अंटार्कटिका के जावोडोवस्की द्वीप पर रहने वाले पेंग्विन की आबादी में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. 2011 से 2025 के बीच जावोडोवस्की द्वीप पर चिनस्ट्रैप पेंग्विन के घोंसलों की संख्या 63 फीसदी घट गई. वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस दौरान इनकी अनुमानित आबादी करीब 10.9 लाख से घटकर 4.02 लाख रह गई. यानी 6.8 लाख से ज्यादा पेंग्विन कम हो गए.
करंट बायोलॉजी जर्नल में छपी एक नई स्टडी में यह जानकारी सामने आई है. वैज्ञानिकों ने इस गिरावट के पीछे क्लाइमेट चेंज और समुद्र के गर्म होने से भोजन की उपलब्धता में आ रहे बदलाव को अहम वजह बताया है.
यह भी पढ़ें: आग इंडोनेशिया में, धुएं से परेशान सिंगापुर; F1 रेस से पहले हवा ने बढ़ाई चिंता
जावोडोवस्की द्वीप साउथ सैंडविच आइलैंड्स का हिस्सा है और पहले इसे दुनिया की सबसे बड़ी पेंग्विन कॉलोनी के तौर पर जाना जाता था. यहां बड़ी संख्या में चिनस्ट्रैप पेंग्विन रहते हैं.
ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे (BAS) के वैज्ञानिकों ने ड्रोन, हवाई तस्वीरों, सैटेलाइट डेटा और पेंग्विन पर लगाए गए ट्रैकिंग डिवाइस की मदद से इनकी संख्या और आने-जाने की जगहों का अध्ययन किया. स्टडी में सामने आया कि इस द्वीप पर चिनस्ट्रैप पेंग्विन की संख्या में लगातार गिरावट आई है.
चिनस्ट्रैप पेंग्विन के भोजन में अंटार्कटिक क्रिल की बड़ी भूमिका है. क्रिल समुद्र में रहने वाले छोटे जीव होते हैं, जो झींगे जैसे दिखते हैं. पेंग्विन इन्हें खाकर अपनी जरूरत पूरी करते हैं. लेकिन समुद्र के तापमान में बदलाव से क्रिल के मिलने की जगह भी बदल सकती है. इससे पेंग्विन के लिए भोजन ढूंढना मुश्किल हो सकता है.
यह भी पढ़ें: बहादुरी को सम्मान... कैप्टन स्मित मछार को इजरायल देगा वीरता पुरस्कार
स्टडी के दौरान वैज्ञानिकों ने पेंग्विन पर ट्रैकिंग डिवाइस लगाए, ताकि पता चल सके कि वे भोजन की तलाश में कहां जाते हैं. डेटा से पता चला कि ये पेंग्विन द्वीप के उत्तर-पश्चिम में ठंडे पानी वाले इलाकों में भोजन तलाशना पसंद करते हैं. वहां उन्हें क्रिल मिलने की उम्मीद रहती है. लेकिन गर्म होते समुद्र के कारण क्रिल की उपलब्धता और उसके फैलाव में बदलाव आ रहा है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, भोजन की इस समस्या का असर पेंग्विन की सेहत और उनकी आबादी पर पड़ सकता है.
2011 से 2025 के बीच कितनी घटी आबादी?
स्टडी के अनुमान के मुताबिक, 2011 में द्वीप पर करीब 10.9 लाख प्रजनन करने वाले चिनस्ट्रैप पेंग्विन थे. 2025 तक इनकी संख्या करीब 4.02 लाख रह गई. वैज्ञानिकों ने अलग-अलग सालों की हवाई तस्वीरों और सैटेलाइट रिकॉर्ड की तुलना करके यह बदलाव दर्ज किया.
यह भी पढ़ें: धरती लगभग पूरी लाल! ‘सुपर-डुपर अल-नीनो’ ने बढ़ाई टेंशन, 3.7 डिग्री तक गर्म होगा समुद्र
वैज्ञानिकों ने 2016 में द्वीप पर हुए ज्वालामुखी विस्फोट को भी ध्यान में रखा. हालांकि, पेंग्विन की संख्या में गिरावट इस घटना से पहले ही शुरू हो चुकी थी. इसलिए इस विस्फोट को आबादी घटने की मुख्य वजह नहीं माना गया. स्टडी के मुताबिक, लंबे समय से चल रही गिरावट के पीछे समुद्र में हो रहे बदलाव अहम हो सकते हैं.
अब सबसे बड़ी पेंग्विन कॉलोनी कहां है?
चिनस्ट्रैप पेंग्विन की संख्या घटने के बाद जावोडोवस्की द्वीप दुनिया की सबसे बड़ी पेंग्विन कॉलोनी का दर्जा खो चुका है. अब अंटार्कटिका के रॉस सागर में मौजूद केप अडारे को दुनिया की सबसे बड़ी पेंग्विन कॉलोनी माना जा रहा है. यहां बड़ी संख्या में अडेली पेंग्विन रहते हैं. इसी द्वीप पर मैकरोनी पेंग्विन भी पाए जाते हैं. स्टडी में इनकी संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इससे पता चलता है कि समुद्र और पर्यावरण में हो रहे बदलावों का असर सभी पेंग्विन प्रजातियों पर एक जैसा नहीं पड़ रहा है.
यह भी पढ़ें: दुनिया में 73% घटे वन्यजीव, भारत में बढ़े बाघ-शेर-गैंडे, WWF की रिपोर्ट ने दिखाया बड़ा फर्क
पेंग्विन की आबादी पर क्यों बढ़ी चिंता?
वैज्ञानिकों के मुताबिक, साउथ सैंडविच आइलैंड्स में दुनिया के चिनस्ट्रैप पेंग्विन का एक बड़ा हिस्सा रहता है. ऐसे में इस इलाके में आबादी का तेजी से घटना चिंता की बात है. अगर समुद्र के गर्म होने से क्रिल की उपलब्धता प्रभावित होती रही, तो पेंग्विन के लिए भोजन जुटाना और बच्चों को पालना मुश्किल हो सकता है.
यह स्टडी बताती है कि क्लाइमेट चेंज का असर दूर-दराज के उन इलाकों में भी दिखाई दे रहा है, जहां इंसानी गतिविधियां बहुत कम हैं. वैज्ञानिकों के लिए अब यह समझना जरूरी है कि पेंग्विन की आबादी में गिरावट कितनी तेजी से जारी रह सकती है और इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं.
आजतक साइंस डेस्क