अल-नीनो इस बार पहले से ज्यादा ताकतवर हो सकता है और इसका असर 2027 तक बना रह सकता है. WMO के मुताबिक, फरवरी 2027 तक अल-नीनो के जारी रहने की संभावना करीब 100 फीसदी है. अगर यह इसी तरह बढ़ता रहा, तो यह 1950 के बाद से अब तक का सबसे ताकतवर अल-नीनो बन सकता है.
इसका असर सिर्फ प्रशांत महासागर तक नहीं रहेगा. दुनिया के कई हिस्सों में इसका असर मौसम पर पड़ सकता है. कहीं ज्यादा बारिश और बाढ़ आ सकती है, तो कहीं सूखे की स्थिति बन सकती है. कई जगहों पर तेज गर्मी भी पड़ सकती है. WMO के मुताबिक, अल-नीनो इस साल के आखिर में सबसे ज्यादा मजबूत हो सकता है, लेकिन इसका असर 2027 तक बना रहेगा.
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क्या है अल-नीनो?
अल-नीनो एक प्राकृतिक मौसम घटना है. इसमें प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है. समुद्र के इस बढ़े हुए तापमान का असर दुनिया के मौसम पर पड़ता है. अल-नीनो आमतौर पर हर 2 से 7 साल में आता है और कई महीनों तक रह सकता है.
इस बार समुद्र का तापमान सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा ऊपर पहुंच गया है. WMO के मुताबिक, 1950 के बाद अब तक सिर्फ चार El Niño को ‘बहुत मजबूत’ श्रेणी में रखा गया है. मौजूदा El Niño भी इसी श्रेणी में है.
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2027 में बढ़ सकती है गर्मी
अल-नीनो का असर दुनिया के तापमान पर भी पड़ता है. WMO के अधिकारियों का कहना है कि 2027 में दुनिया का औसत तापमान और बढ़ सकता है. यहां तक कि 2027 अब तक का सबसे गर्म साल भी बन सकता है. इससे पहले 2024 सबसे गर्म साल रहा था. उस समय भी अल-नीनो ने दुनिया का तापमान बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई थी. आमतौर पर अल-नीनो के बाद दुनिया के तापमान में कुछ समय के लिए और बढ़ोतरी देखी जाती है.
फसलों पर भी पड़ेगा असर
मौसम में बड़े बदलाव का सीधा असर खेती पर पड़ सकता है. जहां सूखा पड़ेगा, वहां फसलें खराब हो सकती हैं. वहीं ज्यादा बारिश और बाढ़ से भी खेतों को नुकसान हो सकता है. मध्य अमेरिका के कुछ हिस्सों में El Niño की वजह से फसलों को पहले ही नुकसान पहुंचा है. वहां खाने की चीजों की कमी का खतरा बढ़ गया है. इसका असर खेती से जुड़े लोगों के साथ-साथ खाद्य कीमतों पर भी पड़ सकता है.
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देशों को अभी से तैयारी की सलाह
WMO ने देशों से अल-नीनो के असर से निपटने के लिए पहले से तैयारी करने को कहा है. इसके लिए सूखा सहने वाली फसलों का इस्तेमाल बढ़ाने, पानी और बिजली की बेहतर तैयारी करने और मौसम की चेतावनी समय पर लोगों तक पहुंचाने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं.
अल-नीनो खुद एक प्राकृतिक घटना है. लेकिन धरती और समुद्र का तापमान पहले से बढ़ रहा है, इसलिए इसके असर ज्यादा गंभीर हो सकते हैं. ऐसे में 2026 के आखिर और 2027 में सूखे, बाढ़ और तेज गर्मी जैसी स्थितियों से निपटने के लिए पहले से तैयारी करना जरूरी होगा.
आजतक साइंस डेस्क