राजस्थान में युवाओं के मुद्दे, बेरोजगारी, पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया को लेकर 'आजतक पंचायत राजस्थान' के कार्यक्रम में बीजेपी से लेकर कांग्रेस के युवा नेता शामिल हुए, चार युवा नेताओं के बीच रोजगार से लेकर छात्र आंदोलनों, आरपीएससी की जवाबदेही और सरकारों के कामकाज तक कई मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिली.
दिल्ली में राहुल गांधी के अगुवाई में कांग्रेस के एनएसयूआई के तमाम छात्र नेता सड़क पर उतरे और जमकर संघर्ष करते हुए नजर आए. आंदोलन के बाद राहुल गांधी ने प्रेस कॉफ्रेंस के दौरान एनएसएयूआई के किसी नेता को आगे लाने के बजाय लेफ्ट के छात्र संगठन से जुड़ी नेहा बोरा को आगे किया.
एनएसयूआई के प्रवक्ता राहुल सिंह ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखी और बताया कि क्यों राहुल गांधी ने कांग्रेस के किसी युवा नेता की जगह नेहा बोरा को आगे रखा. देश और राजस्थान का जेन-Z किसके साथ के मुद्दे पर कांग्रेस और बीजेपी के युवा नेता एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते हुए नजर आए.
राहुल गांधी ने नेहा बोरा को क्यों आगे किया
कांग्रेस नेता से सवाल किया गया कि जब NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ युवाओं के मुद्दों को लेकर लगातार संघर्ष कर रहे हैं, तो राहुल गांधी के साथ संवाद और आंदोलन के मंच पर नेहा बोरा जैसे दूसरे चेहरों को आगे करने की जरूरत क्यों पड़ी?
इस सवाल पर कांग्रेस और NSUI का पक्ष रखते हुए कांग्रेस के छात्र संगठन से जुड़े राहुल सिंह ने कहा कि पार्टी का मकसद आंदोलन को किसी एक चेहरे तक सीमित रखना नहीं है. कांग्रेस पार्टी यह मानती है कि छात्र और युवा आंदोलन किसी एक पार्टी या विशेष व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे देश का साझा संघर्ष है. ये सभी का मुद्दा है और सभी मिलकर लड़ेंगे.
उन्होंने कहा कि नेहा बोरा को आगे लाने का फैसला इसलिए भी अहम था, क्योंकि उनके मुताबिक केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बीच महिला कार्यकर्ताओं को अपनी बात रखने के लिए मंच मिलना जरूरी है.
राहुल सिंह ने कहा कि अगर किसी महिला को परेशान या प्रताड़ित किया जाएगा, तो राहुल गांधी और कांग्रेस उसके साथ खड़े होंगे. उन्होंने नेहा बोरा को मंच देने के फैसले का बचाव करते हुए इसे छात्र आंदोलन में अलग-अलग आवाजों को जगह देने की कोशिश बताया.
'युवाओं का आंदोलन सिर्फ कांग्रेस का नहीं'
राहुल ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके मुताबिक युवाओं का आंदोलन केवल कांग्रेस या NSUI का आंदोलन नहीं है, बल्कि यह देश के युवाओं के भविष्य से जुड़ा सवाल है. उन्होंने कहा कि बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता, पेपर लीक और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों पर अलग-अलग संगठनों को एक साथ आना चाहिए.
उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि इस आंदोलन में दूसरे छात्र संगठनों को भी शामिल होना चाहिए, यहां तक कि ABVP के युवाओं को भी युवाओं के मुद्दों पर साथ आना चाहिए. इस तरह नेहा बोरा का मुद्दा केवल एक महिला कार्यकर्ता को मंच देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह बहस छात्र राजनीति में प्रतिनिधित्व, नेतृत्व और युवाओं के मुद्दों पर साझा संघर्ष तक पहुंच गई.
