किर्गिस्तान की सबसे बड़ी झील के नीचे करीब 800 साल पुराने एक शहर के निशान मिले हैं. वैज्ञानिकों और गोताखोरों की एक टीम इस शहर की जांच कर रही है. यह शहर किर्गिस्तान की इस्सिक-कुल झील में तोरू-आयगिर इलाके के पास मिला है.
वैज्ञानिक यह पता लगाना चाहते हैं कि इस शहर में रहने वाले लोग कैसे रहते थे, उनका खानपान कैसा था और यह शहर पानी के नीचे कैसे पहुंचा. माना जा रहा है कि यह शहर सिल्क रोड के पुराने व्यापारिक रास्तों से जुड़ा था. इस खोज से मध्य एशिया के पुराने इतिहास के बारे में नई जानकारी मिल सकती है.
खोज के दौरान वैज्ञानिकों को मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े, जानवरों की हड्डियां, पुरानी कब्रों और इमारतों के निशान मिले हैं. इन चीजों की जांच से पता चल सकता है कि उस समय लोग कैसे रहते थे और उनके बीच किस तरह का व्यापार होता था.
इस शहर के बारे में 19वीं सदी से जानकारी थी, लेकिन अब वैज्ञानिक इसकी ठीक से जांच कर रहे हैं. इसके लिए वैज्ञानिकों और गोताखोरों की टीम झील के अंदर जाकर पुराने अवशेषों को देख रही है. यह जगह पानी की सतह से करीब 1 से 4 मीटर नीचे है. यहां खोज का काम 2024 में शुरू हुआ था.
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वैज्ञानिक इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि शहर कितना बड़ा था और यहां कौन-कौन सी इमारतें मौजूद थीं. इसके लिए झील के नीचे मिली पुरानी चीजों और इमारतों के निशानों की जांच की जा रही है.
सिल्क रोड से क्या था इस शहर का कनेक्शन?
सिल्क रोड पुराने समय के व्यापारिक रास्तों का एक नेटवर्क था. इसके जरिए चीन से यूरोप तक सामान पहुंचाया जाता था. इन रास्तों से रेशम और दूसरी चीजों का व्यापार होता था. साथ ही, अलग-अलग जगहों के लोग एक-दूसरे की संस्कृति, धर्म और विचारों के बारे में भी जानते थे.
किर्गिस्तान का इलाका भी इन व्यापारिक रास्तों से जुड़ा था. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि झील के नीचे मिले शहर के निशानों से पता चल सकेगा कि उस समय यहां व्यापार कैसे होता था और लोगों की जिंदगी कैसी थी.
बर्तन और हड्डियों से क्या पता चलेगा?
वैज्ञानिकों को झील के नीचे मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े और जानवरों की हड्डियां मिली हैं. इनकी जांच से पता चल सकता है कि उस समय लोग क्या खाते थे और बर्तनों का इस्तेमाल कैसे करते थे. बर्तनों की बनावट से उनकी उम्र का अंदाजा लगाने में भी मदद मिल सकती है.
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यहां दो पुरानी कब्रगाहों और एक बड़ी इमारत के निशान भी मिले हैं. वैज्ञानिक अभी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह इमारत मस्जिद थी, नहाने के लिए बनाया गया सार्वजनिक स्नानघर था या पढ़ाई कराने की जगह थी. इसकी जांच से उस समय के लोगों की जिंदगी और उनके धर्म के बारे में जानकारी मिल सकती है.
वैज्ञानिक अभी यह नहीं बता पाए हैं कि यह शहर पानी के नीचे कैसे पहुंचा. एक संभावना यह है कि भूकंप या जमीन में बदलाव के कारण ऐसा हुआ हो. इस इलाके में भूकंप आते रहे हैं, इसलिए वैज्ञानिक इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि क्या किसी प्राकृतिक घटना के कारण शहर डूबा था.
हालांकि, शहर के डूबने की असली वजह जानने के लिए अभी और जांच की जरूरत है. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि यहां मिले पुराने बर्तनों, हड्डियों और इमारतों के निशानों की जांच से शहर के इतिहास के बारे में ज्यादा जानकारी मिलेगी. इससे यह समझने में भी मदद मिल सकती है कि सिल्क रोड के दौर में इस इलाके के लोग कैसे रहते थे और व्यापार में उनकी क्या भूमिका थी.
आजतक साइंस डेस्क