असम में नगांव की कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई और छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल समेत अन्य नेताओं को काफिले पर हमला मामले में कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं.
कांग्रेस नेता नासिर हुसैन ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि चुनाव आयोग को इस मामले में तुरंत संज्ञान लेते हुए नगांव डीसी और एसपी से रिपोर्ट मंगानी चाहिए और जिम्मेदार अधिकारियों को सस्पेंड करना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग की चुप्पी और भेदभावपूर्ण रवैये से बीजेपी को फायदा मिल रहा है. कांग्रेस ने चुनाव संपन्न होने तक विपक्षी नेताओं, उम्मीदवारों, कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को पुख्ता सुरक्षा मुहैया कराने की पुरजोर मांग की है.
विपक्षी नेताओं पर हमलों का पैटर्न
प्रेस कॉन्फ्रेंस में नासिर हुसैन ने दावा किया कि यह हमला कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि विपक्षी नेताओं की आवाज दबाने के लिए एक सुनियोजित पैटर्न है. उन्होंने याद दिलाया कि जनवरी 2024 में 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' के दौरान राहुल गांधी और जयराम रमेश की कार पर हमला हुआ था.
इसके अलावा 13 नवंबर 2024 को समागुरी उपचुनाव, 20 फरवरी 2025 को रुपाहीहाट, 27 अप्रैल 2025 को नगांव पंचायत चुनाव, 30 मार्च 2026 को नदुवार में सुनील कुमार छेत्री और अप्रैल 2026 में बिदिशा न्योक पर हमले हो चुके हैं. यही नहीं 18 सितंबर 2026 को यूपी में लक्ष्मीकांत निषाद और पश्चिम बंगाल में महुआ मोइत्रा पर भी हमले किए गए.
पहले दी गई थी सूचना
कांग्रेस ने सवाल उठाया कि जब प्रदेश अध्यक्ष द्वारा पुलिस प्रशासन को पहले ही हमले की आशंका की लिखित सूचना दे दी गई थी, क्योंकि एक दिन पहले ही धिंग धुपगुड़ी इलाके में भी ऐसा ही हमला हुआ था. ऐसे में सवाल है- इस हमले का जिम्मेदार कौन है?. साथ ही मौके पर मौजूद केंद्रीय बलों और पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित क्यों नहीं किया?.
नासिर हुसैन ने कहा कि नकाबपोश लोग हाथों में पत्थर, डंडे, बैट और हॉकी स्टिक लेकर खड़े थे और काफिले पर एसिड तक फेंका गया. इस सुनियोजित हिंसा में एआईसीसी सचिव मनोज चौहान की पसलियों में गंभीर चोटें आईं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा.
इसके अलावा घटना की सच्चाई छिपाने के लिए मौके पर मौजूद पत्रकारों के साथ भी मारपीट की गई.
सेलेक्टिव रूल ऑफ लॉ पर गंभीर सवाल
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की चुप्पी साफ तौर पर उसकी और सत्ता पक्ष की मिलीभगत को जाहिर करती है. विपक्षी नेताओं को मामूली बयानों पर तुरंत नोटिस भेज दिए जाते हैं, लेकिन दंगाइयों और गालियां देने वालों के खिलाफ आयोग कोई कार्रवाई नहीं करता.
पार्टी ने मांग की है कि सभी पुरानी और नई घटनाओं की स्वतंत्र जांच कराई जाए, एफआईआर और रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए. कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि ऐसे डराने वाले माहौल का मकसद वोटिंग प्रतिशत गिराना और सत्ता पक्ष को फायदा पहुंचाना है, जिस पर आयोग को निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए.
कांग्रेस का बीजेपी पर हमला
वहीं, इस घटना के लेकर कांग्रेस नेता चुनाव आयोग और बीजेपी पर हमलावर हैं. इसी बीच कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने असम की घटना एक्स पर आक्रोश व्यक्त करते हुए पोस्ट में लिखा, 'असम में चुनाव प्रचार के दौरान भूपेश बघेल, गौरव गोगोई और कांग्रेस के अन्य नेताओं के काफिले पर हुआ पथराव केवल एक घटना नहीं है, ये चुनावी हिंसा के जरिए बीजेपी द्वारा चुनाव आयोग की शह पर संभावित हार को टालने और कांग्रेस व नौगांव के मतदाताओं को डराने-धमकाने की शर्मनाक कोशिश है.'
EC का पक्षपाती रवैया
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल से लेकर असम तक, चुनाव के दौरान विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर दोहरे मापदंडों को देश देख रहा है. महाराष्ट्र में शिवसेना और NCP को विभाजन के नाम पर दोनों पार्टियों के नाम और चुनाव-चिह्न पर रोक लगाने वाले फैसलों से लेकर पश्चिम बंगाल में AITMC के नाम और चुनाव-चिह्न को रोकने के ताजा मामले में चुनाव आयोग की पक्षपाती रवैया साफ हो गया है.
उन्होंने बंगाल उपचुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम उपचुनाव में AITMC उम्मीदवार को नामांकन वापस लेने पर मजबूर करने के बाद कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी ने तो पश्चिम बंगाल के चुनावी माहौल और केन्द्रीय चुनाव आयोग की निष्पक्षता की पोल खोल दी है. SIR और चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी केंद्रीय चुनाव आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर पहले ही देशभर में सवाल उठ रहे हैं.
जयराम रमेश ने चुनाव को लोकतंत्र का उत्सव बताते हुए कहा, 'चुनाव लोकतंत्र का उत्सव होता है, लेकिन सत्ता के अहंकार में बीजेपी ने इसे हिंसा का मैदान बना दिया है. बिलकुल स्पष्ट है कि बीजेपी का लोकतांत्रिक मूल्यों और परंपराओं में कोई विश्वास नहीं है और किसी भी तरह से चुनाव जीतना ही उनका एकमात्र मकसद है.'
क्या है मामला
दरअसल, असम में नगांव लोकसभा उपचुनाव के प्रचार के दौरान सोमवार शाम करीब 4 बजे समागुड़ी विधानसभा क्षेत्र के बाराम बाजार में बीजेपी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प की जानकारी सामने आई थी.
पुलिस के अनुसार ये घटना तब हुई, जब असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई के नेतृत्व में धुबरी सांसद रकीबुल हुसैन, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उपचुनाव प्रत्याशी शिबामोनी बोरा के साथ काफिला लारीरमुख जनसभा के लिए निकला था. इसी दौरान बीजेपी समर्थक बाराम बाजार में कांग्रेस नेताओं को काले झंडे दिखाने के लिए जमा हुए थे. जब करीब 30 से 40 कांग्रेस कार्यकर्ता मोटरसाइकिल पर वहां से गुजरे, तो 'गौरव गोगोई गो बैक', 'कांग्रेस गो बैक' और 'रकीबुल गो बैक' के नारे लगाए गए, जिससे तनाव फैल गया.
वहीं, जनसभा खत्म होने के बाद जब कांग्रेस का काफिला उसी रास्ते से वापस लौटा तो संदिग्ध बीजेपी समर्थकों ने उनके वाहनों पर जमकर पथराव कर दिया. पुलिस ने पथराव और हमले में शामिल दो संदिग्ध हमलावरों को हिरासत में ले लिया है और उनसे पूछताछ जारी है.
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