राहुल सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस द्वारा महिला कार्यकर्ताओं या नेताओं को निशाना बनाए जाने के मामलों के बीच, पार्टी नेतृत्व ने यह सुनिश्चित किया कि उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने वालों को मजबूत राजनीतिक और नैतिक समर्थन मिले. नेहा बोरा को दिल्ली में मंच देना इसी एकजुटता का हिस्सा था, नेहा बोरा पर किस तरह से अमित शाह की दिल्ली पुलिस जुल्म कर रही थी, जो सबसे के सामने हैं.
एनएसयूआई ने इस बात पर भी जोर दिया कि वर्तमान राजनीतिक माहौल में यह संघर्ष सिर्फ कांग्रेस का नहीं, बल्कि विभिन्न विपक्षी ताकतों और युवाओं का साझा मंच है, पार्टी क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधते हुए युवाओं को आगे बढ़ा रही है, नेताओं का मानना है कि पार्टी जाति, वर्ग और लिंगगत भेदभाव से ऊपर उठकर ज़मीनी स्तर पर संघर्ष करने वाले युवाओं को पहचान दे रही है, जिससे छात्र राजनीति में नए नेतृत्व का मार्ग प्रशस्त हो रहा है.
युवाओं का आंदोलन किसी एक पार्टी का नहीं, पूरे देश का मुद्दा
कांग्रेस के छात्र संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राहुल ने कहा कि युवाओं के आंदोलनों को केवल किसी एक राजनीतिक दल या विचारधारा से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. दिल्ली में होने वाले आंदोलन में देश के अलग-अलग राज्यों से आए छात्र शामिल होते हैं। इसलिए पेपर लीक, नीट, किसानों की समस्याओं, बुनियादी सुविधाओं और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को व्यापक नजरिए से देखने की जरूरत है.
राहुल सिंह ने अपने आंदोलनकारी अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि वह नीट और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर 2023 से संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि छात्र संगठनों ने कई बार प्रदर्शन किए, पुलिस कार्रवाई का सामना किया और जेल भी गए. उनके मुताबिक, किसी आंदोलन की सफलता को केवल विश्वविद्यालय चुनावों में जीत या हार के आधार पर नहीं मापा जा सकता. आंदोलन का असर नीतियों में बदलाव और छात्रों की समस्याओं को सार्वजनिक चर्चा में लाने से भी समझा जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि एनएसयूआई और कांग्रेस लगातार छात्रों के मुद्दे उठा रहे हैं. राहुल ने सामाजिक न्याय का सवाल उठाते हुए संगठनात्मक नेतृत्व में वंचित वर्गों की भागीदारी का मुद्दा उठाया और कहा कि युवाओं के आंदोलन में विभिन्न सामाजिक समूहों की आवाज को जगह मिलनी चाहिए.
राजस्थान में रोजगार और शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
राजस्थान के संदर्भ में राहुल ने कहा कि प्रदेश के युवाओं के सामने रोजगार के अवसर बढ़ाने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की बड़ी चुनौती है. उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के विकास के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल हाईवे, रेलवे स्टेशन और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास से युवाओं की रोजगार संबंधी समस्याएं हल नहीं होंगी.
राहुल ने सीकर और कोटा में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि राजस्थान की पहचान शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के केंद्र के रूप में मजबूत होनी चाहिए, न कि पेपर लीक की घटनाओं से. उन्होंने राइजिंग राजस्थान के तहत निवेश के दावों और रोजगार में उनके वास्तविक रूपांतरण को लेकर भी सवाल उठाए.
उन्होंने कहा कि राजस्थान में रोजगार के नियमित अवसरों की कमी और स्कूली शिक्षा के विभिन्न स्तरों पर विद्यार्थियों का पढ़ाई छोड़ना गंभीर समस्याएं हैं। उनके मुताबिक, इनका समाधान केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि प्रशासनिक सुधार, शिक्षा की गुणवत्ता और रोजगार सृजन पर ध्यान देकर निकाला जा सकता है.
