंगलों को मृत पेड़ों के जंगल में बदल रहा है?

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पाइन ट्री के जड़ का पूरा जाल अब सामने आ चुका है, पेड़ गायब है. (Photo: Getty) पाइन ट्री के जड़ का पूरा जाल अब सामने आ चुका है, पेड़ गायब है. (Photo: Getty)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 13 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 6:35 PM IST

अमेरिका में अब समुद्र से दूर मीठे पानी की झीलों के पास भी बड़ी संख्या में पेड़ मर रहे हैं. पेड़ों के मरने के बाद भी उनके तने खड़े रहते हैं. ऐसे जंगलों को 'घोस्ट फॉरेस्ट' यानी भूतिया जंगल कहा जाता है. एक नए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने अमेरिका के अलग-अलग इलाकों की तस्वीरों का अध्ययन किया. 

इसमें 26 करोड़ से ज्यादा मृत पेड़ों की पहचान की गई. इन इलाकों में समुद्र के किनारे के जंगलों के साथ बड़ी झीलों और अंदरूनी इलाकों के जंगल भी शामिल हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक, जमीन में लंबे समय तक पानी भरा रहना और पानी का स्तर बढ़ना पेड़ों के मरने की वजह हो सकता है.

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अब तक घोस्ट फॉरेस्ट बनने की समस्या को मुख्य रूप से समुद्र के बढ़ते पानी और मिट्टी में नमक बढ़ने से जोड़ा जाता था. लेकिन नए अध्ययन से पता चला है कि मीठे पानी की झीलों के पास भी पेड़ बड़ी संख्या में मर रहे हैं. इससे जंगलों और वहां रहने वाले जीवों पर असर पड़ सकता है.

क्या होते हैं घोस्ट फॉरेस्ट?

घोस्ट फॉरेस्ट ऐसे जंगल होते हैं, जहां बड़ी संख्या में पेड़ मर जाते हैं, लेकिन उनके तने खड़े रहते हैं. धीरे-धीरे इन पेड़ों की पत्तियां और शाखाएं खत्म हो जाती हैं. इसके बाद जंगल में सूखे और बेजान पेड़ दिखाई देते हैं. अमेरिका में समुद्र के किनारे ऐसे जंगल पहले भी देखे गए हैं. समुद्र का पानी जमीन में पहुंचने से मिट्टी में नमक बढ़ जाता है. इससे पेड़ों की जड़ों को नुकसान पहुंचता है. लेकिन अब मीठे पानी की झीलों और अंदरूनी इलाकों में भी ऐसे जंगल दिखाई दे रहे हैं.

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26 करोड़ से ज्यादा मृत पेड़ों की पहचान

रिसर्चर्स ने 2012 से 2023 के बीच ली गई हवाई तस्वीरों का अध्ययन किया. इन तस्वीरों की मदद से अमेरिका के अलग-अलग इलाकों में पेड़ों की हालत देखी गई. इसमें समुद्र के किनारे के जंगलों के साथ ग्रेट लेक्स के आसपास के जंगल भी शामिल थे. ग्रेट लेक्स अमेरिका और कनाडा के बीच मौजूद पांच बड़ी झीलों का समूह है.

अध्ययन में 26 करोड़ से ज्यादा मृत पेड़ों की पहचान की गई. इनमें से आधे से ज्यादा मृत पेड़ अध्ययन में शामिल जंगलों के करीब 10 फीसदी हिस्से में पाए गए. इसका मतलब है कि कुछ इलाकों में पेड़ों के मरने की समस्या ज्यादा गंभीर है. अध्ययन के मुताबिक, समुद्र के पास उन जंगलों में पेड़ों के मरने की दर तीन गुना तक बढ़ी, जहां जमीन में पानी भरने और मिट्टी में नमक बढ़ने का असर एक साथ था. वहीं, मीठे पानी की झीलों और अंदरूनी गीले इलाकों में पेड़ों के मरने की दर दोगुनी पाई गई.

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पानी बढ़ने से क्यों मरते हैं पेड़?

पेड़ों की जड़ों को जिंदा रहने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत होती है. जब जमीन में लंबे समय तक पानी भरा रहता है, तो जड़ों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती. इससे पेड़ कमजोर होने लगते हैं. उनकी मौत हो सकती है. अमेरिका की ग्रेट लेक्स में 2013 से 2020 के बीच पानी का स्तर बढ़ा था. ज्यादा बारिश और जमीन से बहकर आने वाले पानी की वजह से ऐसा हुआ.

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इससे झीलों के आसपास की जमीन लंबे समय तक गीली रह सकती है. हालांकि, पेड़ों के मरने की वजह हर जगह एक जैसी नहीं होती. बाढ़, सूखा, कीड़े और मिट्टी की बनावट भी पेड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसलिए यह जरूरी है कि हर इलाके में पेड़ों की मौत की वजह अलग से समझी जाए.

जंगल खत्म होने से पर्यावरण पर क्या असर?

पेड़ हवा से कार्बन डाइऑक्साइड लेते हैं. अपने तने, जड़ों और शाखाओं में कार्बन जमा करते हैं. जब पेड़ मर जाते हैं, तो उनके सड़ने से कार्बन वापस हवा में जा सकता है. इससे वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़ने का खतरा रहता है. जंगलों में पेड़ों की संख्या घटने से वहां रहने वाले पक्षियों और दूसरे जीवों को भी नुकसान हो सकता है. उन्हें भोजन और रहने की जगह कम मिल सकती है.

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यूएस जियोलॉजिकल सर्वे के रिसर्च में भी बताया गया है कि जमीन में पानी भरने और मिट्टी में नमक बढ़ने से जंगलों को नुकसान पहुंच सकता है. नए अध्ययन से पता चलता है कि यह समस्या सिर्फ समुद्र के किनारे तक सीमित नहीं है. मीठे पानी की झीलों के आसपास भी पेड़ों की मौत पर नजर रखना जरूरी है. वैज्ञानिकों को अब यह समझना होगा कि इन जंगलों में पेड़ क्यों मर रहे हैं और इसका पर्यावरण पर कितना असर पड़ सकता है.

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