फ्रांस में 2026 की भीषण गर्मी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. जून के आखिरी दिनों और जुलाई की शुरुआत के बीच देश में 20 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई. फ्रांस की पब्लिक हेल्थ एजेंसी के मुताबिक, 17 जून से 2 जुलाई के बीच 21674 लोगों की मौत हुई, जबकि इस समय में आमतौर पर करीब 15910 मौतें होती हैं. यानी इस बार सामान्य से 5764 ज्यादा मौतें हुईं.
इन आंकड़ों से पता चलता है कि तेज गर्मी अब सिर्फ मौसम की परेशानी नहीं रह गई है, बल्कि यह लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बन रही है. अधिकारियों का कहना है कि सभी मौतें सीधे गर्मी की वजह से नहीं हुईं. ज्यादा तापमान ने कई लोगों की पहले से मौजूद बीमारियों को और गंभीर कर दिया, जिससे मौतों की संख्या बढ़ गई.
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फ्रांस में सामने आए नए आंकड़ों ने 2026 की हीटवेव के असर की गंभीर तस्वीर दिखाई है. शुरुआत में मौतों का अनुमान कम था, लेकिन बाद में मिले आंकड़ों से पता चला कि गर्मी का असर पहले से ज्यादा बड़ा था. इस दौरान अस्पतालों और देखभाल केंद्रों पर भी लोगों का दबाव बढ़ गया.
अतिरिक्त मौतें क्या होती हैं?
किसी भी आपदा या घटना का असर समझने के लिए स्वास्थ्य एजेंसियां अतिरिक्त मौतों का आंकड़ा देखती हैं. इसमें किसी खास समय में हुई मौतों की तुलना सामान्य समय में होने वाली मौतों से की जाती है. फ्रांस में 17 जून से 2 जुलाई के बीच सामान्य से करीब 36 प्रतिशत ज्यादा मौतें दर्ज हुईं. हालांकि, इनमें से हर मौत की वजह सिर्फ गर्मी नहीं थी. लेकिन तेज तापमान ने बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों की परेशानी बढ़ा दी.
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अतिरिक्त मौतों में करीब दो-तिहाई लोग 75 साल या उससे ज्यादा उम्र के थे. ज्यादा उम्र के लोगों के लिए तेज गर्मी ज्यादा खतरनाक होती है, क्योंकि उनका शरीर तापमान को आसानी से नियंत्रित नहीं कर पाता. इस दौरान करीब आधी मौतें अस्पतालों में हुईं. कई मौतें नर्सिंग होम और लोगों के घरों में भी दर्ज की गईं. पेरिस और आसपास के इलाकों में इसका असर सबसे ज्यादा देखने को मिला, जहां करीब 2000 अतिरिक्त मौतें हुईं.
ज्यादा गर्मी शरीर को कैसे नुकसान पहुंचाती है?
बहुत ज्यादा गर्मी शरीर पर दबाव बढ़ा देती है. इससे शरीर में पानी की कमी हो सकती है और दिल, फेफड़ों और किडनी पर असर पड़ सकता है. जिन लोगों को पहले से कोई बीमारी होती है, उनके लिए तेज गर्मी और ज्यादा खतरनाक हो सकती है. इसी वजह से हीटवेव में सिर्फ तापमान बढ़ना ही चिंता की बात नहीं होती, बल्कि इसका असर लोगों की सेहत और मौतों के आंकड़ों में भी दिखाई देता है.
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वैज्ञानिकों का कहना है कि क्लाइमेट चेंज की वजह से यूरोप में हीटवेव ज्यादा बार आने लगी हैं और ज्यादा लंबे समय तक रह रही हैं. साल 2003 में यूरोप में आई भीषण गर्मी में 70 हजार से ज्यादा लोगों की मौत का अनुमान लगाया गया था.
फ्रांस की 2026 की हीटवेव एक बार फिर दिखाती है कि बढ़ती गर्मी अब सिर्फ मौसम की घटना नहीं है. यह लोगों की सेहत से जुड़ी बड़ी चुनौती बन चुकी है. आने वाले समय में गर्मी से बचाव के लिए बेहतर तैयारी, समय पर अलर्ट और लोगों को जागरूक करना जरूरी होगा.
आजतक साइंस डेस्क