राहुल ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक दलों के चुनाव चिह्न से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि उस चिह्न पर चुनाव लड़ने वाला व्यक्ति युवाओं और महिलाओं की आवाज उठाता है या नहीं। उन्होंने आंदोलनों के दौरान प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार और उनकी शिकायतें सुनने की व्यवस्था को भी अहम बताया।
राजस्थान में भर्ती व्यवस्था में सुधार हुआ-बीजेपी युवा नेता
युवाओं के रोजगार और भर्ती प्रक्रियाओं के मुद्दे पर बीजेपी युवा मोर्चा के नेता उपेन यादव ने अपने लंबे आंदोलनकारी सफर का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि उन्होंने बेरोजगारों की मांगों को लेकर कई आंदोलन किए, लाठियां खाईं, जेल गए और अनशन किया। उनके मुताबिक, इन संघर्षों का उद्देश्य राजनीतिक लाभ उठाना नहीं, बल्कि युवाओं को न्याय दिलाना था.
उपेन यादव ने दावा किया कि करीब 12 वर्षों के संघर्ष के दौरान लाखों युवाओं को नौकरी मिलने की प्रक्रिया में योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि आंदोलन करने वाले युवाओं की समस्याओं को समझना जरूरी है, क्योंकि सरकारी भर्ती में देरी और पेपर लीक का सीधा असर अभ्यर्थियों और उनके परिवारों पर पड़ता है.
उन्होंने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में पेपर लीक की घटनाओं का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उस समय भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठाने पर उन्हें कई बार पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा. उन्होंने कहा कि उस दौरान भी उन्होंने आंदोलन जारी रखे और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए.
एसआईटी, गिरफ्तारियों और भर्ती कैलेंडर का किया जिक्र
उपेन यादव ने भाजपा सरकार के कार्यकाल में पेपर लीक मामलों की जांच के लिए एसआईटी के गठन और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का उल्लेख किया. उन्होंने दावा किया कि 400 से अधिक लोग जेल में हैं और भर्ती प्रक्रिया में कई सुधार किए गए हैं.
उन्होंने कहा कि पहले अभ्यर्थियों को परीक्षा देने के बाद परिणाम और नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता था। अब भर्ती कैलेंडर जारी करने और दस्तावेज सत्यापन से संबंधित कुछ जिम्मेदारियां संबंधित विभागों को सौंपने जैसे कदम उठाए गए हैं। उन्होंने फर्जी डिग्रियों और फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्रों से जुड़े मामलों में कार्रवाई का भी जिक्र किया।
उपेन यादव ने यह भी दावा किया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में लगभग 1.93 लाख नौकरियों का आंकड़ा सामने आया है। हालांकि, चर्चा के दौरान इस संख्या में पिछली सरकार की लंबित भर्तियों और मौजूदा सरकार के कार्यकाल में पूरी हुई नियुक्तियों का योगदान कितना है, इस पर सवाल उठे.
उन्होंने कहा कि पिछली सरकार में जिन भर्तियों के पेपर लीक हुए, उन्हें रद्द करने और दोबारा परीक्षा कराने की मांग उठाई गई थी। उनके मुताबिक, मौजूदा सरकार ने कुछ मामलों में परीक्षाएं रद्द करके दोबारा आयोजित कराईं, जिससे अभ्यर्थियों को राहत मिली.
उपेन यादव ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि युवाओं के लिए संघर्ष करते समय उन्होंने यह महसूस किया कि उनकी आवाज को प्रभावी ढंग से उठाने के लिए राजनीति में आना भी जरूरी है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करें, लेकिन मेहनत और सही दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता न छोड़ें.
'कांग्रेस युवा को बहका कर आंदोलन करा रही है'
भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष शंकर गोरा ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि राजस्थान में युवाओं के लिए भर्ती कैलेंडर जारी करना एक महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि भर्ती कैलेंडर से अभ्यर्थियों को यह जानने में मदद मिलती है कि कौन-सी परीक्षा कब आयोजित होने वाली है.
