दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य के थूथुकुडी जिले में फैली नमक की क्यारियां सालों से मजदूरों की आजीविका का मुख्य आधार रही हैं. यहां समुद्री पानी को धूप में सुखाकर नमक निकाला जाता है. मजदूर सुबह जल्दी पहुंचकर क्यारियों में काम करते हैं, नमक इकट्ठा करते हैं और ढोते हैं. Photo: AFP
यह काम कठिन और मौसमी है. गर्मी के महीनों में उत्पादन बढ़ता है जबकि बारिश के दौरान काम रुक जाता है. थूथुकुडी जिले में हजारों मजदूर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नमक उद्योग से जुड़े हैं. जिला भारत के प्रमुख नमक उत्पादक क्षेत्रों में गिना जाता है और यहां लाखों टन नमक हर साल तैयार होता है. Photo: AFP
इसी जिले में अब एक बिल्कुल अलग और आधुनिक प्रोजेक्ट आकार ले रही है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) कुलासेकरपट्टिनम में अपना दूसरा लॉन्च सेंटर बना रहा है. यह स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV) कॉम्प्लेक्स कहलाता है. श्रीहरिकोटा के बाद यह देश का दूसरा प्रमुख रॉकेट लॉन्च सेंटर होगा. Photo: AFP
इसरो के लिए 2200 से 2300 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई है. 2024 में प्रधानमंत्री ने इसका शिलान्यास किया था. निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है. लक्ष्य दिसंबर 2026 तक इसे तैयार करने का है. यहां छोटे उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने वाले रॉकेट लॉन्च किए जाएंगे. निजी कंपनियां भी इस सुविधा का इस्तेमाल कर सकेंगी. Photo: AFP
थूथुकुडी की नमक क्यारियों में काम पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से होता है. समुद्री पानी को बड़े-बड़े तालाबों या क्यारियों में लाया जाता है. धूप और हवा के प्रभाव से पानी भाप बनता है. नमक के क्रिस्टल बच जाते हैं. मजदूर इन्हें इकट्ठा करके ढेर लगाते हैं. साफ करते हैं. पैक करते हैं. Photo: AFP
महिलाएं और पुरुष दोनों इस काम में लगे होते हैं. कई परिवार पीढ़ियों से इसी व्यवसाय से जुड़े हैं. मौसम पर निर्भरता के कारण आय अनिश्चित रहती है. असामान्य बारिश उत्पादन को प्रभावित करती है. फिर भी यह उद्योग स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और कई लोगों को रोजगार देता है. Photo: AFP
कुलासेकरपट्टिनम को इसलिए चुना गया क्योंकि यह भूमध्य रेखा के करीब है और समुद्र तट पर स्थित है. यहां से रॉकेट सीधे दक्षिण दिशा में उड़ाए जा सकते हैं. श्रीहरिकोटा से लॉन्च करते समय श्रीलंका से बचने के लिए रॉकेट को घुमावदार रास्ता लेना पड़ता है जिससे ईंधन ज्यादा खर्च होता है. Photo: AFP
नए केंद्र से यह समस्या कम होगी और पेलोड क्षमता बढ़ेगी. एसएसएलवी जैसे छोटे रॉकेट यहां आसानी से लॉन्च हो सकेंगे जो 500 किलोग्राम तक के उपग्रह ले जा सकते हैं. साल में 20 से 25 लॉन्च की योजना है. इससे भारत की उपग्रह प्रक्षेपण क्षमता बढ़ेगी और निजी क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलेगा. Photo: AFP
यह केंद्र सिर्फ इसरो के लिए नहीं बल्कि निजी कंपनियों के रॉकेटों के लिए भी खुला रहेगा. हाल ही में निजी क्षेत्र को संचालन और प्रबंधन सौंपने की प्रक्रिया शुरू हुई है. इससे अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ेगी और भारत वैश्विक स्तर पर छोटे उपग्रहों के लॉन्च बाजार में मजबूत होगा. Photo: AFP
थूथुकुडी में एक तरफ सदियों पुरानी नमक क्यारियां हैं जहां मजदूर हाथ से नमक काटते हैं. दूसरी तरफ आधुनिक अंतरिक्ष तकनीक का केंद्र बन रहा है जहां रॉकेट आसमान छूएंगे. दोनों एक ही जिले में मौजूद हैं. नमक उद्योग स्थानीय रोजगार देता है जबकि लॉन्च सेंटर उच्च तकनीक वाले रोजगार और विकास के नए अवसर पैदा कर सकता है. भूमि अधिग्रहण और स्थानीय प्रभावों को लेकर कभी-कभी चिंताएं उठती रही हैं लेकिन अधिकारी कहते हैं कि परियोजना क्षेत्र अलग है. Photo: AFP
यह बदलाव जिले की पहचान को नया रूप दे रहा है. नमक उत्पादन जारी रहेगा और साथ ही अंतरिक्ष गतिविधियां बढ़ेंगी. मजदूरों की मेहनत से बना नमक रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होता है जबकि यहां से लॉन्च होने वाले उपग्रह संचार, मौसम पूर्वानुमान और वैज्ञानिक शोध में मदद करेंगे. दोनों ही भारत की प्रगति के अलग-अलग पहलू हैं. Photo: AFP