सेशेल्स के अल्डाब्रा एटोल पर करीब 1.83 लाख विशाल कछुए रहते हैं. जबकि, पूरे सेशेल्स में सिर्फ 1.35 लाख इंसान रहते हैं. वैज्ञानिकों के एक नए सर्वे में यह बात सामने आई है. दुनिया में खुले प्राकृतिक माहौल में रहने वाले विशाल कछुओं की सबसे बड़ी आबादी है. खास बात यह है कि 19वीं सदी में शिकार की वजह से इनकी संख्या घटकर 1,000 से भी कम रह गई थी. लेकिन लंबे समय तक इनकी सुरक्षा के लिए किए गए कामों से इनकी आबादी अब काफी बेहतर हो गई है.
यह सर्वे सेशेल्स आइलैंड्स फाउंडेशन (SIF) और यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर के वैज्ञानिकों ने मिलकर किया. इसके लिए 2018 से 2022 के बीच जुटाए गए आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया. वैज्ञानिकों ने उन कछुओं का भी अनुमान लगाया जो घनी झाड़ियों और पेड़ों के बीच छिपे होने के कारण दिखाई नहीं दिए. इस स्टडी के नतीजे Ecology and Evolution जर्नल में प्रकाशित हुए हैं.
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अल्डाब्रा एटोल पर कछुओं की आबादी का पिछला बड़ा अनुमान 1990 के दशक के आखिर में लगाया गया था. उस समय यहां करीब 1 लाख कछुए होने की बात कही गई थी. नई स्टडी के मुताबिक, यहां वयस्क और लगभग वयस्क कछुओं की संख्या करीब 1.83 लाख है.
इसका मतलब यह नहीं है कि 1999 के बाद कछुओं की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है. वैज्ञानिकों का कहना है कि पुराने सर्वे में कई कछुए गिनती में शामिल नहीं हो पाए होंगे. घनी झाड़ियों और पेड़ों के बीच छिपे कछुओं को देखना मुश्किल था. इस बार वैज्ञानिकों ने ऐसे कछुओं की संख्या का भी अनुमान लगाया जो दिखाई नहीं दिए.
कैसे बचाई गई कछुओं की यह प्रजाति?
19वीं सदी में बड़े पैमाने पर शिकार होने के कारण अल्डाब्रा के विशाल कछुओं की संख्या बहुत कम हो गई थी. उस समय इनकी आबादी 1,000 से भी नीचे पहुंच गई थी. इसके बाद इनकी सुरक्षा के लिए कदम उठाए गए. अल्डाब्रा को 1981 में एक सुरक्षित प्राकृतिक क्षेत्र बनाया गया था. इसके बाद 1982 में इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया. लंबे समय तक सुरक्षा और निगरानी से इन कछुओं को बचाने में मदद मिली.
सेशेल्स आइलैंड्स फाउंडेशन की सीईओ फ्राउके फ्लाइशर-डोगले के मुताबिक, अल्डाब्रा में 1.80 लाख से ज्यादा विशाल कछुओं का खुले में रहना लंबे समय से किए जा रहे संरक्षण के काम का नतीजा है. नई स्टडी में यह भी सामने आया कि 2018 से 2022 के दौरान इनकी आबादी में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ.
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घास वाले इलाकों में ज्यादा मिलते हैं कछुए
सर्वे में वैज्ञानिकों ने पाया कि अल्डाब्रा के घास वाले इलाकों में सबसे ज्यादा विशाल कछुए रहते हैं. इन जगहों को 'टॉरटॉइज टर्फ' कहा जाता है. खुले और कम झाड़ियों वाले इलाकों में भी कछुओं की संख्या ज्यादा है. वहीं, घनी झाड़ियों, मैंग्रोव और पेम्फिस नाम के पौधों वाले इलाकों में कछुओं को देखना मुश्किल होता है.
इसलिए वैज्ञानिकों ने गिनती करते समय इस बात का भी ध्यान रखा कि अलग-अलग जगहों पर कछुओं का दिखाई देना कितना आसान या मुश्किल है. इससे उनकी कुल आबादी का बेहतर अनुमान लगाने में मदद मिली.
जलवायु परिवर्तन और चूहे अब भी खतरा
कछुओं की आबादी स्थिर होने के बावजूद इनके सामने कुछ खतरे अब भी मौजूद हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले समय में सूखा ज्यादा लंबा हो सकता है और बार-बार पड़ सकता है. इससे कछुओं के लिए भोजन और छाया की कमी हो सकती है. समुद्र का जलस्तर बढ़ने से द्वीप के निचले इलाकों को भी खतरा है.
इसके अलावा, जंगली बिल्लियां और काले चूहे कछुओं के अंडों और छोटे बच्चों को नुकसान पहुंचाते हैं. पहले जंगली बकरियां भी यहां के पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचाती थीं, लेकिन 2012 में उन्हें हटा दिया गया था. वैज्ञानिकों का मानना है कि जंगली बिल्लियों और चूहों को भी हटाने से कछुओं की सुरक्षा और बेहतर हो सकती है.
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वैज्ञानिकों के मुताबिक, करीब 1.83 लाख कछुओं की आबादी का अनुमान भविष्य में उनकी संख्या पर नजर रखने में मदद करेगा. इससे पता लगाया जा सकेगा कि जलवायु परिवर्तन, सूखे और दूसरे खतरों का इन पर क्या असर पड़ रहा है. वैज्ञानिकों का कहना है कि कछुओं की गिनती आगे भी जारी रखना जरूरी है, ताकि उनकी आबादी में होने वाले बदलावों का समय रहते पता लगाया जा सके और उनकी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकें.
आजतक साइंस डेस्क