हर साल 5 सेंटीमीटर तिब्बत की ओर बढ़ रही भारतीय प्लेट, हिमालय से दिल्ली तक मंडरा रहा भूकंप का खतरा

हर साल 5 सेंटीमीटर... भारतीय प्लेट तिब्बत की ओर लगातार बढ़ रही है. इस टक्कर से हिमालय के नीचे दबाव बन रहा है. नए रिसर्च ने उन छिपी संरचनाओं का भी पता लगाया है, जो भूकंप के खतरे को समझने में अहम हैं.

Advertisement
भारत की टेक्टोनिक प्लेट हर साल चीन की तरफ खिसक रही है. इससे बड़ा भूकंप आ सकता है. (Photo: NASA/Getty) भारत की टेक्टोनिक प्लेट हर साल चीन की तरफ खिसक रही है. इससे बड़ा भूकंप आ सकता है. (Photo: NASA/Getty)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 07 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 11:36 AM IST

भारतीय प्लेट हर साल करीब 5 सेंटीमीटर की रफ्तार से तिब्बत की ओर बढ़ रही है. इसकी वजह से भारतीय और यूरेशियन प्लेट के बीच लगातार टक्कर हो रही है. इस टक्कर से हिमालय के नीचे चट्टानों पर दबाव बन रहा है. इससे हिमालय और आसपास के इलाकों में भूकंप का खतरा बना हुआ है.

हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (NGRI) के वैज्ञानिकों ने इस हलचल को समझने के लिए एक रिसर्च किया है. इसमें गुरुत्वाकर्षण, भूकंप और सैटेलाइट से मिले आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया. रिसर्च के मुताबिक भारतीय प्लेट तिब्बत के नीचे करीब 100 किलोमीटर तक पहुंच रही है. कई जगहों पर यह प्लेट मुड़ रही है. टूट भी रही है. यह रिसर्च ‘जियोफिजिक्स फॉर एडवांसिंग सीस्मोलॉजी’ में प्रकाशित हुआ है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: दिल्ली-NCR समेत पूरे उत्तर भारत में भूकंप के झटके, उत्तराखंड में 4.9 तीव्रता से हिली धरती

भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट की टक्कर

भारतीय प्लेट लगातार उत्तर की ओर बढ़ रही है. सामने यूरेशियन प्लेट है. दोनों प्लेटों के बीच लाखों साल से टक्कर हो रही है. इसी टक्कर से हिमालय का निर्माण हुआ था. लेकिन प्लेटों की यह हलचल आज भी जारी है. जब दो प्लेटें एक-दूसरे पर दबाव डालती हैं तो जमीन के अंदर चट्टानों पर तनाव बढ़ता है. 

यह तनाव लंबे समय तक जमा हो सकता है. जब यह दबाव अचानक निकलता है तो भूकंप आ सकता है. रिसर्च में पता चला है कि भारतीय प्लेट हर जगह एक ही तरह से नहीं बढ़ रही. कुछ जगहों पर यह नीचे की ओर मुड़ रही है, तो कुछ हिस्सों में टूट रही है. इससे जमीन के नीचे की बनावट अलग-अलग जगहों पर अलग हो रही है.

Advertisement

गंगा के मैदान के नीचे छिपी हैं पुरानी संरचनाएं

रिसर्च में गंगा के मैदान के नीचे कुछ पुरानी पर्वतीय संरचनाओं का भी पता चला है. इनमें दिल्ली-हरिद्वार, फैजाबाद और मुंगेर-सहरसा जैसी संरचनाएं शामिल हैं. ये संरचनाएं जमीन के ऊपर दिखाई नहीं देतीं. ये धरती के अंदर मौजूद हैं. इनका असर जमीन के नीचे बनने वाले दबाव पर पड़ सकता है. इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि भूकंप से जुड़ा दबाव अलग-अलग इलाकों में किस तरह फैलता है.

उत्तरी भारत और तिब्बत के नीचे क्रस्ट कितनी मोटी?

रिसर्च के मुताबिक उत्तरी भारत में क्रस्ट करीब 35 किलोमीटर मोटी है. वहीं तिब्बत के नीचे इसकी मोटाई करीब 70 किलोमीटर तक है. हिमालय में आने वाले ज्यादातर भूकंप जमीन की सतह से करीब 10 से 15 किलोमीटर नीचे आते हैं. इतनी कम गहराई पर आने वाले भूकंप जमीन पर ज्यादा असर डाल सकते हैं. इसी वजह से हिमालय क्षेत्र में भूकंप की गतिविधि पर लगातार नजर रखना जरूरी है.

यह भी पढ़ें: महाराष्ट्र-आंध्र में सूखे का संकट... जानिए इससे हेल्थ, खेती, बिजनेस, इकोनॉमी और क्लाईमेट को कैसा नुकसान हैं

इस रिसर्च का मतलब यह नहीं है कि किसी बड़े भूकंप की तारीख या समय पता चल गया है. वैज्ञानिक किसी भूकंप की सटीक तारीख और जगह की भविष्यवाणी नहीं कर सकते. इस रिसर्च का मकसद हिमालय के नीचे भारतीय प्लेट की स्थिति, फॉल्ट सेगमेंट और वहां बन रहे दबाव को बेहतर तरीके से समझना है. 

Advertisement

इससे वैज्ञानिकों को यह जानने में मदद मिलेगी कि जमीन के नीचे किस तरह की हलचल हो रही है और किन इलाकों में भूकंप का खतरा ज्यादा हो सकता है. भारतीय प्लेट का तिब्बत की ओर बढ़ना अभी भी जारी है. इसलिए हिमालय और आसपास के इलाकों में भूकंप का खतरा बना रहेगा. जमीन के नीचे हो रही इस हलचल को समझना भूकंप से बचाव और बेहतर तैयारी के लिए अहम है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »