सऊदी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि राज्य इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी का सामना कर रहा है. हूती विद्रोहियों के हमले तेज होने के साथ यह समस्या और गंभीर हो गई है. किंग खालिद एयरपोर्ट पर हुए घातक हमले में 13 लोगों की मौत हो गई. 300 से ज्यादा घायल हुए. हूतियों ने और हमलों का वादा किया है. इस स्थिति ने सऊदी की एयर डिफेंस सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर शनिवार का हमला पिछले एक दशक में सऊदी में सबसे घातक हमलों में से एक था. इसके बाद हूतियों ने और हमलों की धमकी दी. टाइम्स ऑफ इजरायल के मुताबिक सऊदी बलों ने अब एयर डिफेंस बैटरियों को देश भर में स्थानांतरित करना शुरू कर दिया है.
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ये बैटरियां प्रमुख तेल सुविधाओं, एयरपोर्ट्स और यहां तक कि शाही महलों की सुरक्षा के लिए लगाई जा रही हैं. क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान खुद सुरक्षा सावधानी के तौर पर भारी सुरक्षा वाले बंकर युक्त महलों के बीच लगातार ट्रांसफर हो रहे हैं यानी उनकी लोकेशन लगातार बदली जा रही है. चुनिंदा कर्मियों के साथ रह रहे हैं.
एयर डिफेंस सिस्टम की सीमाएं
सऊदी अरब के पास एडवांस पैट्रियट और थाड सिस्टम हैं. फिर भी विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इतने विशाल देश की बार-बार मिसाइल और ड्रोन हमलों से रक्षा करना बेहद मुश्किल होगा. देश का क्षेत्रफल बहुत बड़ा है. हर जगह समान सुरक्षा मुहैया कराना संभव नहीं. बार-बार हमलों से इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्टॉक तेजी से घट रहा है. इससे सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है.
हूती हमले यमन में चल रहे लंबे संघर्ष का हिस्सा हैं. सऊदी अरब यमन सरकार का समर्थन करता है जबकि हूती समूह ईरान से जुड़े माने जाते हैं. इन हमलों ने न केवल सैन्य बल्कि आर्थिक और राजनीतिक स्तर पर भी असर डाला है. एयरपोर्ट बंद होने से उड़ानें प्रभावित हुईं और आम जनजीवन में व्यवधान आया. तेल सुविधाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना देश की अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है क्योंकि तेल राजस्व मुख्य स्रोत है.
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सऊदी अरब अब प्राथमिकता के आधार पर महत्वपूर्ण स्थानों की सुरक्षा बढ़ा रहा है. सहयोगी देशों से मदद की मांग भी की जा रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक सिस्टम के बावजूद असमान और बार-बार होने वाले हमलों का मुकाबला करना चुनौतीपूर्ण है. कूटनीतिक प्रयास और मजबूत बचाव व्यवस्था दोनों जरूरी हैं. लंबे संघर्ष से क्षेत्रीय तनाव बढ़ रहा है.
इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी और बढ़ते हमलों ने सऊदी अरब की सुरक्षा चुनौतियों को उजागर किया है. विशाल भूभाग और लगातार खतरों के बीच प्रभावी रक्षा बनाए रखना मुश्किल साबित हो रहा है. आने वाले दिनों में स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा क्योंकि यह क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकती है.
ऋचीक मिश्रा