संत रसिक दुलारी की मौत के करीब 2 हफ्ते बाद प्रेमानंद महाराज केलि कुंज आश्रम वापस लौट आए हैं. इस बीच प्रेमानंद महाराज और विराट कोहली पर विवादित बयान देने वाले दिनेश शर्मा फलाहारी महाराज भी बैकफुट पर आ गए हैं. उन्होंने अपने बयान को लेकर प्रेमानंद महाराज से माफी मांगी है. मथुरा के संत दिनेश शर्मा ने कहा कि प्रेमानंद महाराज उनके लिए भी पूजनीय हैं और अगर उनकी किसी बात से प्रेमानंद महाराज का मन दुखी हुआ है तो वह क्षमा मांगते हैं.
श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश शर्मा फलाहारी महाराज ने एक वीडियो जारी कर कहा, 'संत समाज की एक हालिया बैठक सभी परम संतों ने यह माना कि मुझसे अपराध हुआ है. इसलिए मैं सभी सनातनियों और संतों से ये कहना चाहता हूं कि मैंने प्रेमानंद महाराज के बारे में आज तक एक शब्द गलत नहीं बोला है. वो हमारे लिए पहले भी पूजनीय थे और आज भी पूजनीय हैं.'
फलाहारी महाराज ने आगे कहा, 'विराट कोहली के लिए जो द्वेष भावना बनी, उसके लिए मैं खेद प्रकट करता हूं और पूज्य महाराज के चरणों में क्षमा याचना करता हूं. हमें वो माफ कर दें. हमारी वजह से उनका दिल दुखा है. मैं उनके सभी साधकों और अनुयायियों से भी माफी मांगता हूं. मेरा उद्देश्य किसी भी संत का दिल दुखाने का नहीं था. सभी साधु-संतों के सहयोग से ही हम श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए संघर्ष कर रहे हैं. आपके आशीर्वाद से ही हम इस कार्ये में जुटे हुए हैं. अपना आशीर्वाद हमेशा बनाए रखें.'
क्या है पूरा मामला?
प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी ने 25 सितंबर को गुरु कृपा कुंज आश्रम की छत से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला कि दीपक लोधी का प्राइवेट पार्ट भी कटा हुआ था. इसके बाद यह मामला और गहरा गया. प्रेमानंद महाराज और उनके आश्रम पर भी सवाल खड़े होने लगे. नतीजन प्रेमानंद महाराज अपने शिष्यों के साथ केलि कुंज छोड़कर बेलवन चले गए.
इस बीच हिंदूवादी नेता दिनेश शर्मा फलाहारी महाराज के बयान से बड़ा बवाल खड़ा हो गया. उन्होंने कहा था कि विराट कोहली को पांच करोड़ रुपए देकर प्रेमानंद महाराज के आश्रम बुलाया गया था. हालांकि विराट कोहली के प्रवक्ता ने आधिकारिक बयान जारी कर इस दावे को खारिज कर दिया था. उन्होंने कहा कि विराट कोहली पर किया गया दावा निराधार और तथ्यात्मक रूप से गलत है.
फलाहारी महाराज ने यह भी कहा था कि प्रेमानंद महाराज के आश्रम में असली और नकली संतों के दो गुट बन गए हैं. नकली संतों का गुट प्रॉपर्टी और जमीनों का धंधा कर रहा है. इस नकली गुट ने करीब 15 आश्रमों पर कब्जा कर रखा है और प्रेमानंद इससे बहुत दुखी हैं. इसलिए प्रेमानंद केलि कुंज आश्रम को छोड़कर यहां से 20 किलोमीटर बेलवन आश्रम में चले गए हैं.
मदन गोपाल शर्मा