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फल पैक करने गया था रूस, धोखे से सेना में भर्ती कर भेजा यूक्रेन वॉर जोन!' रूस-यूक्रेन सीमा पर फंसे 5 भारतीयों ने भेजा मैसेज

विशाखापत्तनम के वामसी और चार अन्य भारतीयों ने वीडियो जारी कर दावा किया कि उन्हें धोखे से रूसी सेना में भर्ती कर मोर्चे पर भेजा जा रहा है. वामसी की मां ने केंद्र और आंध्र प्रदेश सरकार से सुरक्षित वापसी की गुहार लगाई, जबकि नारा लोकेश ने जल्द मदद का भरोसा दिया.

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आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम का रहने वाला जे वामसी नौकरी की तलाश में रूस गया था. आरोप है कि उसे धोखे से रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया और बाद में यूक्रेन की ओर ले जाया गया.

वामसी की मां जे अप्पालकोंडा ने 3 नवंबर को केंद्र और आंध्र प्रदेश सरकार से मामले में दखल देने और अपने बेटे की सुरक्षित वापसी कराने की अपील की. वहीं, वामसी बताए जा रहे एक व्यक्ति ने चार अन्य भारतीयों के साथ वीडियो संदेश जारी कर कहा कि उन्हें रूस-यूक्रेन सीमा के पास मोर्चे पर भेजा जा रहा है और उन्हें अपनी जान का डर है.

फल पैक करने के काम के लिए गया था रूस.

अप्पालकोंडा ने संवाददाताओं को बताया कि उनका बेटा फल पैक करने के काम की उम्मीद में रूस गया था. वहां पहुंचने के बाद उसे कोई काम नहीं मिला. इसके बाद वह नेपाल के एक नागरिक के संपर्क में आया, जिसने यूक्रेन में ज्यादा पैसे वाली नौकरी दिलाने का वादा किया और उसे वहां ले गया.

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अप्पालकोंडा ने कहा, “मेरा बेटा फल पैक करने के काम के लिए रूस गया था, लेकिन आरोप है कि उसे धोखे से रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया और बाद में यूक्रेन ले जाया गया. मैं केंद्र और आंध्र प्रदेश सरकार से अपील करती हूं कि वे दखल दें और उसकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करें.'

मां ने चंद्रबाबू नायडू और पवन कल्याण से मांगी मदद.

अप्पालकोंडा ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू, उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण और आईटी मंत्री नारा लोकेश से उनके बेटे को वापस लाने में मदद करने की अपील की.

उन्होंने कहा, 'मेरा कोई नहीं है. मेरा एक बेटा और एक बेटी है और मेरे पति भी अब मेरे साथ नहीं हैं. मैं सिर्फ अपने बेटे को वापस चाहती हूं और कुछ नहीं चाहती.' उन्होंने सरकार से मामले को देखने की अपील की.

वीडियो में चार अन्य भारतीयों के साथ मदद की अपील.

इस बीच, वामसी बताए जा रहे व्यक्ति ने चार अन्य भारतीयों के साथ एक वीडियो संदेश जारी किया. उन्होंने दावा किया कि वे नौकरी के लिए रूस गए थे, लेकिन उन्हें धोखे से रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया. अब उन्हें रूस-यूक्रेन सीमा के पास मोर्चे वाले इलाकों में भेजा जा रहा है.

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वामसी बताए जा रहे व्यक्ति ने कहा कि रूस में उनका संपर्क नेपाल के एक नागरिक से हुआ था. उसने सेना में खाना पैक करने का काम दिलाने का वादा किया और उनकी भर्ती कराने में मदद की. इन लोगों ने कहा कि उन्हें अब रूस-यूक्रेन सीमा के पास तैनात किया जा रहा है और उन्हें अपनी जान का डर है.

उस व्यक्ति ने यह भी दावा किया कि उन्हें रूसी नागरिकता दिए जाने की जानकारी नहीं थी. बाद में जब उन्होंने अपने दर्जे के बारे में पूछा, तब उन्हें इसका पता चला.

उसने कहा, “जब भी हम अपनी भारतीय नागरिकता के बारे में पूछते हैं, तो हमें बताया जाता है कि अब हम भारतीय नागरिक नहीं हैं और रूसी बन गए हैं. हमें सिर्फ भारतीय नागरिकता चाहिए और रूसी नागरिकता नहीं चाहिए. अगर हमें इस बारे में पता होता, तो हम कभी इसके लिए राजी नहीं होते.'

उसके मुताबिक, उनसे रूसी भाषा में लिखे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए, जबकि वे उनकी बात समझ नहीं पाए थे. उसने कहा, “ये हमारे आखिरी शब्द हो सकते हैं. हमें नहीं पता कि आगे क्या होगा, क्योंकि वे हमें सीधे मोर्चे पर भेज रहे हैं. हम भारत सरकार से तुरंत दखल देने, हमारी जान बचाने और हमें वापस ले जाने की अपील करते हैं.'

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नारा लोकेश ने जल्द मदद का भरोसा दिया.

अपील पर प्रतिक्रिया देते हुए आंध्र प्रदेश के आईटी मंत्री नारा लोकेश ने विदेश में फंसे भारतीयों की हालत पर चिंता जताई. उन्होंने उनकी सुरक्षित और जल्द वापसी के लिए तुरंत दखल देने की बात कही.

लोकेश ने एक्स पर लिखा, 'विदेश में फंसे हमारे नागरिकों की हालत देखकर दुख होता है. मैंने अपने कार्यालय से कहा है कि वह संबंधित अधिकारियों के साथ तुरंत तालमेल करे, उनकी मदद करे और उनकी सुरक्षित और जल्द घर वापसी सुनिश्चित करे.'

वामसी की मां ने केंद्र और राज्य सरकार से अपने बेटे को सुरक्षित वापस लाने की मांग की है. वीडियो में मौजूद लोगों ने भी भारत सरकार से तुरंत दखल देकर उनकी जान बचाने और उन्हें भारत वापस लाने की अपील की है.

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