शंकर गोरा के मुताबिक, पहले प्रतियोगी परीक्षाओं की तारीखों को लेकर अनिश्चितता बनी रहती थी। कई बार परीक्षाएं एक-दूसरे के आसपास आयोजित होती थीं, जिससे अभ्यर्थियों को तैयारी करने में परेशानी होती थी। भर्ती कैलेंडर से दूरदराज के गांवों में रहकर तैयारी करने वाले युवाओं को भी अपनी पढ़ाई की योजना बनाने में मदद मिलती है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने एक लाख पदों पर भर्ती की योजना के संबंध में कैलेंडर जारी किया और युवाओं को परीक्षाओं की संभावित समय-सारिणी बताई। उन्होंने यह भी दावा किया कि राजस्थान में पेपर लीक की घटनाओं पर रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं.
रोजगार के साथ स्टार्टअप पर भी ध्यान देने की जरूरत
शंकर गोरा ने कहा कि युवाओं की सबसे बड़ी चिंता रोजगार है, लेकिन रोजगार का मतलब केवल सरकारी नौकरी तक सीमित नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक, स्टार्टअप, स्वरोजगार और नवाचार के जरिए भी युवा रोजगार देने वाले बन सकते हैं.
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्टार्टअप और नवाचार को प्रोत्साहन देने के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज युवा विभिन्न क्षेत्रों में नए कारोबार शुरू कर रहे हैं और तकनीक तथा उद्यमिता के जरिए रोजगार के अवसर पैदा कर रहे हैं.
उन्होंने विपक्ष के इस आरोप को खारिज किया कि भाजपा युवाओं के मुद्दों पर सक्रिय नहीं है। शंकर गोरा ने कहा कि मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री युवाओं से संवाद करते हैं और उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास करते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा युवा मोर्चा लगातार युवाओं से संपर्क करता है और उनकी राय जानता है.
आंदोलनों को लेकर बीजेपी ने विपक्ष पर साधा निशाना
शंकर गोरा ने आरोप लगाया कि विपक्ष युवाओं के मुद्दों को राजनीतिक रूप देने की कोशिश करता है। उन्होंने विश्वविद्यालय और स्थानीय निकाय चुनावों के परिणामों का हवाला देते हुए कहा कि चुनावों में भाजपा को मिलने वाला समर्थन इस बात का संकेत है कि जनता सरकार के विकास कार्यों को भी महत्व देती है.
उन्होंने कहा कि पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी समस्याओं पर कार्रवाई के साथ-साथ सड़क, रेल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.
हालांकि, जब उनसे आरपीएससी में नियुक्तियों, आयोग के पुनर्गठन और भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण के सुधारों को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में लगातार सुधार किए जा रहे हैं और आगे भी नियुक्तियों तथा व्यवस्था को बेहतर बनाने के प्रयास होंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होने देगी.
हनुमान किसान बोले-भर्ती कैलेंडर जारी करना काफी नहीं
बेरोजगार युवाओं की समस्याओं को लेकर सक्रिय हनुमान किसान ने चर्चा में सरकार से जवाबदेही की मांग की. उन्होंने कहा कि युवा कांग्रेस, भाजपा और निर्दलीय उम्मीदवारों सहित अलग-अलग राजनीतिक विकल्पों को समर्थन देते हैं. जब कोई सरकार बनती है, तो युवाओं को उम्मीद होती है कि वह रोजगार, भर्ती और भविष्य की सुरक्षा से जुड़े वादे पूरे करेगी.
हनुमान किसान ने कहा कि चुनाव के समय राजनीतिक दल अपने घोषणा पत्रों में रोजगार और भर्ती को लेकर बड़े वादे करते हैं, लेकिन जब इन वादों को पूरा करने में देरी होती है, तो युवाओं में नाराजगी बढ़ती है. उन्होंने कहा कि आज का युवा सोशल मीडिया पर अपनी बात रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह व्यवस्था से सीधे सवाल भी पूछ रहा है.
आरपीएससी में स्थायी नियुक्तियों और जवाबदेही का मुद्दा उठाया
हनुमान किसान ने राजस्थान लोक सेवा आयोग यानी आरपीएससी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि आयोग लाखों युवाओं के भविष्य का निर्धारण करता है, इसलिए वहां स्थायी अध्यक्ष और सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों की व्यवस्था तथा प्रशासनिक जिम्मेदारियों का स्पष्ट होना जरूरी है.
