दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पिछले 48 घंटों में ज्वालामुखियों की हलचल बढ़ी है. मैक्सिको, कोलंबिया, इटली, जापान, ग्वाटेमाला और इंडोनेशिया में ज्वालामुखियों से राख निकलने, विस्फोट होने और लावा बहने की खबरें आई हैं. कुछ जगहों पर ज्वालामुखियों से निकलने वाली गर्म गैस और दूसरे पदार्थ भी बाहर आए हैं. कई जगहों पर इनकी गतिविधि पर लगातार नजर रखी जा रही है.
कम समय में छह देशों से ऐसी खबरें आने के बाद लोगों के बीच सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एक साथ इतने ज्वालामुखी क्यों सक्रिय हो रहे हैं. लेकिन जानकारों के मुताबिक इन सभी घटनाओं को एक-दूसरे से जोड़ना सही नहीं होगा. हर ज्वालामुखी की अपनी अलग स्थिति होती है. धरती के नीचे मौजूद गर्म पिघली चट्टान यानी मैग्मा और गैसों की हलचल से ज्वालामुखी सक्रिय होते हैं.
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मैक्सिको से इटली तक ज्वालामुखी एक्टिव
मैक्सिको में पोपोकाटेपेटल जैसे ज्वालामुखियों पर लगातार नजर रखी जाती है. यहां से समय-समय पर राख और गैस निकलती रहती है. इटली में एटना और स्ट्रॉम्बोली भी सक्रिय ज्वालामुखियों में शामिल हैं. हाल की रिपोर्टों में एटना में तेज गतिविधि और स्ट्रॉम्बोली में लावा निकलने की जानकारी सामने आई है.
जापान और इंडोनेशिया में भी कई सक्रिय ज्वालामुखी हैं. जापान का सकुराजिमा अक्सर गतिविधि दिखाता है. इंडोनेशिया में भी कई ज्वालामुखी समय-समय पर राख और लावा छोड़ते हैं. स्मिथसोनियन के ग्लोबल वोलकैनिस्म प्रोग्राम के मुताबिक दुनिया में किसी भी समय 40 से 50 ज्वालामुखी सक्रिय रह सकते हैं.
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ग्वाटेमाला के फुएगो पर भी नजर
ग्वाटेमाला का फुएगो ज्वालामुखी भी हाल में सक्रिय रहा है. इससे राख और लावा निकलने की जानकारी सामने आई है. फुएगो मध्य अमेरिका के सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है. इसकी गतिविधि पर स्थानीय एजेंसियां लगातार नजर रखती हैं.
कोलंबिया में भी कई सक्रिय ज्वालामुखी हैं. यहां वैज्ञानिक ज्वालामुखियों से निकलने वाली गैस, राख और जमीन के अंदर होने वाली हलचल को देखते हैं. इससे यह पता लगाने में मदद मिलती है कि ज्वालामुखी की गतिविधि बढ़ रही है या कम हो रही है.
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क्या यह किसी बड़े खतरे का संकेत है?
छह देशों में ज्वालामुखियों की गतिविधि एक साथ दिखना जरूर बड़ी खबर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दुनिया में कोई एक बड़ी ज्वालामुखी घटना होने वाली है. दुनिया में कई ज्वालामुखी पहले से ही सक्रिय रहते हैं. स्मिथसोनियन के आंकड़ों के मुताबिक 2025 में दुनिया के 63 ज्वालामुखियों में 71 विस्फोट दर्ज किए गए थे.
फिलहाल वैज्ञानिक हर ज्वालामुखी को अलग-अलग देख रहे हैं. राख कितनी दूर तक जा रही है. लावा कितना निकल रहा है. जमीन के अंदर कितनी हलचल हो रही है, इन सभी चीजों पर नजर रखी जाती है. अगर किसी इलाके में खतरा बढ़ता है तो स्थानीय प्रशासन लोगों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाता है.
आजतक साइंस डेस्क