साउथ कोरिया ने अपनी हाइपरसोनिक मिसाइल का पहला सफल टेस्ट किया

दक्षिण कोरिया ने घरेलू हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन का सफल पहला परीक्षण किया. यह 6174 km/hr से ज्यादा गति पर मैन्यूवर कर समुद्र में लक्ष्य भेदने में सफल रहा. उत्तर कोरिया से होड़ बढ़ी है.

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साउथ कोरिया ने मिसाइल लॉन्च की, जो रास्ते में मैन्यूवर करते हुए सटीक निशाने पर लगी. (Photo:X/ws @WPLGLocal10) साउथ कोरिया ने मिसाइल लॉन्च की, जो रास्ते में मैन्यूवर करते हुए सटीक निशाने पर लगी. (Photo:X/ws @WPLGLocal10)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 12 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 12:28 PM IST

साउथ कोरिया ने अपने घरेलू स्तर पर विकसित हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन (HGV) का पहला सफल परीक्षण किया है. यह परीक्षण अक्टूबर 2026 में हुआ जिसमें मिसाइल ने  6174 km/hr से अधिक गति पर मैन्यूवर किए और समुद्र में लक्ष्य को सटीक रूप से भेदा. यह उपलब्धि देश की रणनीतिक रक्षा क्षमताओं को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है. 

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परीक्षण में हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल ने बूस्टर से अलग होने के बाद निर्धारित उड़ान पथ पूरा किया. यह ऊंचाई से नीचे उतरकर हॉरिजोंटल और वर्टिकल दिशा में बदलाव करते हुए लक्ष्य तक पहुंचा. यह परीक्षण उच्च तापमान सहन करने वाली सामग्री, मार्गदर्शन प्रणाली और नियंत्रण तकनीक की जांच के लिए किया गया. 

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राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने खुद इस परीक्षण को देखा. साउथ कोरिया इसे प्रायद्वीप पर महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर अचानक सटीक हमला करने में सक्षम रणनीतिक संपत्ति बता रहा है. उत्तर कोरिया ने 2022 में अपना पहला सफल HGV परीक्षण किया था. 

हाल के एक महीने में उसने दो परीक्षण लॉन्च किए हैं जिससे उसकी क्षमताएं अपग्रेड हुई हैं. साउथ कोरिया का यह परीक्षण नॉर्थ कोरिया की बढ़ती क्षमताओं के जवाब में देखा जा रहा है. दोनों देशों के बीच हाइपरसोनिक मिसाइल की होड़ क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को प्रभावित कर रही है.

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रणनीतिक महत्व, क्षेत्रीय प्रभाव और आगे की राह

हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों से अलग होते हैं क्योंकि ये उड़ान के दौरान दिशा बदल सकते हैं और कम ऊंचाई पर तेज गति से उड़ते हैं. इससे इन्हें रोकना मुश्किल हो जाता है. साउथ कोरिया इसे अपनी किल चेन और प्रतिरोधक रणनीति का हिस्सा मान रहा है. इससे देश अपनी सुरक्षा खुद सुनिश्चित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

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यह परीक्षण पूर्वी एशिया में हथियारों की होड़ को बढ़ा सकता है. साउथ कोरिया अब इस तकनीक को और विकसित कर जल्दी तैनात करने की योजना बना रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि सफल परीक्षण के बावजूद पूर्ण परिचालन क्षमता हासिल करने में समय लगेगा. क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए कूटनीतिक प्रयास भी जरूरी हैं.

कुल मिलाकर यह उपलब्धि साउथ कोरिया की तकनीकी प्रगति और आत्मनिर्भर रक्षा नीति को दर्शाती है. आने वाले समय में इसकी और जांच और विकास जारी रहेगा.

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