उन्होंने भाजपा सरकार के सत्ता में आने से पहले आरपीएससी को भंग करने के वादे का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि कानूनी कारणों से आयोग को भंग करना संभव नहीं है, तो कम से कम उसमें ऐसे सुधार होने चाहिए जिनसे अभ्यर्थियों का भरोसा कायम हो सके.
हनुमान किसान ने कहा कि भर्ती कैलेंडर जारी करना अच्छी पहल है, लेकिन उसका समय पर पालन भी उतना ही जरूरी है. उन्होंने दावा किया कि कैलेंडर में शामिल कुछ भर्तियों की समयसीमा पूरी नहीं हुई और कुछ पदों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है.
उन्होंने शिक्षा विभाग में 10 हजार विविध पदों पर भर्ती के उल्लेख का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि इन पदों का विवरण और भर्ती की समयसीमा अभ्यर्थियों को स्पष्ट रूप से क्यों नहीं बताई जा रही। उन्होंने कहा कि एक सरकारी पद पाने के लिए युवा कई साल तक पढ़ाई करते हैं और उनके परिवार आर्थिक तथा मानसिक दबाव झेलते हैं। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया को लेकर अनिश्चितता युवाओं की परेशानी बढ़ाती है.
स्वरोजगार योजना और ऋण मिलने पर भी उठाए सवाल
हनुमान किसान ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार की ओर से युवाओं को बिना गारंटी ऋण उपलब्ध कराने की बात कही गई, लेकिन उनके अनुसार कई युवाओं को बैंक स्तर पर ऋण लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.
उन्होंने कहा कि केवल योजना की घोषणा कर देना पर्याप्त नहीं है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंद युवाओं तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए सरकारी भर्तियों के साथ स्वरोजगार योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी ध्यान देना होगा.
हनुमान किसान ने आंदोलन की अनुमति और सरकार के साथ बातचीत की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए. उन्होंने बताया कि 2024 में फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती को लेकर आंदोलन करने के लिए उन्हें लंबे समय तक अनुमति नहीं मिली और इस मामले में न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा.
उन्होंने कहा कि जब 500 से 600 बेरोजगार युवा अपने खर्च पर जयपुर पहुंचते हैं, तो उनकी मांगों को सुनने और ज्ञापन लेने के लिए जिम्मेदार अधिकारी या जनप्रतिनिधि उपलब्ध होने चाहिए। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में सरकार और बेरोजगार युवाओं के बीच संवाद की व्यवस्था मजबूत होना बेहद जरूरी हैय.
हनुमान किसान ने उपेन यादव के आंदोलनकारी अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि बेरोजगारों की समस्याओं को लेकर आवाज उठाना जरूरी है, चाहे सरकार किसी भी राजनीतिक दल की हो.
नौकरियों के आंकड़ों पर आमने-सामने भिड़े युवा नेता
चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ओर से करीब 1.90 लाख से अधिक नौकरियां देने के दावे पर भी बहस हुई। उपेन यादव ने कहा कि इस आंकड़े में पिछली सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई कुछ भर्तियों के अभ्यर्थियों को मिली नियुक्तियां भी शामिल हैं। उनके मुताबिक, लंबित भर्तियों को पूरा करना भी सरकार की जिम्मेदारी है और वर्तमान सरकार ने पहले से चल रही कुछ भर्तियों में नियुक्तियां दी हैं.
वहीं, हनुमान किसान ने कहा कि रोजगार के आंकड़ों के साथ यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि कितने पदों पर नियुक्तियां पूरी हुईं, कितनी भर्तियां लंबित हैं और भर्ती कैलेंडर के तहत घोषित पदों में से कितनों पर प्रक्रिया आगे बढ़ी है.
