अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि दुनिया की तीन सबसे बड़ी परमाणु ताकतों अमेरिका, रूस और चीन के नेताओं के बीच हथियारों पर नियंत्रण को लेकर बातचीत होनी चाहिए. भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री से मुंबई में जब पूछा गया कि क्या चीन परमाणु हथियारों पर नियंत्रण के मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है. इस पर रुबियो ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि चीन इसके लिए तैयार है या नहीं, लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बातचीत के लिए तैयार हैं.
मार्को रुबियो ने कहा, "धरती पर परमाणु हथियार रखने वाले तीन सबसे ताकतवर देशों के नेताओं का एक-दूसरे से बातचीत करना पूरी तरह सही है. उनके बीच कई मुद्दों पर गंभीर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन बातचीत जरूरी है." उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा, "अगर आप रूस और यूक्रेन के बीच शांति समझौता कराना चाहते हैं, तो रूस और यूक्रेन से बात किए बिना यह कैसे संभव होगा? आपको उनसे बात करनी होगी. कूटनीति और बातचीत का यही बुनियादी सिद्धांत है. आपको दूसरे पक्ष से बात करने में सक्षम होना चाहिए."
यह भी पढ़ें: मुंबई में जयशंकर से मिले अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो, ट्रेड डील पर बोले- हमें तो बहुत उम्मीद है
'हथियारों पर बातचीत दुनिया के लिए अच्छा कदम'
मार्को रुबियो ने कहा कि अगर अमेरिका, रूस और चीन के नेता परमाणु हथियारों पर नियंत्रण जैसे मुद्दों पर बातचीत करते हैं, तो यह पूरी दुनिया के लिए सकारात्मक होगा. उन्होंने कहा कि ट्रंप ने इस तरह की बातचीत के लिए अपनी इच्छा जताई है और अमेरिकियों को इस पहल पर गर्व होना चाहिए. हालांकि, रुबियो ने चीन के रुख को लेकर अनिश्चितता जताई. उन्होंने कहा कि चीन का अब तक यह कहना रहा है कि वह परमाणु हथियारों पर बातचीत तब करेगा, जब उसका हथियारों का जखीरा दूसरे देशों के बराबर पहुंच जाएगा.
ट्रंप भी तीन देशों के बीच बातचीत की वकालत कर चुके हैं
पिछले महीने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के बाद ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने अमेरिका, रूस और चीन के बीच परमाणु हथियारों पर नियंत्रण को लेकर त्रिपक्षीय बातचीत का मुद्दा उठाया था. पिछले सप्ताह न्यूजमैक्स को दिए इंटरव्यू में भी ट्रंप ने दावा किया था कि वह रूस और चीन के साथ परमाणु निरस्त्रीकरण पर बातचीत कर रहे हैं. चीन के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा था कि इस समय चीन से त्रिपक्षीय परमाणु निरस्त्रीकरण वार्ता में शामिल होने की उम्मीद करना न तो निष्पक्ष है, न उचित और न ही व्यावहारिक.
पुतिन और जिनपिंग के साथ बैठक पर भी चर्चा
हाल में ऐसी खबरें आई थीं कि ट्रंप, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तरफ से प्रस्तावित बैठक के लिए तैयार हैं. इस बैठक में यूक्रेन युद्ध पर चर्चा की बात कही गई थी. इस पर ट्रंप ने कहा था कि बातचीत का मुख्य मुद्दा यूक्रेन नहीं, बल्कि हथियार और परमाणु निरस्त्रीकरण होगा. हालांकि, यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए यूक्रेन की भागीदारी जरूरी मानी जाती है. अमेरिका, रूस और चीन के बीच परमाणु हथियारों पर बातचीत का मुद्दा इससे अलग है, जिसके तहत तीनों देश हथियारों की होड़ को रोकने के उपायों पर चर्चा कर सकते हैं.
यह भी पढ़ें: महाराष्ट्र CM देवेंद्र फडणवीस से मिले सर्जियो गोर-मार्को रुबियो, गेटवे ऑफ इंडिया का किया दौरा
परमाणु हथियारों पर नियंत्रण की कोशिशें लंबे समय से अटकीं
अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों को सीमित करने के लिए 2010 में न्यू स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी यानी न्यू स्टार्ट समझौता हुआ था. इस समझौते ने दोनों देशों के तैनात परमाणु हथियारों पर सीमा तय की थी. हालांकि, इसके बाद दोनों देश नए समझौते पर सहमति नहीं बना सके.
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 2013 में रूस के साथ रणनीतिक परमाणु हथियारों में एक-तिहाई और कटौती के लिए बातचीत का प्रस्ताव दिया था, लेकिन पुतिन ने इसे स्वीकार नहीं किया. बाद में अमेरिका और रूस के बीच हथियारों की सीमा तय करने वाले नए समझौते पर बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी.
इस बीच चीन ने भी अपने परमाणु हथियारों का जखीरा बढ़ाया है. परमाणु हथियार रखने वाले देशों के बीच हथियारों की होड़ को रोकने और परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में प्रगति करने की कोशिशें एक दशक से ज्यादा समय से ठहरी हुई हैं.
बातचीत के लिए ठोस प्रस्तावों की जरूरत
परमाणु हथियारों पर नियंत्रण के समर्थकों का मानना है कि सिर्फ नेताओं की मुलाकात या बयान से निरस्त्रीकरण संभव नहीं होगा. इसके लिए ऐसे ठोस प्रस्तावों की जरूरत होगी, जिन्हें सभी पक्ष स्वीकार कर सकें और जिनकी निगरानी भी की जा सके.
एक प्रस्ताव यह है कि परमाणु हथियार रखने वाले पांच देशों के समूह में शामिल अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन नए रणनीतिक हथियारों की तैनाती पर रोक लगाने के लिए सहमत हों. इसके साथ अमेरिका और रूस अपने बड़े परमाणु हथियारों के जखीरे में और कटौती पर बातचीत दोबारा शुरू कर सकते हैं.
रूस ने भी हाल में अमेरिका के साथ परमाणु हथियारों पर नियंत्रण की बातचीत फिर शुरू करने की इच्छा जताई थी. ऐसे में अमेरिका, रूस और चीन के नेताओं के बीच संभावित बातचीत को परमाणु हथियारों की होड़ कम करने की दिशा में शुरुआती कदम के तौर पर देखा जा सकता है.
aajtak.in