उन्होंने कहा कि यदि सरकार एक लाख पदों पर भर्ती का कैलेंडर जारी करती है, तो उसकी नियमित निगरानी होनी चाहिए. घोषित पदों, परीक्षा की तारीखों, परिणामों और नियुक्तियों की स्थिति सार्वजनिक होने से युवाओं का भरोसा बढ़ेगा.
इस बहस में एक अहम अंतर सामने आया। उपेन यादव ने भर्ती प्रक्रिया में सुधार और पूरी हो चुकी नियुक्तियों को सरकार की उपलब्धि बताया, जबकि हनुमान किसान ने कहा कि उपलब्धियों के दावों के साथ लंबित भर्तियों और वादों की स्थिति भी सामने रखी जानी चाहिए.
पेपर लीक पर के दावे बनाम व्यवस्था में सुधार की मांग
पेपर लीक का मुद्दा चर्चा के सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में रहा। उपेन यादव और शंकर गोरा ने भाजपा सरकार के कार्यकाल में एसआईटी के गठन, आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और भर्ती प्रक्रिया में सुधार का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि पेपर लीक के मामलों में कार्रवाई के साथ फर्जी दस्तावेजों और प्रमाणपत्रों के खिलाफ भी कदम उठाए गए हैं,
दूसरी ओर, राहुल ने कहा कि राजस्थान की शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था की प्रतिष्ठा को बहाल करना जरूरी है. उन्होंने सीकर और कोटा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के भविष्य तथा राज्य में रोजगार के अवसरों की स्थिति पर सवाल उठाए.
हनुमान किसान ने भर्ती व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और आयोगों की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया। उनके मुताबिक, पेपर लीक पर रोक लगाना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ भर्ती प्रक्रिया की समयबद्धता, संस्थागत सुधार और नियुक्तियों में पारदर्शिता भी जरूरी है.
नीट पेपर लीक के मामले में भी चर्चा के दौरान आरोप-प्रत्यारोप हुए। राहुल ने राजस्थान की छवि और परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए, जबकि शंकर गोरा ने कहा कि नीट पेपर लीक के मामले में राजस्थान की एसओजी ने आरोपियों को पकड़ा और बाद में मामला सीबीआई को सौंपा गया। इस दौरान पेपर लीक की घटना के स्थान और जांच को लेकर दोनों पक्षों के बीच बहस हुई.
युवाओं की समस्या का समाधान कैसे निकलेगा
चारों युवाओं नेताओं से सवाल किया कि युवाओं की समस्याओं का वास्तविक समाधान कहां से निकलेगा. क्या सरकार बदलने से रोजगार, भर्ती में देरी और पेपर लीक जैसे मुद्दे खत्म हो जाएंगे या इसके लिए प्रशासनिक और संस्थागत स्तर पर व्यापक बदलाव की जरूरत है?
राहुल ने कहा कि रोजगार की कमी, शिक्षा के विभिन्न स्तरों पर विद्यार्थियों का पढ़ाई छोड़ना और नियमित रोजगार के सीमित अवसर ऐसी समस्याएं हैं जिनका समाधान केवल राजनीतिक दलों के बीच बहस से नहीं निकलेगा। उन्होंने प्रशासनिक सुधार और सभी राजनीतिक दलों की जवाबदेही पर जोर दिया.
उपेन यादव ने कहा कि आंदोलन और संघर्ष के जरिए युवाओं की समस्याओं को उठाना जरूरी है. उनके मुताबिक, भर्ती प्रक्रिया में हुए सुधारों को आगे बढ़ाना चाहिए और युवाओं को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाते रहना चाहिए.
शंकर गोरा ने सरकार की ओर से भर्ती कैलेंडर, रोजगार और स्वरोजगार के लिए किए जा रहे प्रयासों का बचाव किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को सरकारी नौकरियों के साथ स्टार्टअप और उद्यमिता के अवसरों पर भी ध्यान देना चाहिए.
हनुमान किसान ने कहा कि सरकार को अपने वादों पर जवाब देना होगा और भर्ती कैलेंडर की नियमित निगरानी सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने युवाओं के साथ संवाद और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की जरूरत बताई.
aajtak.in